ब्लॉगसेतु

anup sethi
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कवि और आलोचक विजय कुमार आईडीबीआई बैंक में विकास प्रभा पत्रिका निकालते थे। विषय च‍यन साहित्‍य संस्‍कृति के अछूते पहलुओं को छूने वाला होता और साज-सज्‍जा अत्‍यंत कलात्‍मक। हर अंक कड़ी मेहनत और प्रेम से निकालते। पाठकों और साहित्‍य-समाज में इस पत्रिका को बड़ा आदर मिलत...
अजय  कुमार झा
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    पोस्टों और टिप्पणियों को सहेज़ने में मुझे विशेष आनंद आता है इसलिए समय मिलते ही मैं कभी पोस्ट लिंक्स को संजोने के बहाने तो कभी पाठकों की टिप्पणियों को यहां इस पन्ने पर टिकाने के बहाने उन्हें संभाल लिया करता हूं । पिछले दिनों पोस्टों पर आई कुछ चुनिंदा औ...
सलिल  वर्मा
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एगो राजा था. ऊ जंगल में एक रोज सिकार खेलने गया. साथ में सेनापति, मंत्री अऊर एगो नौकर भी था. जंगल में राजा को एगो हिरन देखाई दिया. पीछा करते-करते राजा अपना सब लोग से अलग हो गया. एही नहीं, सेनापति, मंत्री अऊर नौकर भी रस्ता भुलाकर जंगल में भटक गया सब.रास्ता खोजते-खोजत...
अजय  कुमार झा
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दिल्ली में रहते हुए अब ये सोचता हूं कि आखिर वो क्या वजह है कि "खबरों के संसार" के अधिकांश "देश" दिल्ली के गलियारों जैसे लगने लगते हैं ।और फ़िर इन दिनों तो यहां झाडू फ़िराई का कार्य प्रगति पर है । पॉलिटिकल स्ट्रैटजीज़ राजनीतिक मान्यताएं बगावत पर उतारू हैं , कहीं न कहीं...
अजय  कुमार झा
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आजकल शाम को टीवी पर आने वाली बहसों में सबसे ज्यादा दयनीय स्थिति दिल्ली कांग्रेस की दिखती है जो चीख चित्कार मचा सिर्फ़ तीस चालीस दिन की बालिग सरकार को भ्रष्टाचारी साबित करने का प्रमाण दे रहे होते हैं और ये पूछने पर कि फ़िर समर्थन काहे टिकाए हुए हैं पलट काहे नहीं देते...
anup sethi
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पिछले कुछ महीनों में पूना में भारतीय फिल्‍म टेलिविजन संस्‍थान में तीन चार बार जाने का मौका मिला। कालेज यूनिवर्सिटी छोडे़ हुए करीब तीन दशक हो गए हैं। उसके बाद ऐसी जगहों पर जाने का खास मौका नहीं मिला। रस्‍मी तौर पर या मेहमान की तरह तो कभी कभार जाना हुआ, पर आम आदमी क...
anup sethi
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पिछले दिनों हमारे एक चचेरे भाई का फोन आया कि वे मुंबई पहुंच गए हैं, कई दिन के सफर के कारण बच्‍चे बडे़ सभी बीमार पड़ गए हैं और रात को ही लौट भी जाना है, इसलिए घर नहीं आ पाएंगे। चाची जी के लिए कुछ सामान लाए थे, यहीं छोड़ रहे हैं, तुम आ कर ले जाना। सुबह का वक्‍त था।...
 पोस्ट लेवल : हिमाचल टिप्पणी लोक
anup sethi
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पिछले दिनों जयपुर लिटरेचर फेस्टिबल में आशीष नंदी के एक बयान से शुरू हुआ विवाद मीडिया में दूध में बाल की तरह उफना जिससे जरा सी तपन हुई और दुनिया उसी रफतार से चलती रही. इस तरह की घटनाओं का घटित होना हमारे समय में हो रहे आमूल परिवर्तनों के लक्षणों के उभर आने के जैसा ह...
anup sethi
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पिछले दिनों जयपुर लिटरेचर फेस्टिबल में आशीष नंदी के एक बयान से शुरू हुआ विवाद मीडिया में दूध में उबाल की तरह उफना जिससे जरा सी तपन हुई और दुनिया उसी रफतार से चलती रही. इस तरह की घटनाओं का घटित होना हमारे समय में हो रहे आमूल परिवर्तनों के लक्षणों के उभर आने के जैसा...
anup sethi
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छायांकन - हरबीर यह लेख कुछ वर्ष पहले शिखर संस्‍था द्वारा हिमाचल की युवा रचनाशीलता पर आयोजित संगोष्‍ठी‍ में पढ़ा गया था. हाल में यह स्‍वाधीनता के शारदीय विशेषांक में छपा है. इस बीच आत्‍मारंजन का काव्‍यसंग्रह पगडंडियां गवाह हें भी आ गया है और अजेय के संग्रह की घोषणा...