ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
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आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत है जीवित रहती घास असंभव कुछ नहीं होता गुड़ज़िंदगी की डोर ऊपर वाले के हाथ में सूरज और चाँद हवाओं में उड़ती जिज्ञासाएँपानी की क़िल्लत बसंत में बौर जे. स्वामीनाथन की कविताएँ मास्क, मैरिज और लॉ...
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(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); प्रिय,हमें प्यार से प्यार करना चाहिए और प्यार से ही उस प्यार को प्राप्त करना चाहिए। यदि हमें पसंद आ गया तो हमें प्यार मिलना ही चाहिए, ऐसी चाहत बेवकूफी नहीं तो और क्या है? अगर हमारे मन को दर्द होता है तो कोई ब...
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(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); - राजेश बन्छोरप्रिय पूजा,बहुत कुछ कहना है और कह पाना मुश्किल सा है. शायद यही कारण है कि अभिव्यक्ति के लिए कागज-कलम से बेहतर साधन नहीं खोज पाया. यह मेरा पहला और अंतिम पत्र है. इस पत्र को कागज का मामूली टुकड़ा म...
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(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); - राजेश बन्छोरप्रिय राज,मुझे खुद को नहीं मालूम कि मैं कैसी लड़की हूं. मैं आपके दोस्ती के काबिल नहीं, फिर भी आप मुझे अपना दोस्त समझते हैं, यह सोचकर ही मुझे बहुत गर्व महसूस होता है. मुझे मालूम है कि आप कभी...
 पोस्ट लेवल : दिल की बात प्रेम पत्र
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(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); -आयशा मुखर्जीडियर राहुल,जब से तुम मेरी ज़िन्दगी में आये हो मेरी life काफी interesting हो गयी है. तुमने अब तक हर बुरी या अच्छी परिस्थितियों में मेरा साथ दिया और सबसे पहले मैं इसके लिए तुम्हारा Thanks करती हूँ....
 पोस्ट लेवल : दिल की बात प्रेम पत्र
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(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); - दिलीप तिवारीप्रिये,मैं जब, हमारे मन मिलन के मंदिर में आया तो तुम्हें ना पाकर मेरी आँखें उदासी के समुन्दर में डूब गईं....ना जाने क्यों, हमेशा से, मेरे मन में एक अनजानी आशंका अपना डेरा जमाये रहती थी कि एक दिन...
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(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); प्रियतम, आप तो मेरे अंतर की एक-एक बात जानते हो, हृदयेश्वर आपसे क्या छिपा है? मेरे हृदय की अंत:स्थल की एक ही वासना है कि मैं सदा सर्वदा आपकी सानिध्य में ही रहूं। सबकुछ छोड़कर नित्य निरंतर आपकी चाकरी म...
 पोस्ट लेवल : दिल की बात प्रेम पत्र
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(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); - गीतांजलि शर्माप्रिय दीपक,तुम गये तो थे लौटने के वादे के साथ, और तुम लौटे भी, पर अब तुम मेरे नही रहे. मैंने भी तुम्हारा हर पल इंतजार किया, हर आहट पर नजर गडाये रखी, पर तुम परिदृश्य से उसी तरह लापता रहे जैसे तु...
अनीता सैनी
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आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत हैफिर गहराये काले बादलज़िंदगी रेत सी हो गई हैजब भी कोरा काग़ज़ देखा चंद बूँदे लहू की योगी दीवाल अविनाश यादव की कविताएँश्र्द्धांजलि सभा चेहरों ने अभिव्यक्ति की भाषा खो दी है मन ही देवता मन ही ईश्...
अनंत विजय
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अभिव्यक्ति की आजादी की बात करनेवाले बहुधा ये भूल जाते हैं कि इमरजेंसी के दौरान सिर्फ समाचारपत्रों पर ही दबाव नहीं बनाया गया था बल्कि कलात्मक और रचनात्मक अभिव्यक्ति को भी बाधित किया गया था। दबाव था सरकार को समर्थन देने का, इमरजेंसी को सही ठहराने का। देवानंद अपनी आत्...