ब्लॉगसेतु

Ravindra Pandey
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किसको सुनाऊँ, अज़ब दास्तां,सूना है तुम बिन, ये सारा जहां।रुँधा गला है, और आँखें हैं नम,मुस्कुराने की मैंने, ली है कसम,समय चल रहा है, हवा बह रही,ठहर सा गया हूँ, एक मैं ही माँ।सुना है तुम बिन...कसक हैं कई पर सुनाऊँ किसे,ये पाँवों के छाले दिखाऊँ किसे,बिखर जो गया, समेटे...
अनीता सैनी
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बरसी न बदरिया न मुलाक़ात बहारों से की,  न तितलियों ने ताज पहनाया न  फुहार ख़ुशियों ने की,   मिली न सौग़ात सितारों की, ढलती शाम में वह कोयल-सी गुनगुनायी,    मुद्दतों बाद आज मेरी दहलीज़ मुस्कुरायी, &nb...
sanjiv verma salil
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ई मित्रता पर पैरोडी:संजीव 'सलिल'*(बतर्ज़: अजीब दास्तां है ये,कहाँ शुरू कहाँ ख़तम...)*हवाई दोस्ती है ये,निभाई जाए किस तरह?मिलें तो किस तरह मिलें-मिली नहीं हो जब वज़ह?हवाई दोस्ती है ये...*सवाल इससे कीजिए?जवाब उससे लीजिए.नहीं है जिनसे वास्ता-उन्हीं पे आप रीझिए.हवाई दोस्त...
राजेश कश्यप
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‘भारत-रत्न’ एवं यशस्वी प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी कीमहान आत्मा को स्मृति-पुष्प के रूप में समर्पित है यह विशेष लेख...“यह है अटल बिहारी वाजपेयी जी के भारत-रत्न बनने की रोचक दास्तां”http://tz.ucweb.com/8_3mhsd(Please Click the Link for More Details)-राजेश...
राजीव कुमार झा
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जब कभी सपनों में वो बुलाता है मुझेबीते लम्हों की दास्तां सुनाता है मुझे इंसानी जूनून का एक पैगाम लिए बंद दरवाजों के पार दिखाता है मुझे नफरत,द्वेष,ईर्ष्या की कोई झलक नहीं ये कौन सी जहां में ले जाता है मुझे मेरे इख्तयार में क्या-क्या नहीं होता बिगड़े मुकद्दर की याद दि...
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं ) मीना कुमारी जी की 44 वीं पुण्य तिथि पर उनका लिखा और उनका ही गाया यह गीत सुनें :  अज़ीब दास्तां है ये, कहां शुरू कहां खत्म !: 'ट्रेजे...