ब्लॉगसेतु

anup sethi
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सुमनिका द्वारा करीब पचीस साल पहले चारकोल से बनाया गया स्केच यह थकना भी कोई थकना है लल्लू! हम अजीबोगरीब वक्त में फंस गए हैं । एक तरह से सारी दुनिया ही ठहर सी गई है । आगे हम लोगों को जीवन कैसा होगा कुछ पता नहीं ।  कुछ लोग कोरोना के शिकार हो गए हैं, कुछ उन्ह...
अजय  कुमार झा
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सोच रहा हूँ कि कल को फेसबुक जब मेमोरीज़ में ये आज कल हमारे द्वारा लिखी कही गयी बातों को दिखाएगा उस वक्त तक हम निश्चित रूप से इन झंझावातों से गुज़र चुके होंगे और ये अच्छे बुरे दिन ही यादों के पन्नों पर अंकित होकर रह जाएंगे। इन हालातों से ,इन हादसों से हम क्या कितना सब...
दयानन्द पाण्डेय
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दयानन्द पाण्डेय
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अजय  कुमार झा
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पहला दिन : बंदी से पहले और बंदी वाले पहले दिन लोगों ने दुकानों पर                         मेला लगायादूसरा दिन : दूसरा दिन ,पुलिस ने उठक बैठक करवाते मुर्गा बनाते ,लाठी         ...
अजय  कुमार झा
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पिछले एक सप्ताह के एकांतवास में ,छत पर अपनी बगिया में सत्तर अस्सी पौधे लगा चुका हूँ | फूल पत्तों के अलावा फिलहाल तोरी ,भिंडी ,घीया ,पालक ,धनिया ,नीम्बू मिर्च सब उगाई लगाई जा रही है | दिन का  अधिक समय छत पर बनी इस बगिया नुमा आँगन में ही बीत रहा है | सुबह शाम झा...
अजय  कुमार झा
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मैं शुरू से ही ये मान रहा था और जहां भी मुझे लगा यही कह रहा था की नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने वालों के सामने हर हाल में सिर्फ और सिर्फ वर्दी वाले ही होने चाहिए ,सत्ता और प्रशासन ही रहने चाहिए | चाहे कुछ  भी हो ,इस कानून का और सरकार के इस रुख का सम...
दयानन्द पाण्डेय
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दयानन्द पाण्डेय
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दयानन्द पाण्डेय
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