ब्लॉगसेतु

अजय  कुमार झा
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कुछ दिनों पूर्वसमय करीब शाम के आठ बजेस्थान : पूर्व दिल्ली की कोई गलीपुत्र आयुष को जुडो कराटे की प्रशिक्षण कक्षा से वापस लेकर लौट रहा हूँ | तीन दिनों से लगातार हो रही बूंदाबांदी ने सड़क को घिचपिच सा कर दिया है | अचानक ही स्कूटी की तेज़ लाईट में सड़क के बीचों बीच कोई औं...
दयानन्द पाण्डेय
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दयानन्द पाण्डेय
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दयानन्द पाण्डेय
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दयानन्द पाण्डेय
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anup sethi
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लगे रहो मुन्‍ना भाई फिल्‍म 2006 में आई थी। उसके बाद गांधीवाद को गांधीगिरी नाम मिला और उछाल में भी रहा। यह भी लगा कि सामाजिक आंदोलनों की शुरुआत फिल्‍मों से भी हो सकती है। लेकिन जल्‍दी ही इस अवधारणा की हवा निकल गई। 12 साल बाद इस समीक्षा पर नजर डाली जाए...
केवल राम
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गत अंक से आगे.....हिन्दी ब्लॉगिंग का प्रारम्भिक दौर बहुत ही रचनात्मक था. इस दौर में जो भी ब्लॉगर ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय थे, वह इस माध्यम के प्रति काफी रचनात्मक और गम्भीर थे. हालाँकि उस समय अंतर्जाल पर हिन्दी को लेकर कुछ तकनीकी बाधाएं जरुर थीं, लेकिन हिन्दी...
अजय  कुमार झा
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बहती नदी के संग तू बहता जा ,मन तू अपने मन की कहता जा ,न रोक किसी को ,न टोक किसी को,थोडा वो झेल रहे ,थोडा तू भी सहता जा ..वर्तमान में सोशल नेट्वर्किंग साईट्स पर ,उपस्थति बनाए रखने , किसी भी वाद विवाद में पड़ने , तर्क कुतर्क के फेर में समय खराब करने से बहुत बेहतर यही...
केवल राम
320
जरा उन दिनों को याद करते हैं जब हम हर दिन अपना ब्लॉग देखा करते थे. कोई पोस्ट लिखने के बाद उस पर आई हर टिप्पणी को बड़े ध्यान से पढ़ते थे. साथ ही यह भी प्रयास होता था कि जिसने पोस्ट पर टिप्पणी की है, बदले में उसके पोस्ट पर जाकर भी टिप्पणी कर आयें. हम कोई पोस्ट लिखें या...
दयानन्द पाण्डेय
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