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sanjiv verma salil
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त्रिभंगी छंद:संजीव 'सलिल'*ऋतु फागुन आये, मस्ती लाये, हर मन भाये, यह मौसम।अमुआ बौराये, महुआ भाये, टेसू गाये, को मो सम।।होलिका जलायें, फागें गायें, विधि-हर शारद-रमा मगन-बौरा सँग गौरा, भूँजें होरा, डमरू बाजे, डिम डिम डम।।२१.३.२०१३ *http://divyanarmada.blogspot.in...
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त्रिभंगी सलिला:हम हैं अभियंतासंजीव*(छंद विधान: १० ८ ८ ६ = ३२ x ४)*हम हैं अभियंता नीति नियंता, अपना देश सँवारेंगेहर संकट हर हर मंज़िल वर, सबका भाग्य निखारेंगेपथ की बाधाएँ दूर हटाएँ, खुद को सब पर वारेंगेभारत माँ पावन जन मन भावन, श्रम-सीकर चरण पखारेंगे*अभियंता मिलकर आग...
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ॐछंद सलिला:त्रिभंगी छंदसंजीव*छंद-लक्षण: जाति लाक्षणिक, प्रति चरण मात्रा ३२ मात्रा, यति १०-८-८-६, पदांत गुरु, चौकल में पयोधर (लघु गुरु लघु / जगण) निषेध।लक्षण छंद:रच छंद त्रिभंगी / रस अनुषंगी / जन-मन संगी / कलम सदादस आठ आठ छह / यति गति मति सह / गुरु पदांत कह / सुकवि...
 पोस्ट लेवल : tribhangi chhand त्रिभंगी छंद