कल चाँद केउगने से लेकरआज के सूरज केउगने तकडालते रहे खललनींद में मेरीचुप रहकर भीकितना कह गए दिखते नहीं होबसे हो फिर भीआँखों में हीदूर हो कितनेफिर भी कितने पास चल रहा थाबातों का सिलसिलाथमा सा था चाँद भीथे खामोशऔर एक दूजे में थे मदहोश..!!-तरसेम
 पोस्ट लेवल : तरसेम ट्विटर