ब्लॉगसेतु

विजय राजबली माथुर
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 फर्जीवाड़ा क्यों समझने के लिए यह विवरण देखें- मेरे इस लिंक पर प्रस्तुत लेख- http://vidrohiswar.blogspot.in/2012/09/blog-post_14.htmlपर 'एंटी वाइरस' नाम से किसी अज्ञात ने टिप्पणी दी जबकि टिप्पणी बाक्स के साथ स्पष्ट घोषणा है की,-"ढोंग-पाखंड को बढ़ावा देने वाली...
ललित शर्मा
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अजय  कुमार झा
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ब्लॉगिंग में जितना आकर्षण ब्लॉग पोस्टों का रहा है शुरू से लगभग उतना ही उन पर दर्ज़ टिप्पणियों का भी रहा है । और यकीन मानिए कभी कभी तो शायद उससे भी ज्यादा । वैसे भी मुझे तो जितना पोस्टें अपनी ओर खींचती हैं उतनी ही प्रभावित टिप्पणियां भी करती हैं । ऐसा लगता है मानो आज...
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anup sethi
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मैं बचपन में गांव में था तो स्कूल की कोई याद नहीं है, कब लगता था कब छूटता था। बस आना जाना भर याद है। रास्ते में एक खड्ड पड़ती थी। जंगल था। झाड़ियां थीं। उनमें फल होते थे। जंगली बेर होते थे। यही सब याद है। घर में ट्रक के टायर से निकाले हुए रबड़ के सख्त चक्के को 'गड्...
 पोस्ट लेवल : टिप्पणी अंतर्नाद
अजय  कुमार झा
728
पिछले कुछ समय में अक्सर अंतर्जालीय मित्रों के बीच एक बात बार बार उठी कि , हिंदी ब्लॉग जगत में पहले तो पाठकों की और अब टिप्पणी करने वाले पाठकों का रुझान कम हो रहा है । नहीं जानता कि ऐसा क्या सब महसूस कर रहे हैं । टिप्पणियों का आकर्षण और उनका अपना महत्व हमेशा से ही र...
 पोस्ट लेवल : टिप्पणी चर्चा
anup sethi
285
10 दिसंबर को यहां मुंबई के एक उपनगर कल्‍याण में एक कालेज में हिंदी ब्‍लॉगिंग पर एक सेमिनार में भाग लेने का मौका मिला। इसमें कई ब्‍लॉर आए थे। अकादमिक जगत के लागों के बीच यह चर्चा इस दृष्टि से अच्‍छी थी कि अगर हिंदी विभाग ब्‍लागिंग में रुचि लेने लग जाएं तो हिंदी ब्‍ल...
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anup sethi
285
कुछ समय पहले अमृतसर में पंजाब नाटशाला देखने का मौका मिला.  उत्‍तर भारत में शिमला में गेयटी थियेटर और चंडीगढ़ में टेगोर थियेटर के अलावा और कोई नाम ध्‍यान में नहीं आता है. अमृतसर की पंजाब नाटशाला  अपनी तरह का नवीन नाट्यगृह है. खासियत यह है कि यह ए...
anup sethi
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पिछली बरसात में छाते पर चर्चा चली थी. इस बीच हमारे बड़े भाई तेज जी ने वो पोस्‍ट देखी और छाते पर यह टिप्‍पणी भेजी - तुम्हारे ब्लाग में से मैंने "छाता" पढ़ा तो मुझे छत्तरोड़ू की बड़ी याद आई,  वो वचपन की सारी यादें... तुम्हें शायद याद होगा कि नहीं, ग्रामीण लोग "ऒ...
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विजय राजबली माथुर
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'विद्रोही स्व- स्वर में'शीर्षक से एक तुकबंदी तब लिखी थी जब होटल मुग़ल,आगरा में किसी संघर्ष का समय था.अचानक किसी बात के जवाब में आफिस में तत्काल लिख कर इसे प्रसारित कर दिया था.इसी शीर्षक से यह  ब्लॉग भी चल रहा है और आज इसे प्रारम्भ किये हुए एक वर्ष भी पूर्...
 पोस्ट लेवल : सम्मान टिप्पणी नसीहत
विजय राजबली माथुर
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इसी शीर्षक से एक तुकबंदी तब लिखी थी जब होटल मुग़ल,आगरा में किसी संघर्ष का समय था.अचानक किसी बात के जवाब में आफिस में तत्काल लिख कर इसे प्रसारित कर दिया था.इसी शीर्षक से एक पृथक  ब्लॉग भी चल रहा है और आज उसे प्रारम्भ किये हुए एक वर्ष भी पूर्ण हो गया है.यह अलग ब...
 पोस्ट लेवल : सम्मान टिप्पणी नसीहत