ब्लॉगसेतु

विजय राजबली माथुर
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  स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं ) ~विजय राजबली माथुर ©
sanjiv verma salil
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पूरा नाम-महातम मिश्र (गौतम गोरखपुरी)2- माता-पिता का नाम- श्री रामसबद मिश्र, स्वर्गीया श्रीमती बादामी मिश्रा3- धर्मपत्नी का नाम- श्रीमती रंभा मिश्रा4- वर्तमान व स्थायी पता- बी- 121, तेजेंद्र प्रकाश सोसायटी विभाग-1, अहमदाबाद-382350स्थायी पता- ग्राम-भरसी, पोस्ट-डाड़ी,...
 पोस्ट लेवल : महातम मिश्र
kumarendra singh sengar
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अंततः केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को पलटते हुए एससी/एसटी एक्ट में संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित करवा ही दिया. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा किसी दलित व्यक्ति द्वारा शिकायत के बाद तत्काल सवर्ण की गिरफ़्तारी पर रोक लगाने का आदेश दिया था. अदालत के इस आदेश को...
kumarendra singh sengar
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उच्चतम न्यायालय द्वारा एससी-एसटी एक्ट के सम्बन्ध में दिए गए निर्णय के खिलाफ जाते हुए सरकार संशोधन विधेयक वर्तमान सत्र में ला रही है. इसकी तैयारी के बीच पिछड़ा वर्ग आयोग को भी संवैधानिक दर्जा दे दिया गया है. दलितों-पिछड़ों के लिए उठाये जाते इन कदमों के बीच आरक्षण सम्ब...
Bharat Tiwari
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उन्हें विश्वास है कि दिल्ली में रहता हूँ इसलिए कवि हूँकविता का कुलीनतंत्र (5) — उमाशंकर सिंह परमार जब तक कवि अपनी जमीन में नहीं खड़ा होता तब तक वह अपनी परम्परा में नहीं जुड़ता न परम्परा का विकास करते हुए समकालीन होने की अर्हता हासिल करता हैसमकालीन कविता के कुली...
Bharat Tiwari
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और इस तरह युद्ध की तैयारी शुरू होती है — देवदत्त पट्टनायक अनुवाद: भरत आर तिवारीतुलसीदास की रामचरितमानस में एक चौपाई की दो पंक्तियाँ है, जिन्हें वक़्त बेवक़्त दोहराया जा रहा होता है—   ‘ढोल  गवाँर  शूद्र  पशु  नारी।    सकल ताड...
Bharat Tiwari
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बहुत से कवि ऐसे भी हैं जो न तो महानगरीय कुलीनता से मुक्त हुए न ही अपने जातीय सवर्णवादी संस्कारों से मुक्त हुए मगर अपने आपको "वाम" कहने का दुराग्रह भी रखते हैं। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).p...
Bharat Tiwari
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भाग-3: सत्ता और पूँजी के संरक्षण में विकसित जमीन से विस्थापित कविता का कुलीनतंत्र — उमाशंकर सिंह परमारयह समय विज्ञापन और प्रचार और समझौतों की राजनीति का हैजमीन में रहने वाले पद विहीन, पोजीशन विहीन, गाँव और कस्बे के एक्टिविस्ट लेखन को हासिए पर धकेलने के लिए "दिल्ली...
Bharat Tiwari
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साम्प्रदायिकता विरोध की एक अवधारणा है कि "हिन्दुत्व की बुराई करना" जो हिन्दुत्व की बुराई करेगा वही धर्मनिरपेक्ष है। यह उथली समझ है और दूसरे किस्म की साम्प्रदायिकता है। भाग-२: सत्ता और पूँजी के संरक्षण में विकसित जमीन से विस्थापित कविता का कुलीनतंत्र&nbsp...
Bharat Tiwari
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सत्ता और पूँजी के संरक्षण में विकसित जमीन से विस्थापित कविता का कुलीनतंत्र — उमाशंकर सिंह परमारमहानगरीय अभिजात्य कवियों को पढ़कर ऐसा प्रतीत होता है मानो किसी चकमें में उलझकर अचानक कविता में हाथ आजमाने के लिए उतर आए हों...(adsbygoogle = window.adsbygoogle || [])...