‘आप पत्रकार लोग भी तिल का ताड़ बनाने के उस्ताद होते हैं ।’ उन्होंने मुझे देखते ही ताना मारा ।   ‘पर आतंकवाद को आप तिल कदापि नहीं कह सकते । वह तो कब का ताड़ बन चुका है ।’ मैंने प्रतिवाद करने की कोशिश करत...