ब्लॉगसेतु

Tejas Poonia
0
मैं कई बार जब जीवन की सच्चाईयों से रूबरू होता हूँ तो लगता है कि ये सब चमक धमक बस एक दिखावा है। हम समय के साथ कहाँ और कैसा विकास कर पाएं हैं, ये अपने आप में एक बड़ा सवाल है। तमाम प्रोग्रेसिव दावों के बीच, हमारे समाज में आज भी महिला शोषण, उत्पीड़न बदस्तूर जारी है। मगर...
आदित्य शुक्ला
0
लोगों को उम्मीद थी की, आने वाले लोकसभा चुनावों से पहले मोदी सरकार, ऐसा बजट लेकर आएगी जो आपके सारे सपने पूरे कर देगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। और अधिकतर लोग उदास हैं। क्योंकि सैलरी पाने वाले लोगों के लिए बजट का मतलब होता है, टैक्स स्लेव में कमी। मेरी भी उम्मीद य...
Kajal Kumar
0
विजय राजबली माथुर
0
स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं ) गतवर्ष की नोटबंदी के संबंध में  जर्मनी की चांसलर साहिबा ने यू एस ए की ही प्रेस के हवाले से यह रहस्योद्घाटन किया था कि, भारत में की गई नोटबंदी...
Bhavna  Pathak
0
खुशियों का व्यापार निरालाजिसमें लगे छदाम न लालाचोर कोई न इसे चुराएबांटो तो यह बढ़ती जाएना ही टैक्स कोई है इस परना ही निकले कभी दिवालाखुशियों का व्यापार निरालाजिसमें लगे छदाम न लालाखुशियां दे दो खुशियां ले लोखुशियों को मत परे ढ़केलोखुशियों बिन घर सूना जैसेलटका हो बर...
अनंत विजय
0
किसानों को आयकर के दायरे में लाने के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार में भ्रम की स्थिति दिखाई देती है। पहले नीति आयोग के सदस्य बिबेक देबरॉय ने आयोग की बैठक में पेश अपने मसौदे में टैक्स दायरे को बढ़ाने के लिए किसानों को खेती से होनेवाली आय पर टैक्स लगाने का सुझाव दिया। प्र...
Ravi Parwani
0
भारत एक लोकशाही देश है फिर भी यहाँ पर आज बहुत सी जगह पर महिलाओं को मान नहीं दिया जाता । आज भी बहुत जगह पर स्त्री का शोषण हो रहा है । शोषित स्त्री को खुद ही अपना रास्ता निकालना पड़ता है । बहुत सारे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना पड़ता है । आज मैं आपको एक ऐसी महिला की कहा...
जन्मेजय तिवारी
0
                    नए साहब के आने से पहले ही उनके बारे में सच्ची और अच्छी खबरें आने लगी थीं । जितनी खुशी थी, उससे अधिक हैरानी थी लोगों के मन में । कौतूहल चरम पर था कि आज के जमाने में भी ऐसे लोग धरती की शो...
Kheteswar Boravat
0
..............................
Kheteswar Boravat
0
..............................