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Shreesh Pathak
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सच एक नहीं होता, एक वह हो ही नहीं सकता क्यूंकि सब एक साथ एक जगह खड़े नहीं होते l सबका अपना अपना सच हो सकता है, किसी का सच छोटा या बड़ा नहीं हो सकता l एक समय में किसी विषय पर सूचनाओं की उपस्थिति सम्पूर्ण नहीं हो सकती, इसलिए सच, समय समय का भी हो सकता है l कोई निष्कर्...
दयानन्द पाण्डेय
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दयानन्द पाण्डेय
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दयानन्द पाण्डेय
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दयानन्द पाण्डेय
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YASHVARDHAN SRIVASTAV
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आजादी के 68 वर्षों बाद भी हिंदी संवाद की नहीं, सिर्फ अनुवाद की भाषा बनकर रह गई है। तमाम सांविधानिक अनुच्छेदों और उपबंधों के बावजूद हिंदी हाशिये पर ही रही है। संविधान निर्माताओं ने अनुच्छेद 343 ( 1 ) में देवनागरी लिपि में लिखी गई हिंदी को संघ की भाषा का दर्जा दिया।...
YASHVARDHAN SRIVASTAV
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अंग्रेजी ! व्यर्थ घबरातींतुम भारत से नहीं जा सकतीअंग्रेज चले गएआत्मा अंग्रेजी यहीं छोड़ गएआत्मा कभी नहीं मरतीअंग्रेजी ! तुम भारत से नहीं मिटसकती,हिन्दी भारत का शरीर हैऔर तुम आत्माशरीर नश्वर होता है और आत्मा परमात्माभारतीय चाहें जो करेंआत्मा को नहीं मार सकतेन उसे मरन...
दयानन्द पाण्डेय
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YASHVARDHAN SRIVASTAV
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आधुनिक हिंदी को भी डेढ़ सौ बरस से अधिक हो गए। फिर भी हम हिंदी का वास्तविक जीवन में प्रयोग कम करते हैं, क्योंकि कमी हमारी भाषा में नहीं, हमारे अंदर है, जो हम अपनी भाषा को तवज्जो न देकर विदेशी भाषाओं की तरफ रुझान कर रहे हैं। हमें अपनी हिंदी भाषा पर ही विश्वास नहीं है।...