ब्लॉगसेतु

YASHVARDHAN SRIVASTAV
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बुद्ध ने कहा था कि किसी बात पर इसीलिए विश्वास मत करो कि वह मेरे गुरु ने कहा था या ग्रंथ ऐसा कहते हैं। हर शब्द को तर्कों के तराजू पर तौलो और अपनी बुद्धिमता से सही-गलत का निर्णय करो। इन ज्ञानी पुरुषों के दिए दिव्य ज्ञान को छोड़कर हम उनकी प्रतिमाओं के आगे झुक जाते हैं।...
दयानन्द पाण्डेय
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Shreesh Pathak
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नेता, नायक, महापुरुष, समाज-सेवक, कलाकार, सरकरी सेवक, पत्रकार, अध्यापक, अधिवक्ता, चिकित्सक, अभियंता, कवि-लेखक आदि-आदि ......,...!ये सब अलग अलग लोग हैं. इन्हें अलग-अलग ही देखना होगा...! इनमे से जो भी प्रसिद्ध हो जाता है....उनमें हम सभी के गुणों की अपेक्षा करने लग जात...
Shreesh Pathak
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Be stereotype..!They like you; so they would accept you.Refuse to be typecast..!Only those who love you; could accept.People challenge even the danger of challenge. In this way, status quoists are more dynamic.आप उन्हीं लकीरों पर चलो. लोग जो पसंद करते हैं, जरुर स्व...
दयानन्द पाण्डेय
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Ramesh pandey
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1 अप्रैल 2015 को बिहार के हाजीपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में बीजेपी के नेता व मोदी कैबिनेट के मंत्री गिरिराज सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर नस्ली टिप्पणी की। गिरिराज का टिप्पणी क्या करना, देश की राजनीति गरमा गई। कांग्रेस और मोदी सरकार के विपक्षी अन्य सभी...
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Shreesh Pathak
443
देश के लिए किया गया कोई भी योगदान छोटा या बड़ा नहीं होता, वह महनीय ही होता है। शहादतों की तूलना करना किसी भी शहादत का अपमान ही करना है। भगत सिंह-सुखदेव-राजगुरु की शहादत इसलिए बड़ी नहीं है कि किसी और महापुरुष की शहादत छोटी है, बल्कि वह शहादत बड़ी है ही क्योंकि वो प्यार...
Shreesh Pathak
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साल 1996....!!! अखबार का पहला पन्ना थोड़ा-थोड़ा समझ आने लगा था। 'राव बनाएं, फिर सरकार' के पोस्टरों को फाड़ सहसा एक लोकप्रिय नेता भारत का प्रधानमंत्री बनने जा रहा था।उस जमाने में हम सभी उनकी तरह बोलने की नकल करते थे। शब्दों के बीच का अंतराल चमत्कार पैदा करता था, क्योंक...
दयानन्द पाण्डेय
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कुछ समय पहले मैं राजस्थान गया था।  इस बार बेटा गया । यानी पधारो म्हारो देश ! फिर-फिर ! मैं लौटा था तो यादों और अनुभव की दास्तान ले कर । बेटा  मुझ से ज़्यादा , बहुत ज़्यादा ले कर लौटा है । मैं एक सेमिनार के सिलसिले में गया था । बेटा कॉलेज टूर के बहाने घूमन...
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दयानन्द पाण्डेय
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कुछ फेसबुकिया नोट्स इतने सारे पुस्तक मेले लगते हैं । किसिम-किसिम के मेले । तो पुस्तक बिकती भी ज़रूर होगी। तो यह प्रकाशक लेखक को रायल्टी भी क्यों नहीं देते ? और कि रायल्टी देने के बजाय उलटे लेखक से ही किताब छापने के पैसे क्यों मांग लेते हैं । अभी एक मशहूर कवि...
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