ब्लॉगसेतु

विजय राजबली माथुर
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*  एक समय ऐसा था कि ढोंग और पाखंड को बढ़ावा देने के लिए बहुत से लोग युवा अवस्था में ही सन्यासी बनकर मंदिरों में चले जाते थे लेकिन युवावस्था में होने के कारण अपनी हवस पर काबू नहीं कर पाते थे तब अपनी हवस को मिटाने के लिए कन्यादान का षड्यंत्र रचा गया था।&nbsp...
विजय राजबली माथुर
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Malvika Hariom 21-06-2018 जिस देश में शिक्षा का स्तर इतना अद्भुत हो कि धर्म के नाम पर आसानी से, फिर चाहे वो हिन्दू हो या मुसलमान, एक-दूसरे को जान से मारा जा सकता हो, जहाँ अभिभावक इतने समझदार हों कि अपने ही बच्चों के स्कूल के सामने, बड़ी-बड़ी गाड़ियों में सवा...
विजय राजबली माथुर
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* ब्राह्मण - व्यापारी गठजोड़ ने उसी स्वरूप की पूजा में गण - जनता को उलझा दिया।  * * शिव, पार्वती, लिंग, गणेश  की पाखंड युक्त ढोंगवादी / ब्राह्मणवादी व्याख्याओं का ही दुष्परिणाम है कि, एक राजनेता को शिव जो  वस्तुतः भारत देश है और उसकी पत्नी को पार...
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं ) हिंदू की पत्रकार पूर्णिमा जोशी जी ने बड़ी बेबाकी व निष्पक्षता से बताया कि, आज जो ढोंग - पाखंड बढ़ा है उसको बढ़ाने में मीडिया खास तौर पर इलेक्ट्रानिक...
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं ) ............. कुम्भ,मेलों की भगदड़,केदारनाथ आदि में ग्लेशियरों का फटना आदि इन मानवीय दुर्व्यवस्थाओं के ही दुष्परिणाम हैं।वाराणासी की ताज़ातरीन भगदड़...
जन्मेजय तिवारी
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   ‘आशीर्वाद दीजिए माता कि मैं आपके चरण-चिह्नों पर बिना भटके चल लकूँ और आपके इशारों को हू-ब-हू समझते हुए उसी के अनुरूप कार्य कर सकूँ ।’ गुरूमाता लोमड़ी के चरणों में सिर रखकर भेड़ ने कहा ।   ‘मेरा आशीर्वाद सदा तुम्हारे साथ है । हमारे कार्यों की स...
Sanjay  Grover
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मुर्दाघर की रौशन दुनिया कर देंगेतुम जागे तो मुर्दे हत्या कर देंगेलाशें, मोहरे, कठपुतली या भाषणबाज़बड़ा बनाकर तुमको क्या-क्या कर देंगेठगों के झगड़ों में क्या सच क्या झूठ भलाये तो बस हर रंग को धुंधला कर देंगेतुम सोचोगे तुम्हे प्रकाशित कर डालाचारों जांनिब घुप्प...
विजय राजबली माथुर
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( ***ढोंग-पाखंड-अंधविश्वास के विरुद्ध आज से पाँच वर्ष पूर्व 02-06-2010 को इस ब्लाग का प्रारम्भ किया था और उसी दिशा में आज भी चल रहे हैं। डॉ सरोज मिश्रा जी की एक रचना जो 31 दिसंबर 2012 को शेयर की थी आज भी प्रासांगिक है उसी को इस अवसर पर पुनः प्राकाशित किया जा रहा है...
विजय राजबली माथुर
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Dhruv Gupt  14-04-2015 https://www.facebook.com/photo.php?fbid=844485888961344&set=a.379477305462207.89966.100001998223696&type=1&theaterपिछले तीन दिनों में छत्तीसगढ़ के बस्तर में हुए तीन माओवादी हमलों में' दर्ज़न भर गरीब सिपाही मारे गए। क्रा...
विजय राजबली माथुर
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हिंदुस्तान,लखनऊ के 19 दिसंबर 2011 के अंक मे प्रकाशित समपादकीय और इतिहासकार रामचन्द्र गुहा जी के लेख (जिनकी स्कैन कपियाँ नीचे दी हैं) सच्चाई को उजागर करती हैं।(फोटो पर डबल क्लिक करके स्पष्ट पढ़ा जा सकता है)19/12/2011,hindustan LUCKNOW19/12/2011,hindustan LUCKNOWमैंन...