ब्लॉगसेतु

VMWTeam Bharat
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श्राद्ध का अर्थ है, श्रद्धा से जो कुछ दिया जाय (श्रद्धया दीयते यत् तत् श्राद्धम) शास्त्रों में मनुष्य के लिए कुल 3 ऋण बतलाए गए हैं- 1. देव ऋण, 2. ऋषि ऋण और 3. पितृ ऋण। ये तीन प्रकार के ऋण बतलाए गए हैं। इनमें श्राद्ध द्वारा पितृ ऋण उतारना आवश्यक माना जाता है, क्योंक...
sanjiv verma salil
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पितृ तर्पण विधि   PITRU TARPAN VIDHIआवाहन Awahan: दोनों हाथों की अनामिका (छोटी तथा बड़ी उँगलियों के बीच की उँगली) में कुश (एक प्रकार की घास) की पवित्री (उँगली में लपेटकर दोनों सिरे ऐंठकर अँगूठी की तरह छल्ला) पहनकर, बायें&...
Roli Dixit
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अंजलि में पुष्प और जल सजाकरगंगा के घाट परतर्&#234...
मधुलिका पटेल
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इस वर्ष श्राद्ध मेंमैंने तुम्हारी यादों का तर्पण कर दिया जो वर्ष पहलेधीरे धीरे मर रही थी |तुम्हारी याददाश्त में भी मैं ज़िंदा कहाँ थी ?उन बेजान यादों को दिल की ज़मीं से खाली करनामेरा मन बार बारन चाह कर भी उस ज़मीन को टटोलता रहता की&n...
सुमन कपूर
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तर्पण की हर इक बूँद में समाया है पित्तरों का नेह अर्पण कर अंजुरी भर जल बरसता है यादों का मेह !!सु-मन 
 पोस्ट लेवल : आस्था तर्पण
विजय राजबली माथुर
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 पोस्ट लेवल : श्रद्धा तर्पण कनागत
अविनाश वाचस्पति
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मुक्तिका :  शब्द-तर्पण: माँ-पापा     संजीव 'सलिल'*माँ थीं आँचल, लोरी, गोदी, कंधा-उँगली थे पापाजी.माँ थीं मंजन, दूध-कलेवा, स्नान-ध्यान, पूजन पापाजी..*माँ अक्षर, पापा थे पुस्तक, माँ रामायण, पापा गीता.धूप सूर्य, चाँदनी चाँद,  चौ...