ब्लॉगसेतु

YASHVARDHAN SRIVASTAV
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आयकर अधिकारियों द्वारा विभिन्न बैंकों, निजी वित्तीय प्रतिष्ठानों और स्वर्णकारों के यहां छापे डालने से करोड़ों नए नोट, सोने की ईंटें और जन-धन खातों में जमा किया गया लाखों का काला धन मिल रहा है। इससे यह बात साबित होती है कि प्रधानमंत्री मोदी की राह आसान नहीं है। यदि ब...
anup sethi
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अक्‍तूबर 2016 में छपे चिंतनदिशा पत्रिका के पत्रिका-परिक्रमा स्‍तंभ में पत्रिकाओं और सोशल मीडिया पर मुनि मुक्तकंठ की टिप्‍पणी छपी है। दैनिक समाचार समाचारों को एक दिन बाद रद्दी में बदलता है लेेकिन फेसबुक दैनिक अखबारों से भी ज्‍यादा तेजी से चल...
अजय  कुमार झा
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... एक कहावत है बहुत ही पुरानी और दिलचस्प ,बात यह है कि हमारी हर कहावत के पीछे जो सच छुपा होता है वह हमारे पूर्वजों के अनुभव का निचोड़ होता है तो जैसा कि मैं कह रहा था कि एक कहावत है पथ्य (दवा ) से परहेज भली ||अर्थात सच में देखा जाए तो दिल्ली के वर्तमान हालात ,&nbs...
anup sethi
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यह लेख मैंने शायद सन 1981 में लिखा था। मैं उन दिनों गुरु नानक देव विश्‍वविद्यालय अमृतसर में एम. फिल. में पढ़ रहा था। धर्मशाला कालेज के मेरे प्रोफैसर डॉ गौतम व्‍यथित लोक साहित्‍य के विशेषज्ञ थे और उन्‍होंने कांगड़ा लोक साहित्‍य परिषद भी बनाई थी जो काफी सक्रिय थी। उस...
दयानन्द पाण्डेय
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दयानन्द पाण्डेय
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दयानन्द पाण्डेय
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दयानन्द पाण्डेय
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pradeep beedawat
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 बीते दो दिन में बड़ा नाटक चला। राम नाम की नाव में सवार पार्टी इन दिनों अम्बेडकर के चरणों में ‘फूल’ चढ़ा रही थी। दूसरी ओर कभी पार्टी से बाहर करके बाद में बाबा साहब के अनुयायी रामजी को हाथ जोड़ते नजर आए। फिर कौन कह रहा है कि भारत असहिष्णु है। बाबा साहब तो राम,...
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दयानन्द पाण्डेय
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