ब्लॉगसेतु

jaikrishnarai tushar
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स्मृतिशेष कवि कैलाश गौतम कैलाश गौतम [08-01-1944-09-12-06]काव्य प्रेमियों के मानस को अपनी कलम और वाणी से झकझोरने वाले जादुई कवि का नाम है 'कैलाश गौतम'। जनवादी सोच और ग्राम्य संस्कृति का संवाहक यह कवि दुर्भाग्य से अब हमारे बीच नहीं है | आकाशवाणी इलाहाब...
jaikrishnarai tushar
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स्मृतिशेष कवि -कैलाश गौतम कुछ सामयिक दोहे -कवि कैलाश गौतम चाँद शरद का मुंह लगा ,भगा चिकोटी काट |घण्टों सहलाती रही ,नदी महेवा घाट |नदी किनारे इस तरह ,खुली पीठ से धूप |जैसे नाइन गोद में ,लिए सगुन का सूप |तितली जैसे उड़ रही ,घसियारिन रंगीन |गेहूं कहता दो -नली...
sanjiv verma salil
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डॉ. ब्रह्मजीत गौतमआत्मज - स्व. गोपिका - स्व. रोशनलाल गौतम।जीवन संगिनी - स्व. विरमादेवी गौतम।जन्म - २८ अक्टूबर १९४०, गढ़ी नन्दू, जिला – मथुरा (उ.प्र.)।शिक्षा - एम. ए., पी-एच. डी.।संप्रति - से.नि. प्राध्यापक हिंदी  उच्च शिक्षा विभाग  म.प्र. शासन, स्वतंत...
 पोस्ट लेवल : ब्रह्मजीत गौतम
sanjiv verma salil
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कृति चर्चा : दोहे पानीदार चर्चाकार - आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’*[कृति विवरण: दोहे पानीदार, दोहा संकलन, डॉ. ब्रह्मजीत गौतम, प्रथम संस्करण २०१९, आईएसबीएन ९७८-९३-८८९४६-८०-३, आकार २२.से.मी.  x १३.५ से.मी., आवरण बहुरंगी पेपरबैक, पृष्ठ २००, मूल्य १५० रु., बेस्ट...
सुशील बाकलीवाल
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        पति अपने दोस्तों के साथ गोआ गया और 15 दिन तक नहीं लौटा ! फेसबुक पर उनके दोस्तों के साथ किसी महिला का चित्र देखकर पत्नी ने उसे मोबाईल पर मैसेज किया-        "जो कुछ तुम अपने दोस्तों के साथ वहाँ पैसे से खर...
संतोष त्रिवेदी
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चिट्ठी लिखी गई पर पराली वाला मौसम देखकर शरमा गई।सरकार बिलकुल बनते-बनते रह गई।सबसे बड़ी तकलीफ़देह बात तो यह रही कि लड्डुओं ने पेट में पचने से ही इंकार कर दिया।खाने के बाद पता चला कि वे ग़लत पेट में चले गए।अब समस्या सरकार बनाने से ज़्यादा लड्डुओं को पचाने की हो गई।वे...
sanjiv verma salil
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सरस्वती वंदना - तमिलमहाकवि सुब्रमण्य भारती*वेळ्ळै तामरै....वेल्लै तामरै पूविल इरुप्पाळवीणे  से ̧युम ओलियिल इरुप्पाळ।कोळ्ळै इन्बम कुलवु कविदैकूरुम पावलर उळ्ळत्तिल इरुप्पाळ।। वेळ्ळै तामरै.....उळ्ळताम पोरुळ तेड़ि उणर्देओदुम वेदत्तिन उळ्निन्डंा ेळिर्वाळ।कळ्ळमटं मुन...
अनीता सैनी
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क्यों नहीं कहती झूठ है यह सब,  तम को मिटाये वह रोशनी हो तुम,   पलक के पानी से जलाये  दीप,  ललाट पर फैली स्वर्णिम आभा हो तुम,  संघर्ष से कब घबरायी ? मेहनत को लाद कंधे पर,  जीवन के हर पड़ाव पर...
Bharat Tiwari
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भरतमुनि रंग उत्सवनई दिल्ली, अक्टूबर 2019: विभिन्न भारतीय कला और संस्कृति को बढ़ावा देने वाले दिल्ली सरकार के कला और संस्कृति विभाग साहित्य कला परिषद एक नए कार्यक्रम भरतमुनि रंग उत्सव  के साथ वापस लौट आया है। उत्सव का आयोजन 21 और 22 अक्टूबर 2019 को कॉपरनिक्स मा...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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मिटकर मेहंदी को रचते सबने देखा है,उजड़कर मोहब्बत कोरंग लाते देखा है?चमन में बहारों काबस वक़्त थोड़ा है,ख़िज़ाँ ने फिर अपनारुख़ क्यों मोड़ा है?ज़माने के सितम सेन छूटता दामन है,जुदाई से बड़ाभला कोई इम्तिहान है?मज़बूरी के दायरों मेंहसरतें दिन-रात पलीं,मचलती उम्मीदेंकब क़दम...