ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
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 आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत हैकितनी सुंदर मेरी काया ब्रीफकेस गर हो तो ठहरो तुम मूकदर्शक,मैं कामिनीनाम चीन अनाम पाक साथी ग़ज़ल बदलती चाहत कहानी - ख़ोज सोना लेकन दिसुम में उलटबग्घा की कहानीजीवन मरण प्यार किसे कह...
अनीता सैनी
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आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत हैअपना शीश नवाता हूँकेबिन में क्रांतिकरती हैं मदहोश तुम्हारी प्यारी बातेंमस्तिष्कजी चाहता हैअनुज पाण्डेय की कविताएंकास्ट आयरन की इमारतमन और वहछठे सातवें फ़रेब मेंधन्यवाद दिलबागसिंह विर्क 
मधुलिका पटेल
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 उसने पेपर पर और मैंने माँ के हाथ पर कर दिए दस्तखत और हमें मिल गयी अपने अपने हिस्से की दौलत ~हर दिन डरती थी तुम्हे खोने से पर अब देखो जब से तुम गए हो ये डर भी खामोशी से बिना बताये कहाँ चला गयापता नहीं ~मेर...
Ravindra Pandey
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अपने मुल्क़ की बेहतरी के ख़्वाब क्या देखूँ...यहाँ तो लोग, दिलों में दीवार रखते हैं।किसी मज़लूम की हालात से पसीजें ना भले...मग़र लाशों को, सब सरे बाज़ार रखते हैं।मची है होड़ क्यूँ, सब हैं अगर ये पैरोकार...भाई-भाई में फिर क्यों दरार रखते हैं।सिखाये जिसने हमें ककहरे तुतलाते...
अनीता सैनी
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आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत है प्यार-प्रीत की राहऋषि परंपरा के महाकवि आचार्य कुँवर चंद्रप्रकाश सिंहअकेले खड़े हो विरोध करने वाले ये भी जान लें ऋजुता का ही विस्तार हैं सारी वक्रताएँदोनों के ही पार मिले वह स्वर्णिम दिन बचपन केजाग री तू विभा...
अनीता सैनी
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आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत है कवियों के लिए कुछ जानकारियाँक्रिया-प्रतिक्रियापेंशनर और बीमाभ्रम में हम हैंसाँवलाइंसानियत का कोई मजहब नहीं होताप्रीत खो गई कहींमैनेजर पाण्डेय का आलोचना-संसारबांसुरी की खोजये ख़ामोश औरतें ताजा नारियल फोड़ने का आसान तरीक...
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(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); इमरोज और अमृता प्रीतम ने जो खत एक-दूसरे को लिखे, वो साहित्य ही नहीं हर प्यार करने वाले के लिए भी धरोहर की तरह हैं। पढ़िए अमृता और इमरोज के ख़त। अमृता का ख़त‘राही,तुम मुझे संध्या के समय क्यों मिले? जिंदगी...
अनीता सैनी
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आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत है चाँदनी रात बहुत दूर गईरोटी का ख़तअनुनाद पितृ पक्ष में अटकन-चटकन : मेरी दृष्टि मेंपीली चमेलीकल भाग गई थी कवितादीमकें… इससे पहले क‍ि हमारा घर चट कर जायेंचिंतनबलभद्र की कविताएँयादें पनार घाटी का थोकदार जिम कॉर...
Yashoda Agrawal
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 धीरे धीरे मचल ऐदिल-ए-बेक़रारधीरे धीरे मचल ऐदिल-ए-बेक़रारकोई आता हैयूँ तड़प के न तड़पा मुझेबारबारकोई आता हैधीरे धीरे मचल ऐदिल-ए-बेक़रारयही गीत अब साज मेंसादर
अनीता सैनी
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 आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत हैजानिए खटीमा को एक अवतार पत्थर से परे मायका पुराना नहीं होता खिड़की एक कचरा बीनने वाली की डायरी आशुतोष यादव की कविताएँमैं वही हूँ जो मैं हूँजरा जागकर देखा खुद कोजन्मदिनबारिश की बौछार ये बातेंकभ...