ब्लॉगसेतु

विजय राजबली माथुर
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 कामरेड प्रेमलता तिवारी के शताब्दी अवसर पर उनकी सुयोग्य भांजी कामरेड रीना सैटिन द्वारा भाव - पूर्ण स्मरण ...............................................................दो किस्से : एक थीं अच्छी मौसी ( अच्छी इसलिए कि बच्चों को सारी मस्तियों  की छू...
kumarendra singh sengar
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विगत दो-तीन दिन से सर्वोच्च न्यायालय ऐतिहासिक निर्णय देने में लगा है. स्त्री-पुरुष के विवाहेतर संबंधों से जुड़ी भारतीय दंड संहिता की धारा 497 पर सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि व्याभिचार अपराध नहीं है. विगत माह, अगस्त में देश की शीर्ष अद...
रणधीर सुमन
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डॉ राजेश मल्ल साहित्य अपने अन्तिम निष्कर्षों में एक सामाजिक उत्पाद होता है। कत्र्ता के घोर उपेक्षा के बावजूद समय और समाज की सच्चाई उसके होठों  पर आ ही जाती है। ऐसे में जब कविता का मूल भाव समाज परिवर्तन हो तो समाज में निहित द्वन्द्व, अन...
रणधीर सुमन
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गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में भीड़ हिंसा पर बोलते हुए दिल्ली में 1984 के दंगों को याद किया जिसमें हजारों सिखों की जानें गईं। इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों द्वारा की गई हत्या से राजधानी दिल्ली में दंगे भड़के और निर्दोष सिख नागरिकों की जान-माल को अपार क्षति प...
रणधीर सुमन
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भारतीय लोगों में फूट डालने के लिए ब्रिटिश इण्डियन हुकूमत ने मजहब और जाति को कामयाबी से इस्तेमाल किया था। बहुसंख्यकों को अल्पसंख्यकों का खौफ दिखा कर, अल्पसंख्यकों को बहुसंख्यकों का खौफ दिखा कर और एक जाति के लोगों को दूसरी जाति के लोगों का डर दिखाकर अँग्रेजी सरकार उन...
रणधीर सुमन
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मुजफ्फरपुर (बिहार) से लेकर देवरिया, प्रतापगढ़ (उप्र) तक बालिका संरक्षण गृहों में बेबस, लाचार, अनाथ, विधवा लड़कियों का इस्तेमाल प्रभावशाली लोगों के यौन लिप्सा की पूर्ति के लिए किया जाता रहा। यह सच सामने आ जाने के बाद हर संवेदनशील व्यक्ति शर्मसार महसूस कर रहा है। वैसे...
रणधीर सुमन
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असम में शेष भारत से जा कर बसने वालों का इतिहास नया नहीं है। अंग्रेजी शासनकाल में बंगालियों को असम में बसने के लिए प्रोत्साहित किया गया था। आजादी के बाद कई हिंदी भाषी राज्यों झारखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार आदि के अलावा पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और यहाँ...
sanjiv verma salil
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पुस्तक चर्चा:इस हवा को क्या हुआ - रमेश गौतम- शिवानंद सिंह सहयोगीभाई रमेश गौतमजी ने अपने निवेदन में लिखा है ‘बचपन में अक्सर पिता की जन-संवेदना अवचेतन में कहीं संग्रहीत होती रहती थी जो बड़े होने पर निरंतर प्रबल होती गई।’ अपने परिवार की संस्कृति की धरोहर को सँजोना कोई...
sanjiv verma salil
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पुस्तक चर्चा:गीत पर्व आया है - राजेन्द्र गौतम- माहेश्वर तिवारीयह देख कर खुशी होती है कि श्री राजेन्द्र गौतम ऐसे कवियों की संदिग्ध भीड़ से अलग-थलग खड़े हैं, जो कभी किसी और की रचना से कोई मुहावरा तोड़ लेते हैं तो कभी किसी रचना के कथ्य को अपनी थिगलीदार भाषा तथा शिल्प में...
Yashoda Agrawal
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१-बैठा रहताबहती धारा...जिसको कविता कहतादूर न पासअंदर न बाहरअपने आप में पूर्ण..चलना कितनादूर उसको ले आतादरवाज़े के उस पारआसमान नीलम-सामौन..कविता गाता...।२-प्रेम-कहानीपढ़ने मेंमुझें डर लगता...क्योंकिचमकते हुये तारोंऔर-टूट के गिरते तारों मेंफरक समझता हूँ...।३-प्रेम...क...