ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
7
बरसी न बदरिया न मुलाक़ात बहारों से की,  न तितलियों ने ताज पहनाया न  फुहार ख़ुशियों ने की,   मिली न सौग़ात सितारों की, ढलती शाम में वह कोयल-सी गुनगुनायी,    मुद्दतों बाद आज मेरी दहलीज़ मुस्कुरायी, &nb...
अनीता सैनी
7
 कुछ हर्षाते लम्हे अनायास ही मौन में मैंने धँसाये  थे  आँखों  के पानी से भिगो कठोर किया उन्हें  साँसों की पतली परत में छिपा ख़ामोश किया था जिन्हें फिर भी  हार न मानी उन्हो...
Nitu  Thakur
479
वक़्त की दहलीज़ पररोशनी  सी टिमटिमाई रात के अंधियारे वन में एक खिड़की दी दिखाई चल ख्वाबों के पंख लगाकर नील गगन में उड़ते जायें तारों से रोशन दुनिया में सपनों का एक महल बनायें जहाँ बहे खुशियों का सागर फूलों की खुशबू को स...
 पोस्ट लेवल : वक़्त की दहलीज़ पर
ANITA LAGURI (ANU)
369
आज फिर तुम साथ चले आएघर की दहलीज़  तक..!पर वही सवाल फिर से..!क्यों मुझे दरवाज़े तक छोड़विलीन हो जाते हो इन अंधेरों में..?क्यों नहीं लांघते  इन  दहलीज़ों को..?जानती हूँ  तुम्हें पता है नामेरा वो अंधेरों से  डर...!अ...