ब्लॉगसेतु

लोकेश नशीने
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ख़्वाब देखना तो जैसेभूल चुकी हैं आँखेंऔर नींद भी मानोअब, पहचानती ही नहींबस, थोड़ा सा आसरा हैइन यादों काउन बातों काजिसे महसूस किया है दिल नेदूरियों के बाद भीसिमट गई है कुछ पल मेंउस मुहब्बत की ख़ुश्बूमगरअब सिर्फ सन्नाटा हैइतना सन्नाटा किउकताने लगी हैतन्हाई भीचित्र साभ...
 पोस्ट लेवल : lokesh nashine कविता poetry तन्हाई
Manav Mehta
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मैंने एक गुल्लक बनाई हुई हैअक्सर तेरे लफ़्ज़ों सेभरता रहा हूँ इसको...तू जब भी मिलती थी मुझसेबात करती थीतो भर जाती थी ये...ख़ुशनुमा, रुआंसे, उदास, तीखेमोहब्बत भरे...हर तरह के लफ्ज़भरे हुए हैं इसमें...अब जबकि मैं,तुझसे बिछड़ कर तन्हा रहता हूँ __निकाल कर इन्हें खर्च...
Manav Mehta
407
जाने कहां गई वो शाम ढलती बरसातेंहाथों में हाथ डाल जब दोनों भीगा करते थेजाने कहाँ गए वो सावन के झूलेइक साथ बैठ जब दोनों झूला करते थेअब तो बस तन्हाई है और तेरी यादों का साथजाने कहाँ गए वो लम्हें जो तेरे साथ बीता करते थेवो लिखना मेरा कागज़ पे गज़लेंऔर कागज़ की...
अनीता सैनी
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 रेत के मरुस्थल-सा,  हृदय पर होता विस्तार, खो जाती है  जिसमें, स्नेह की कृश-धार, दरक जाती है,  इंसानियत, बंजर होते हैं,  चित्त के भाव, जज़्बात  में नमी, एहसास में होती, अपनेपन की कमी,&nb...
Kailash Sharma
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बन न पाया पुल शब्दों का,भ्रमित नौका अहसासों कीमौन के समंदर में,खड़े है आज भी अज़नबी से अपने अपने किनारे पर।****अनछुआ स्पर्शअनुत्तरित प्रश्नअनकहे शब्दअनसुना मौन क्यों घेरे रहतेअहसासों को और माँगते एक जवाब हर पल तन्हाई में।****रात भर सिलते रहे दर्द की चादर,उधेड़ गया फिर...
Nitu  Thakur
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मेरा अक्स आज मुझसे , नजरें चुरा रहा है कल तक जो जान था वो , अब दूर जा रहा है किस बात से खफा है , जो आज यूँ जुदा है आँखों को ख्वाब देकर , खुद ही मिटा रहा है माना ये दिल नही था , तेरी आरजू में शामिल दिले बेरुखी से अपनी , उसे क्यों जला रहा है&...
लोकेश नशीने
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Roli Dixit
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Yashoda Agrawal
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यही मेरी मुहब्बत का सिला है मिला है दर्द दिल तोड़ा गया है हुआ जो कुछ भी मेरे साथ यारो“ज़माने में यही होता रहा है”उसे मालूम है मैं बेख़ता हूँ न जाने फिर भी क्यों मुझसे ख़फ़ा हैये जिस अंदाज़ से झटका है दामनबिना बोले ही सब कुछ कह दिया हैबहा जिस के सुरों से दर...
Nitu  Thakur
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तन्हाईयों में अक्सर तेरा ख्याल आया गुजरे हुए लम्हों ने कितना हमें रुलाया किस्मत में थी तन्हाई मंजूर कर लिया तेरे लिए जहाँ से खुद को दूर कर लिया अपनों से जीतने का टूटा मेरा भरम बनने लगी हैं गम पर तन्हाईयाँ मरहम नादान दिल को इतना मगरूर&n...