ब्लॉगसेतु

विजय राजबली माथुर
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Manish SinghSeptember 26 at 5:20 PM दो ध्रुवीय विश्व हमारी पीढ़ी ने देखा है। हमारी सरकारों को कभी रूस और कभी अमरीका की कृपा के लिए जतन करते देखा है। पर एक वक्त था, जब इनके बीच गुटनिरपेक्ष देश तीसरा ध्रुव थे, भारत इनका अगुआ था, और नेहरू इसका चेहरा।उस जमाने मे हम...
sanjiv verma salil
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नवगीत:सूरदास पथदर्शक*सूरदास पथदर्शक हों तो आँख खुली रखना.कौन किसी काकभी हुआ है?किसको फलतासदा जुआ है?वही गिराआखिर में भीतरजिसने खोदाअंध कुआ हैबिन देखे जोकूद रहा निश्चितहै गिर पड़नासूरदासपथदर्शक हों तोआँख खुली रखना.चोर-चोरमौसेरे भाईव्यापारीअधिकारीजनप्रत...
अमितेश कुमार
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नाटक एक ऐसा माध्यम है जिसका दर्शक अभिन्न आंतरिक अंग है. अन्य कला के भावकों की तरह, या साहित्य के पाठक की तरह वह बाहरी नहीं है. नाट्य प्रस्तुति को संभव करने में नाटककार, अभिनेता, निर्देशक, पार्श्वकर्मी के साथ दर्शक भी जरूरी है. कहा भी जाता है कि एक अभिनेता और ए...
 पोस्ट लेवल : सहृदय Audience दर्शक
Kajal Kumar
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अमितेश कुमार
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बिहार में पूर्वी चंपारण जिले के मुख्यायालय मोतिहारी से तीस किलोमीटर दूर पर देहात का एक गांव पजियरवा, जहां सड़क मार्ग से पहुंचना ही कवायद है वहां छठ की परना के रोज शाम सात बजे से लोग एक अस्थाई मंच के सामने जमने लगे. पहली पंक्ति में हर साल की तरह बच्चे हैं, बीच बीच म...
सुशील बाकलीवाल
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             एक गांव में आग लगी । सभी लोग उसको बुझाने में लगे हुए थे । वहीं एक चिड़िया अपनी चोंच में पानी भरती और आग में डालती, फिर भरती और फिर आग में डालती । एक कौवा डाल पर बैठा उस चिड़िया को देख रहा था । क...
राजेश कश्यप
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193वीं जयन्ति पर विशेषसमाज के महादिग्दर्शक स्वामी दयानंद सरस्वती-राजेश कश्यप         महर्षि दयानंद आर्य समाज के संस्थापक, महान समाज सुधारक, राष्ट्र-निर्माता, प्रकाण्ड विद्वान, सच्चे सन्यासी, ओजस्वी सन्त और स्वराज के संस्थापक थे। उनका जन्म ग...
मधुलिका पटेल
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पिता शब्द का अहसास याद दिलाता है हमेंकी कोइ बरगद है हमारे आस -पासजिसकी शीतल छाया मेंहम बेफ़िक्र हो कर सो सकेंजीवन में गर आए कोइ दुख तो उन विशाल कंधों परसर रख करजी भर कर रो सकेंवो ऐसा मार्गदर्शक है जो पहले खुद उन रास्तों परचल कर अंदाज़ा लगाता हैकी अगर...
Kailash Sharma
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'मैं' हूँ नहीं यह शरीर'मैं' हूँ जीवन सीमाओं से परे,मुक्त बंधनों से शरीर के।'मैं' हूँ अजन्मान ही कभी हुई मृत्यु,'मैं' हूँ सदैव मुक्त समय सेन मेरा आदि है न अंत।'मैं' हूँ सच्चा मार्गदर्शकजो भी थामता मेरा हाथनहीं होता कभी पथ भ्रष्ट,लेकिन देता अधिकार चुनने कामार्ग अपने...
अमितेश कुमार
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राजप्रासादअंधा युग अपनी सरंचना में ही भव्यता को समेटे हुए है. इसको पहचानते हुए इब्राहिम अल्काज़ी ने इसको तालकटोरा, पुराना किला और फ़िरोज़ शाह कोटला में किया था. अल्काज़ी के अलावा कई अन्य निर्देशकों ने भी इसकी  अलग अलग प्रस्तुतियां की हैं.  रवि वासवानी ने...