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शेखर सुमन
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 पोस्ट लेवल : डायरी के पन्ने
शेखर सुमन
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उन तंग गलियों में हाथों में हाथ डाले जनमती पनपती मोहब्बत देखी है कभी... उन आवारा सड़कों पर छोटी ऊँगली पकडे चलती ये मोहब्बत... उस समाज में जहां सपनों का कोई मोल नहीं, ऐसे में एक दूसरे की आखों में अपना ख्व़ाब सजाती ये मोहब्बत... नाज़ु...
शेखर सुमन
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शेखर सुमन
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बहुत धीमी बहती है मोहब्बत लोगों की रगों में,नफरत से कहीं धीमी...नफरत इतनी किसड़क पर अपनी गाड़ी कीहलकी सी खरोंच पर भीहो जाएँ मरने-मारने पर अमादा,और मोहब्बत इतनी भी नहीं किअपने माँ-बाप को लगा सकेंअपने सीने सेऔर कह सकें शुक्रिया...बहुत धीमी बहती है मोहब्बत लोगों की रगों...
शेखर सुमन
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मैं घिसता हूँ खुद को हर रोज,खुद को खुद से आगे निकालना चाहता हूँ,ये रगड़ एक आग पैदा करती हैमैं अकेला बैठ कर जल जाता हूँ हर शाम उसमें...थक कर, घायल होकरसवाल फिर खुद से ही करता हूँकि क्या ज़रुरत है इस संघर्ष कीदिल भी कन्धा उचका कर दे देता है जवाब,"शायद बस एक बेहतर कल की...
Kavita Rawat
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शेखर सुमन
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आज से 17 साल पहले लिखना इसलिए शुरू हो गया कि किसी को मेरा लिखना बेइंतहा पसंद था, उस वक़्त तो मैं पता नहीं क्या क्या लिख देता था, और वो मुस्कुरा देती थी... जिद्दी थी और पागल भी... सोचता हूँ अगर वो इतनी जिद नहीं करती तो क्या मैं आज इतना सब कुछ लिख भी रहा होता या नहीं....
शेखर सुमन
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जूता भी मस्त चीज बनायी है इंसानों ने... मुझे लगता है इंसानी शरीर का सबसे मज़बूत हिस्सा पैर ही होता है लेकिन सबसे ज्यादा सुरक्षा भी पैरों के लिए ही ज़रूरी पड़ी... आखिर इस असमान ज़मीन को रौंदते हुए आगे बढ़ना ही तो ज़िन्दगी का अहम् हिस्सा है... खैर, मेरा और जूतों का रि...
शेखर सुमन
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जागती आँखों के सपनेअक्सर मुझे परेशान करते हैं, मैं सोना चाहता हूँहवा में औंधे मुंह किएगुरुत्वाकर्षण के नियम के खिलाफ,चाहता हूँ किख़्वाब में आए नींद का झरोखा कोई,घड़ी का चलना भीडायल्यूट हो जायेमेरी साँसो की तरह...खुद से लड़ते झगड़ते हुयेकई बातें जो मैं भूल चुका हूँउन बा...
शेखर सुमन
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इन पेचीदा दिनों के बीच,आजकल बिना खबर किए ही अचानक से सूरज ढल जाता है,नारंगी आसमां भी बेरंग पड़ा है इन दिनों... इन पतली पगडंडी सी शामों में जब भी छू जाती है तुम्हारी याद मैं दूर छिटक कर खड़ा हो जाता हूँ...क्या करूँतुम्हारे यहाँ न होने का एहसासऐसा ही है जैसे,खुल गयी हो...