ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
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 उजड़ रहा है साहेब धरा के दामन से विश्वास सुलग रही हैं साँसें कूटनीति जला रही है ज़िंदा मानस   सुख का अलाव जला भी नहीं दर्द धुआँ बन आँखों में धंसाता गया  निर्धन हुआ बेचैन  वक़्त...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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मिटकर मेहंदी को रचते सबने देखा है,उजड़कर मोहब्बत कोरंग लाते देखा है?चमन में बहारों काबस वक़्त थोड़ा है,ख़िज़ाँ ने फिर अपनारुख़ क्यों मोड़ा है?ज़माने के सितम सेन छूटता दामन है,जुदाई से बड़ाभला कोई इम्तिहान है?मज़बूरी के दायरों मेंहसरतें दिन-रात पलीं,मचलती उम्मीदेंकब क़दम...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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वो देखो खड़ा है भीगकर एक शरमाया शजर पहली बारिश में तर-ब-तर कोई आया उसके  नीचे ख़ुद को बारिश से बचाने थमने  लगी  बरसातलगा रिमझिम के तराने बौराया बादल बजाने न जाने किसका सुराग लायीआवार...
सुमन कपूर
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गिरा तेरी आँख से इक क़तरा अश्क कामेरा दामन यूँ सेहरा से सागर बन गया ।।सु-मन 
 पोस्ट लेवल : अश्क़ दामन
VMWTeam Bharat
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सलमान खुर्शीद ने कह दिया कि कांग्रेस के दामन पर मुसलमानों के खून के दाग लगे हैं। मैं कांग्रेस का नेता हूं। इस नाते मुसलमानों के ख़ून के यह धब्बे मेरे अपने दामन पर भी हैं - सलमान खुर्शीदकांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने ताला नगरी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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मत टिकाओ उम्मीद को अपनी किसी लफ़्फ़ाज़ के सहारे, नहीं  तो डूब जायेगी नैया एक दिन देखते रह जाओगे किनारे। दरारें दिख रहीं हैं दूर से मुझको संयम के बाँध अब हैं फूटने वाले ,जायेंगे टूट जब एक दिन कच्चे विश्वास के...
mahendra verma
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कुछ दाने, कुछ मिट्टी किंचित सावन शेष रहे । सूरज अवसादित हो बैठा ऋतुओं में अनबन, नदिया-पर्वत-सागर रूठे पवनों में जकड़न, जो हो, बस आशा-ऊर्जा का दामन शेष रहे । मौन हुए सब पंख-पखेरू झरनों का कलकल, नीरवता को भंग कर रहा कोई कोलाहल, जो हो, संवादी सुर में अब गायन शेष रह...
Ramesh pandey
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पत्रकारिता के बारे में समालोचना करते वक्त डर क्यों लगता है? क्या इसलिए कि लोकतंत्र के खंभों को पाक दामन माना जाता है? या इसलिए कि ये खंभे काफी ताकत रखते और समय-समय पर ताकत दिखाते भी हैं? अब यह तय करना मुश्किल होता जा रहा है कि चौथा खंभा, लोकतंत्र का भार उठाये है या...
 पोस्ट लेवल : पाक दामन
Pratibha Kushwaha
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इन दस महीनों मेँकभी भी मैंनेतुम्हारा वास्तविक नाम जानने कीकोशिश नहीं कीतुम कहाँ की रहने वाली होइसमे भी मेरी कोई दिलचस्पी नहीं बनीतुम्हारे भाई बहन कितने है ?यह भी जानने की इच्छाकभी नहीं पनपीमन मेँ अगर कोई इच्छा थीतो, बस यहीकि इंसाफ होतुम्हें इंसाफ मिले,भरपूर इंसाफउस...
 पोस्ट लेवल : निर्भया दामनी कविता
Sanjay Chourasia
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कांटा , अगर इंसान के शरीर में कहीं भी चुभ जाये तो खून तो निकलता ही है साथ में दर्द भी बहुत और कई दिनों तक देता है ! सच कहूँ तो कोई भी इंसान अपने जीवन में किसी भी तरह के काँटों को पसंद नहीं करता , और ये होना भी नहीं चाहिए वर्ना पूरा जीवन बर्बाद और नीरस&nbs...