ब्लॉगसेतु

Yashoda Agrawal
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रंग-बिरंगे पर फड़काती, तितली जब बगिया में आती सब बच्चो के मन को भाती,  सब बच्चो का जी ललचाताफूलो के ऊपर मंडराती, पत्तों के पीछे छिप जाती रंगत कैसे इतनी पाती नहीं किसी को भी बतलातीजी में आता उसे पकड़कर हम अपने घर में ले आए ...
 पोस्ट लेवल : जखीरा चंचल तितली
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तितली आई! तितली आई!!रंग-बिरंगी, तितली आई।।कितने सुन्दर पंख तुम्हारे।आँखों को लगते हैं प्यारे।।फूलों पर खुश हो मँडलाती।अपनी धुन में हो इठलाती।।जब आती बरसात सुहानी।पुरवा चलती है मस्तानी।।तब तुम अपनी चाल दिखाती।लहरा कर उड़ती बलखाती।।पर जल्दी ही थक जाती हो।दीवारों...
Kajal Kumar
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 पोस्ट लेवल : तितली birthday butterfly जन्‍मदिन
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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उस दिन वह शाम काले साये में लिपटती हुई रौशनी से छिटकती हुई तमस का लबादा लपेटे जम्हाइयाँ लेती नज़र आयी थी तभी गुलशन से अपने बसेरे को लौटती नवयुवा तितलीउत्साही दुस्साहस की सैर  की राह पर चल पड़ीराह भटकी तो भूखे वीरान खे...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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दिल में तूफ़ान रहा होगा आँखों में दरिया बहा होगा जब तितली तूफ़ान तबाही फैलाकरख़ून-पसीने की कमाई से बने नाज़ुक अरमानों से सजे  आशियाने उजाड़ता आगे बढ़ा होगा बचपन और बुढ़ापा बेबसी के साये में क़ुदरत के क़हर से&n...
मुकेश कुमार
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प्रकाशित हुआ कुछ ऐसा किशहरी जंगल में बसा मेरा दो कमरे का घरघर की छोटी सी  छतवहीँ कोने में कुछ गमलेथोड़ी सी हरियालीथोड़ी रंगीन पंखुरियांखिलते फूलों व अधखिली कलियों की खुश्बूएक दिन, अनायास गलती से, गुलाब के गमले मेंछितर गईं थीं कुछ पंखुरियां,फिजां भी महकतीवाह...
PRABHAT KUMAR
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एकदम नया प्रयोग "अब बच्चे तितली रानी, तितली रानी, देखो कैसे करती मनमानी.... थोड़ी न पढ़ेंगे।"अब तितली नहीं जिलाना हैफूलों को दूर भगाना हैबच्चों को खूब पढ़ाना है तितली जब आती थीउड़ उड़ कर खूब सताती थीकॉपी पर आ जाती थीपेन से नहीं लिख पाते थेअब यही एक बहाना हैबच्चों को खू...
 पोस्ट लेवल : तितली कविता
Nitu  Thakur
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जल बिन सूख रहा था गुलशन तितली पल पल नीर बहाये जैसे गुलों में प्राण बसे हों ऐसे उनसे लिपटी जाये देख रही हर पल अंबर को शायद जलधारा दिख जाये पर नन्हे गुलशन की रानी जाकर विपदा किसे सुनए सूख गए आँखों के आंसू उडी गगन में पर फै...
Aparna  Bajpai
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आओ हम थोड़ा सा प्रेम करेंमहसूसें एक दूसरे के ख़यालात,एहसासों की तितलियों कोमडराने दें फूलों पर,कुछ जुगुनू समेट लें अपनी मुट्ठियों मेंऔर ...... रौशन कर देंएक दूसरे के अँधेरे गर्त,आओ बाँट लें थोड़ा-थोड़ा कम्बल,एक दूसरे के हांथों का तकिया बनाबुलाएं दूर खड़ी नींद,ठिठुरती रा...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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एक तितलीजागती हैरोज़ सुबहबाग़ में खिलेफूलों -कलियों सेबाअदब मिलती है।खिले रहोयों हीसंसार को देनेआशाओं का सवेरामुस्कराकरअपना दर्द छिपायेफूलों-कलियों सेमिलकर  कहती है।आगे और कहती है -तुम्हारीकोमल पंखुड़ियों केसुर्ख़  रंगकेवल मुझेही नहीं लुभाते हैंमधुर रागजीवन स...
 पोस्ट लेवल : तितली कविता