ब्लॉगसेतु

रवीन्द्र  सिंह  यादव
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दिल में आजकल एहसासात का  बे-क़ाबू तूफ़ान आ पसरा है, शायद उसे ख़बर है कि आजकल वहाँ आपका बसेरा है।ज़िन्दगी में यदाकदा ऐसे भी मक़ाम आते हैं, कोई अपने ही घर में अंजान  बनकर सितम का नाम पाते हैं।कोई किसी को&nbs...
विजय राजबली माथुर
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कुमार मुकुल
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अक्‍सर 40 की उम्र के बाद कुछ महिलाएं हाथ दर्द की शिकायत करती हैं। दर्द केहुनी के आसपास होता है जो कोई भारी सामान उठाने से बढ जाता है। महिलाएं अक्‍सर कपड़े आदि साफ करने का कार्य नियमित करती हैं तो उन्‍हें इससे परेशानी होती है। यूं दर्द के अन्‍य कारण भी हो सकते ह...
 पोस्ट लेवल : घूंसेबाजी हाथदर्द
ज्योति  देहलीवाल
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मैं जैसे ही एक दुकान से शॉपिंग कर बाहर आई तो मेरी नजर सामने ही बन रहे मॉल पर गई। वहां पर 10-15 मज़दूर काम कर रहे थे। उनमें एक औरत पहचानी-पहचानी सी लग रही थी। उसका ध्यान मेरी ओर नहीं था। दिमाग पर जोर डाल ही रही थी कि एकदम से याद आ गया कि अरे, ये तो मेरी बचपन की सबसे...
सुशील बाकलीवाल
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                   आयुर्वेद में लहसुन को 'चमत्कारी दवा' माना जाता है । लहसुन में एक ख़ास तरह का तत्व होता है जो भोजन को विषाक्त बनाने वाले बैक्टीरिया से लड़ने में कारगर साबित...
विजय राजबली माथुर
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मुकेश कुमार
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मान लो 'आग'टाटा नमक केआयोडाइज्ड पैक्ड थैली की तरहखुले आम बिकती बाजार मेंमान लो 'दर्द'वैक्सड माचिस के डिब्बी की तरहपनवाड़ी के दूकान पर मिलतीअठन्नी में एक !मान लो 'खुशियाँ' मिलतीसमुद्री लहरों के साथ मुफ्त मेंकंडीशन एप्लाय के साथ किहर उछलते ज्वार के साथ आतीतो लौट भी जा...
shashi purwar
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आँखों में अंगार है, सीने में भी दर्दकुंठित मन के रोग हैं, आतंकी नामर्द१ व्यर्थ कभी होगा नहीं, सैनिक का बलदानआतंकी को मार कर, देना होगा मान२ चैन वहां बसता नहीं, जहाँ झूठ के लालसच की छाया में मिली, सुख की रोटी दाल३ लगी उदर में आग है, कंठ हुए...
Kailash Sharma
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कुछ दर्द अभी तो सहने हैं,कुछ अश्क़ अभी तो बहने हैं।मत हार अभी मांगो खुद से,मरुधर में बोने सपने हैं।बहने दो नयनों से यमुना,यादों को ताज़ा रखने हैं।नींद दूर है इन आंखों से,कैसे सपने अब सजने हैं।बहुत बचा कहने को तुम से,गर सुन पाओ, वह कहने हैं।कुछ नहीं शिकायत तुमने की,यह...
shashi purwar
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धरती माँगे पूत से, दुशमन का संहार इक इक कतरा खून का, देंगे उस पर वार कतरा कतरा बह रहा, उन आँखों से खून नफरत की इस आग में, बेबस हुआ सुकून दहशत के हर वार का, देंगे कड़ा जबाब नहीं सुनेंगे आज हम , छोडो चीनी,कबाबशशि पुरवार