ब्लॉगसेतु

Ravindra Pandey
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फ़ागुन आया लेकर, अपने साथ में कितने रंग,मगन  हुए हैं  ढोल नगाड़े, थिरकन लगे मृदंग।अल्हड़ बाला भर पिचकारी प्रेम की करे फुहार,सराबोर हुआ  रंगों से, चहुँ  मादक  अंग-तरंग।गले मिल रहे साथ सभी के,  रंगे हुए  हैं  गाल,मस्ती के आलम में...
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तबला ढोलकतबला ढोलक दे रहे, गायन को सुर ताल। गीतों से बतला रहे, मौसम का सब हाल।। गाने के होते सदा, सबके अपने ढंग।नारी बिन होते नहीं, पूरे कोई काज।अपनी ढपली ला रहे, सब अपने ही संग।। नारी से ही तो यहाँ, बनता सकल समाज।।ग़ज़ल लिखे वो जानते, सदा ही इसका मूल।बातचीत इसमें...
Neeraj Kumar Neer
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"जंगले में पागल हाथी और ढोल" संग्रह से एक कविता :----------------------कुछ तो नया कीजिये अबके नए साल मेंसूर्य वही चाँद वहीधूप  वही छांव वहीवही गली वही डगरगांव वही, वही शहरघृणा वही, रार वहीदिलों में दीवार वहीमंदिर और मस्जिद केजारी हैं तकरार वहीप्रेम होना चाहिए...
Bhavna  Pathak
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उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड ने तो दो दिन पहले ही केसरिया होली मना ली। ब्रज की लट्ठमार होली, हरियाणे की कोड़ामार होली अब प्रतीक ज्यादा रह गई हैं। युग बदला तो युगधर्म के हिसाब से सब कुछ बदला - रीति रिवाज, त्योहार भी। होली पर मस्तानो की टोली, होलिहारों की बारात, बोल सारा...
sahitya shilpi
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girish billore
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अजय  कुमार झा
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महसूस करिए इसकी चमक अपने भीतर , इसका अहसास और गर्व से सीना फ़ुलाईये ये हैं हमारे रणबांकुरे ..भारत के सपूत ..सलाम इन्हें देश की सवा अरब लोगों का और ये बंटी मिठाइयां अंतिम क्षण ये आया जश्न का समय क्या सडक , क्या गली ..आज सब जश्नमय है जी आतिशबाजी धूम धडाका चमचमाता आसमा...