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YASHVARDHAN SRIVASTAV
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हिंदी भारतीय राष्ट्रीय अस्मिता व सांस्कृतिक चेतना से जुड़ी भाषा है। स्वाधीनता के कुछ वर्षों के पश्चात हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिला। धीरे-धीरे यह लोकल से ग्लोबल भाषा बनकर उभर रही है। कविता, कहानी व कथा-वाचन की दुनिया से निकलकर हिंदी बाजार और रोजगार की भाषा बनी है।...
YASHVARDHAN SRIVASTAV
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इसे महज इत्तेफाक कहें, या शर्म की बात कि मातृभाषा अपने ही देश में वजूद खोती नजर आ रही है। आज ऐसा माहौल बन गया है कि जो हिंदी में बोलता है या जिसे अंग्रेजी नहीं आती, उसे लोग कम पढ़ा-लिखा समझते हैं या उसका मजाक उड़ाते हैं। यही वजह है कि ज्यादातर लोग अपने बच्चों को हिंद...
दयानन्द पाण्डेय
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anup sethi
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जीते जी मरण मेरा भेजा फिर गएला है मेरे बाप। मेरे कू किधर का नईं छोड़ा ए लोग। मयैं बौह्त अकेली रह गई रे। मेरी पुच्‍छल पकड़ के सुर्ग जाने की बात करते, पन मयैं किधर जाऊं ? दिल्‍ली के पछुआड़े के एक गांव में मेरे ऊपर ऐसा जुर्म कर डाला! मेरा नाम ले के एक भला माणुस मार डा...
दयानन्द पाण्डेय
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YASHVARDHAN SRIVASTAV
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बुद्ध ने कहा था कि किसी बात पर इसीलिए विश्वास मत करो कि वह मेरे गुरु ने कहा था या ग्रंथ ऐसा कहते हैं। हर शब्द को तर्कों के तराजू पर तौलो और अपनी बुद्धिमता से सही-गलत का निर्णय करो। इन ज्ञानी पुरुषों के दिए दिव्य ज्ञान को छोड़कर हम उनकी प्रतिमाओं के आगे झुक जाते हैं।...
दयानन्द पाण्डेय
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Shreesh Pathak
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नेता, नायक, महापुरुष, समाज-सेवक, कलाकार, सरकरी सेवक, पत्रकार, अध्यापक, अधिवक्ता, चिकित्सक, अभियंता, कवि-लेखक आदि-आदि ......,...!ये सब अलग अलग लोग हैं. इन्हें अलग-अलग ही देखना होगा...! इनमे से जो भी प्रसिद्ध हो जाता है....उनमें हम सभी के गुणों की अपेक्षा करने लग जात...
Shreesh Pathak
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Be stereotype..!They like you; so they would accept you.Refuse to be typecast..!Only those who love you; could accept.People challenge even the danger of challenge. In this way, status quoists are more dynamic.आप उन्हीं लकीरों पर चलो. लोग जो पसंद करते हैं, जरुर स्व...
दयानन्द पाण्डेय
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