ब्लॉगसेतु

Yashoda Agrawal
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घर में माँ की कोई तस्वीर नहीजब भी तस्वीर खिचवाने का मौका आता हैमाँ घर में खोई हुई किसी चीज को ढूंढ रही होती हैया लकड़ी घास और पानी लेने गई होती हैजंगल में उसे एक बार बाघ भी मिलापर वह डरी नहीउसने बाघ को भगाया घास काटी घर आकरआग जलाई और सबके लिए खाना पकायामई कभी घास य...
shashi purwar
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चला बटोही कौन दिशा मेंपथ है यह अनजाना जीवन है दो दिन का मेलाकुछ खोना कुछ पानातारीखों पर लिखा गया हैकर्मों का सब लेखापैरों के छालों को रिसते कब किसने देखाभूल भुलैया की नगरी मेंडूब गया मस्तानाजीवन है दो दिन का मेलाकुछ खोना कुछ पानामृगतृष्णा के गहरे बादलहर पथ पर छितरा...
kuldeep thakur
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सादर अभिवादनसखी किसी काम से बाहर हैसो आज हम हैंनपी-तुली रचनाएँ लेकरसर्व प्रथम कालजयी रचनाएँ..दीदी सुनीता शानूतस्वीर तुम्हारी...सचमुच तुमसे मिलकर जिन्दगीएक कविता बन गई हैऔर मै एक कलमजो हर वक्ततुम्हारे प्यार की स्याही सेबनाती है तस्वीर तुम्हारी...।आदरणीय सूरज जीतस्वी...
 पोस्ट लेवल : तस्वीर 1493
मुकेश कुमार
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ब्लॉगर ऑफ द इयर के उपविजेता का अवार्ड तुम्हारी अनुपस्थिति मेंहै न,सावन-भादोबादलबारिशबूँदें !पर,हर जगहचमकती-खनकतीतस्वीरसिर्फ तुम्हारी !पारदर्शी हो गयी हो क्या?याअपवर्तन के बादपरावर्तित किरणों के समूह सीढ़ल जाती होतुम !!बूँद और तुमदोनों मेंशायद है नप्रिज्मीय गुण...
shashi purwar
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शर्मा जी अपने काम में मस्त  सुबह सुबह मिठाई की दुकान को साफ़ स्वच्छ करके करीने से सजा रहे थे ।  दुकान में बनते गरमा गरम पोहे जलेबी की खुशबु नथुने में भरकर जिह्वा को ललचा ललचा रही थी। अब खुशबु होती ही है ललचाने के लिए , फिर गरीब हो या अम...
YASHVARDHAN SRIVASTAV
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अच्छा लगता है वो तितलियों काउड़ना।अच्छा लगता हैवो फूलों कामहकना।।अच्छा लगता है वो चिड़ियों का चहकना।अच्छा लगता है वो हवा काबहकना।।अच्छा लगता है वो बारिश काबरसना।अच्छा लगता है वो इन्द्रधनुष काबनना।।अच्छा लगता है वो सुबह की सैर...
VMWTeam Bharat
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वह पायल नहीं पहनती पांव में बस एक काले धागे से कहर बरसाती हैउसकी यही अदा तो 'निल्को'मुझे उसका दीवाना बनाती हैबहुत मजे से इठलाती है गूढ़ व्यंग की मीन बहुत बनाती हैमाथे पर जब बिंदी लगाती हैतो पूरे विश्व को सुंदर बनाती है'मधुलेश' का ख्याल आए तोवह भी कविता बन...
shashi purwar
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आँखों में अंगार है, सीने में भी दर्दकुंठित मन के रोग हैं, आतंकी नामर्द१ व्यर्थ कभी होगा नहीं, सैनिक का बलदानआतंकी को मार कर, देना होगा मान२ चैन वहां बसता नहीं, जहाँ झूठ के लालसच की छाया में मिली, सुख की रोटी दाल३ लगी उदर में आग है, कंठ हुए...
shashi purwar
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धरती माँगे पूत से, दुशमन का संहार इक इक कतरा खून का, देंगे उस पर वार कतरा कतरा बह रहा, उन आँखों से खून नफरत की इस आग में, बेबस हुआ सुकून दहशत के हर वार का, देंगे कड़ा जबाब नहीं सुनेंगे आज हम , छोडो चीनी,कबाबशशि पुरवार
VMWTeam Bharat
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ज़िंदगी तेरे नख़रे भी हजार है क्यों तुम्हे दर्द से इतना प्यार है कलम लिखने को बहुत बेक़रार है क्योंकि इश्क खुद ही आज बीमार है ज़िंदगी तेरे नख़रे भी हजार हैप्रकृति ने खुद किया तुम्हारा शृंगार है उनकी चाहत भी बेशुमार है मैसेज के साथ साथ...