ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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बुन्देलखण्ड के लोक आयोजन में टेसू और झिंझिया का खेल बच्चों द्वारा खेला जाता है. आश्विन शुक्ल अष्टमी से शरद पूर्णिमा तक टेसू तथा नवमी से चतुर्दशी तक झिंझिया खेली जाती है. टेसू का खेल बालकों द्वारा तथा झिंझिया का खेल बालिकाओं द्वारा खेला जाता है. बाँस की तीन डंडियों...
roushan mishra
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दहक उठी हैपेड़ों पर आगखिल गए फिर से पलाश फिर से &#...
 पोस्ट लेवल : पलाश टेसू ढाक Flame of forest
kumarendra singh sengar
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बुन्देलखण्ड क्षेत्र सदैव से पर्वों-त्योहारों से सराबोर रहा है. यहाँ भांति-भांति के अनुष्ठान आये दिन संपन्न होते रहते हैं. मेलों, पर्वों, त्योहारों से यहाँ की संस्कृति के दर्शन भी भली-भांति होते रहते हैं. इसी तरह के आयोजनों में टेसू-झिंझिया का विवाह भी शामिल है. इस...
kumarendra singh sengar
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बुन्देलखण्ड क्षेत्र अपने आन-बान-शान के लिए जितना प्रसिद्द है उतनी ही प्रसिद्धि उसको यहाँ की लोकसंस्कृति के कारण प्राप्त है. यहाँ की लोककलाओं, लोकपर्वों, लोकविधाओं आदि में अनेकानेक गतिविधियाँ संचालित होती हैं. लोक को अत्यंत महत्त्वपूर्ण मानने के कारण ही यहाँ जन्मे ल...
राजीव कुमार झा
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फिर से खिले टेसूफिर से महकीमन की गलियांप्यार की गंध लिएआँचल मेंसजा बंदनवार मन का अनुराग सभी दृष्टि में निचुड़ गया सतरंगी सपनों का सागर उमड़ गया बिखर गई अंतस तक केसरिया चांदनी नीलकंवल छवि हुई हंसी के संतूर बजे शब्द-शब्द झरे जैसे मदिरा मधुर अंगूर उगे
 पोस्ट लेवल : टेसू मन छवि अनुराग
घुघूती  बासूती
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परसों शाम अचानक घंटी बजी। देखा तो बच्चों का झुँड चेहरे पर थोड़ी सी कलाकारी कर हैलोवीन मनाता आया था। कई तरह की टॉफियाँ न जाने क्यों मेरे घर एक अलमारी में शायद उनकी प्रतीक्षा में ही पड़ी थीं। सो उन्हें बाँट दी। कुछ देर बाद बच्चों का एक और झुंड आया। वे भी टॉफियाँ ले चले...
 पोस्ट लेवल : झाँझी टेसू लेख हैलोवीन
ऋता शेखर 'मधु'
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चटक गए टेसू पलाशलिपट रही फगुनाईआम्रकुँज के बौर परकोयलिया गीत सुनाईपंखों पर रंग लिएतितली दौड़ी आईये कौन ऋतु आई सखीकौन ऋतु आईरंगों के बादल मेंखुशियों की बौछार हैफाग के राग मेंसाजन की पुकार हैकागा के बोल मेंप्रिया का श्रृंगार हैये कौन ऋतु आई सखीकौन ऋतु आईरीती अँखियाँ...
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं )हिंदुस्तान,लखनऊ,19 फरवरी 2013,पृष्ठ-07 स्वामी स्वरूपानन्द जी  आयुर्वेद मे MD  थे ,प्रेक्टिस करके खूब धन कमा सकते  थे लेकिन जन-कल्याण हेत...
ललित शर्मा
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विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं )।Facebook पर साझा करेंविकृत होते दीपावली/होली पर सकारात्मक पहलHindustan-Lucknow-13/10/2011पावर कार्पोरेशन के स्पेशल  डाइरेक्टर जेनेरल शैलजाकान्त मि...