ब्लॉगसेतु

शिवम् मिश्रा
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आज १२ जुलाई है ... विचित्र संयोग है कि आज ही के दिन भारत के तीन दिग्गजों की पुण्यतिथि होती है | दारा सिंह (जन्म 19 नवंबर 1928; मृत्यु: 12 जुलाई 2012) ज्ञात हो कि गुरुवार १२ जुलाई २०१२ की सुबह 7.30 बजे अभिनेता महाबली दारा सिंह जी काफी दिनों तक जिंदगी और मौत...
sanjiv verma salil
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http://divyanarmada.blogspot.in/
sanjiv verma salil
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राजर्षि टंडन के प्रति काव्यांजलि गजेंद्र सिंह सोलंकी *भारत के रतन त्याग तप मूरत वह, यशस्वी जीवनी जिलाकर चले गये। दृढ़व्रती पुरुषोत्तम राजर्षि टंडन जी, निति और मर्यादा हिट काया को कसे गये। हिंदी के प्राण संस्कृति की धरोहर महा, स्वातंत्र्य समर में कण-कण घिसे गये। हिंद...
Yashoda Agrawal
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जीवन क्षण-क्षण,स्वांग रचता है।असत्य के शब्दों से,सत्य का अर्थ रचता है।जीवन क्षण-क्षण,स्वांग रचता है।जो कभी शाश्वत हुआ न हो,ऐसे कल्पनाओं का भरमार रचता है।जीवन क्षण-क्षण,स्वांग रचता है।जो बिखरा हुआ है,ख़ुद ज़िम्मेदारियों के शृंखला में,वो टूटे हुए सपनों का हार रचता है।ज...
S.M. MAsoom
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नवाबों के वक़्त का मक़बरा मीर रुस्तम अली खां अभी अच्छी हालत में है | मीर रुस्तम अली खां अफगान जाती के थे और उनका निवास स्थान भदोही था | आप नवाब सआदत  अली खान के समय में जौनपुर बनारस गाज़ीपुर की ज़मींदारी के नाज़िम थे और बाद में इसमें बहराइच ,राठ ,आजमगढ़ इत...
Yashoda Agrawal
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अफ़सोस किस बात का करूँ,दिल तो मिला था पलभर,लेकिन विचार नही मिले थे पल भर।किसी से भी किसी तरह नहीं,दुनिया की खब़र वो देकर चले गये,उन्हें कानों-कान ख़बर नहीं चला,हम उनके लिए कितने दर्द सह गये।वो समभाव था या डर था,एक को समझकर वो रुक गये,एक को हम अपनाकर चलते-चले गये।&nbs...
Kavita Rawat
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Ashok Kumar
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इंटरनेट से साभारगाँधी हमारे लोकजीवन में कुछ इस क़दर विन्यस्त हैं कि वह अपने होने से अधिक व्याप्त हैं. वह एक हकीक़त हैं तो एक मिथक भी जिनसे हम जो सीखना चाहते हैं सीख लेते हैं. उन पर हमलों के दौर में आज यहाँ कुछ कविताएँ और कुछ पेंटिंग्स जो उस व्याप्ति के आयामों को चिह्...
विजय राजबली माथुर
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Hemant Kumar JhaMarch 28 ·, 2019 सवाल यह है कि 'न्यूनतम आय' जैसी योजनाओं के मौलिक उद्देश्य क्या हैं? क्या इनके केंद्र में मनुष्य हैं? या कि बाजार?भारत के विशेष संदर्भ में यह सवाल और जरूरी हो जाता है।बाजार के लिये जरूरी है कि उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ती रहे,...
Brajesh Kumar Pandey
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इस यात्रा के बारे में शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें–3आज यात्रा का तीसरा दिन था। कल शाम के समय जब हम भगवान वेंकटेश के दर्शन कर कमरे लौटे तो एक और घटना हुई। और वो ये कि आगे की ʺयात्राʺ करने वाले ʺयात्रियोंʺ के लिए "ट्रैवलर" गाड़ी की बुकिंग की गयी। तिरूमला के स...