ब्लॉगसेतु

अजय  कुमार झा
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पिछले वर्ष जून में जब अचानक ही केदारनाथ की आपदा सब पर कयामत बनकर टूटी तो उस त्रासदी के प्रभाव से देश भर के लोगों ने झेला । कुदरत के इस कहर से जाने कितने ही परिवार हमेशा के लिए गुम हो गए , कितने बिखर कर आधे अधूरे बच गए , जाने कितने ही परिवार में बचे खुचे लोग मानसिक...
अजय  कुमार झा
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वर्ष २०१४ केआम चुनावों से पहले ही संभावित जीत के प्रति आश्वस्त से लगते प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपने लिए अगले साठ महीनों की प्रशासनिक सेवा देने का अवसर जिस आत्मविश्वास से मांगा था उसी समय कयास लगाए जाने लगे थे कि आगामी सरकार बहुत सारे नए विकल्पों , विच...
अजय  कुमार झा
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नरेंद्र मोदी ने चुनाव के बाद दिए गए अपने धन्यवाद  भाषण के दौरान ये कहा कि "राज़नीति में कोई दुश्मन नहीं होता" और इस बात को बहुत जल्दी ही वैश्विक फ़लक पे साबित भी कर दिया जब किसी की सोच और कल्पना से कोसों दूर वाले कदम , पडोसी और शाश्चत प्रतिद्वंदी देश पाकिस्तान क...
anup sethi
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केवल राम
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गतांक से आगे.......ब्लॉग एक ऐसा शब्द जो web-log के मेल से बना है. जो अमरीका में सन 1997 के दौरान इन्टरनेट पर प्रचलित हुआ. तब से लेकर आज तक यह शब्द मात्र शब्द ही बनकर नहीं रहा है, बल्कि ब्लॉग जैसे माध्यम से अनेक व्यक्तियों ने सृजन के क्षेत्र में कई नए आयाम स्थापित क...
anup sethi
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कवि और आलोचक विजय कुमार आईडीबीआई बैंक में विकास प्रभा पत्रिका निकालते थे। विषय च‍यन साहित्‍य संस्‍कृति के अछूते पहलुओं को छूने वाला होता और साज-सज्‍जा अत्‍यंत कलात्‍मक। हर अंक कड़ी मेहनत और प्रेम से निकालते। पाठकों और साहित्‍य-समाज में इस पत्रिका को बड़ा आदर मिलत...
अजय  कुमार झा
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    पोस्टों और टिप्पणियों को सहेज़ने में मुझे विशेष आनंद आता है इसलिए समय मिलते ही मैं कभी पोस्ट लिंक्स को संजोने के बहाने तो कभी पाठकों की टिप्पणियों को यहां इस पन्ने पर टिकाने के बहाने उन्हें संभाल लिया करता हूं । पिछले दिनों पोस्टों पर आई कुछ चुनिंदा औ...
सलिल  वर्मा
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एगो राजा था. ऊ जंगल में एक रोज सिकार खेलने गया. साथ में सेनापति, मंत्री अऊर एगो नौकर भी था. जंगल में राजा को एगो हिरन देखाई दिया. पीछा करते-करते राजा अपना सब लोग से अलग हो गया. एही नहीं, सेनापति, मंत्री अऊर नौकर भी रस्ता भुलाकर जंगल में भटक गया सब.रास्ता खोजते-खोजत...
अजय  कुमार झा
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दिल्ली में रहते हुए अब ये सोचता हूं कि आखिर वो क्या वजह है कि "खबरों के संसार" के अधिकांश "देश" दिल्ली के गलियारों जैसे लगने लगते हैं ।और फ़िर इन दिनों तो यहां झाडू फ़िराई का कार्य प्रगति पर है । पॉलिटिकल स्ट्रैटजीज़ राजनीतिक मान्यताएं बगावत पर उतारू हैं , कहीं न कहीं...
अजय  कुमार झा
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आजकल शाम को टीवी पर आने वाली बहसों में सबसे ज्यादा दयनीय स्थिति दिल्ली कांग्रेस की दिखती है जो चीख चित्कार मचा सिर्फ़ तीस चालीस दिन की बालिग सरकार को भ्रष्टाचारी साबित करने का प्रमाण दे रहे होते हैं और ये पूछने पर कि फ़िर समर्थन काहे टिकाए हुए हैं पलट काहे नहीं देते...