ब्लॉगसेतु

दिनेशराय द्विवेदी
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श्रम कानून में परिवर्तन से मजदूर वर्ग की स्थिति कैसे बदतर हुई?फरवरी 1978 में सुप्रीमकोर्ट के 7 न्यायाधीशों की वृहत पीठ ने बैंगलोर वाटर सप्लाई एण्ड सीवरेज बोर्ड व अन्य बनाम आर. राजप्पा व अन्य के मुकदमे में निर्णय पारित कर यह स्पष्ट कर दिया था कि किस तरह के संस्थानों...
दिनेशराय द्विवेदी
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नए कानूनों ने मजदूर वर्ग को कमजोर और असहाय बनायाकेन्द्र और देश के अधिकांश राज्यों में श्रीमती इन्दिरागांधी की पार्टी कांग्रेस (इ) की सरकारें थी। तभी ठेकेदार मजदूर (विनियमन एवं उन्मूलन) अधिनियम-1970 संसद में पारित हुआ। इसका उद्देश्य बताया गया था कि ठेकेदार मजदूरों क...
दिनेशराय द्विवेदी
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संगठित मजदूरों के क्षेत्र को न्यूनतम बनाए रखने की साजिशइस विमर्श की कल की कड़ी में मैं ने कहा था कि कोविद-19 महामारी को फैलने से रोकने के उपायों की घोषणा मात्र से, लोगों को विशेष रूप से देश से औद्योगिक केन्द्रों से मजदूरों और उनके परिवारों द्वारा उनके गाँवों की ओर...
Sanjay  Grover
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अगर मुझसे कोई पूछे कि मर्द स्त्री से क्या चाहता है तो मुझे इस सवाल पर हैरानी होगी। मैं अकेला सारी दुनिया के मर्दों का ठेका कैसे ले सकता हूं !? जबकि मुझे मालूम है कि मैं ख़ुद ही स्त्रियों से सौ प्रतिशत वह नहीं चाहता जो कि अकसर क़िताबों में लिखा पाता हूं, लोगों से सुन...
Bhavna  Pathak
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आज शिक्षक दिवस  के दो रंग देखने को मिले। एक था परम्परागत रूप जो मैं  अपने छात्र जीवन से देखता आया हूं। इसमें आज भी एक दिन के लिए ही सही गुरुजनों का सम्मान किया जाता है। उनके सम्मान में गरिमामयी संस्कृत के - गुरूर् ब्रह्मा गुरूर् विष्णो ... जैसे श्लोक, गुर...
विजय राजबली माथुर
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Drag Chandra Prajapati: 05अगस्त 2015 जनता को मूर्ख बनाने का मिथ्या अभियान: कुल मिलाकर झूंठे प्रचार में हिटलर के प्रचारमंत्री गोयबल्स को भी पछाड़ते हुए, सरकार मजदूरों पर इतने अमानवीय हमलों को भी उचित ठहराने के लिए मिथ्या प्रचार कर रही है। यह दावा किया जा...
दिनेशराय द्विवेदी
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लोग कहते हैं। देश कचरे से परेशान है। जिधर जाओ कचरा दिखाई देता है। कोई स्थान इस से अछूता नहीं है। मियाँ जी बेड रूम में लेटे लेटे टीवी देख रहे हैं, अचानक जेब से पाउच निकाला, गुटखा खाया और पाउच वहीं फर्श पर सरका दिया। बीवी नाराज हो तो हो, उस से क्या फर्क पड़ता है? आखि...