ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
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आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत हैसद्गुरू नमनदम घुटता है आज चमन मेंघर में माँ की कोई तस्वीर नही ख़ुदा हो जाते हैं लोगये सांझ कैसेमोह-भंगठिठुरनसोच गुफ़्तगू के नातिया शायरी विशेषांक का विमोचन और मुशायरापथिकचाय एक जरुरतधन्यवाददिलबागसिंह विर्क
Yashoda Agrawal
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अहम् की पट्टी स्वार्थ के फाहे रखकर जब बाँध लेते हैं हम सोच की आँखों पर तब जम जाती है रिश्तों पर बर्फ दम घुट जाता है रिश्तों का दिल में गर्माहट रखकर बढाते हैं जब हाथ मिट जाती हैं सब दूरियां पिघल जाती है बर्फ जीव...
 पोस्ट लेवल : दिलबागसिंह विर्क
अनीता सैनी
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आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत हैसालगिरहसजदा ( जीवन की पाठशाला )आखिर कबमोनालिसा की मुस्कान.!थोड़ा ज़हर तो चाहिए ही ग़म भुलाने के लिएकोहरादेशकालपरिन्दे ख़्वाब केपंचदशी का ज्ञानहालात आइये समरकंद चलेंखड़े है मुझको खरीदार देखने के लिएपेंग्विन पक्षी है या जलचर?बचपन...
अनीता सैनी
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आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत हैउज्जैनीउद्धव की सरकारगुलाम मैं अदना-सा इंसान हूँबरगद की छाँव बन पालने होते हैंकहानी अधूरी,अनुभूति पूरी -प्रेम की प्रीति चौधरी की कविताएँ एक सच्चाईतू कोरोनरी धमनी की बीमारी इतिहास के पन्ने - सिन्धु घाटी...
अनीता सैनी
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आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत है नेक-नीयत हमेशा सलामत रहेपुरुष दिवस पर कवितान कभी ख़ामोश रहना, ज़ुल्मो-सितम सहकरचाँद -सा मुखड़ालाठियां चलाने वाले कौन हैं आखिरआशीष तिवारी की कविताएंमर्द को दर्द भी होता है मॉर्निंग वॉक से धन कमाने का अनूठा प्रयोगलहर...
sanjiv verma salil
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एक रचना दिल्लीवालो *दिल्लीवालो! भोर हुई पर जाग न जानाघुली हवा में प्रचुर धूल हैजंगल काटे, पर्वत खोदेसूखे ताल, सरोवर, पोखर नहीं बावली-कुएँ शेष हैं हर मुश्किल का यही मूल है बिल्लीवालो!दूध विषैला पी मत जाना कल्चर है होटल में खाना सद्विचार कह दक़ियानूसी चीर-फाड़कर वस्त्र...
 पोस्ट लेवल : नवगीत दिल्लीवालो
अनीता सैनी
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आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत हैजन्मदिवस चाचा नेहरू कामहावर आहट तेरे आने कीनर्म आहट खुशबुओं कीबड़ा महँगा पड़ा मुझे दोस्त बनानानिजता मेरी हर लेना..!लिफ़ाफ़े को ठेलता मज़मूनकलम कुछ नहीं लिख रही रास्ते कलौंजी के गुण राजा खुश है ढह गया एक देशधन्यवादद...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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दिल में आजकल एहसासात का  बे-क़ाबू तूफ़ान आ पसरा है, शायद उसे ख़बर है कि आजकल वहाँ आपका बसेरा है।ज़िन्दगी में यदाकदा ऐसे भी मक़ाम आते हैं, कोई अपने ही घर में अंजान  बनकर सितम का नाम पाते हैं।कोई किसी को&nbs...
ANITA LAGURI (ANU)
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"वाह...!  क्या जादू है तुम्हारे हाथों में,तुम्हारे हाथों से बनी चाय पीकर तो लगता है कि जन्नत के दर्शन हो गये।  सच कहता हूँ सुधा, शादी की पहली सुबह और आज 50 साल बीत जाने के बाद भी तुम्हारे हाथों की बनी चाय में कोई फ़र्क़ नहीं आया।" श्याम जी कहते-कह...
अनीता सैनी
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जिंदगियाँ निगल रहा प्रदूषण  क्यों पवन पर प्रतंच्या चढ़ाया है कभी अंजान था मानव इस अंजाम से आज वक़्त ने फ़रमान सुनाया है चिंगारी सोला बन धधक रही मानव !किन ख्यालों में खोया हैवाराणसी सिसक-सिसक तड़पती रही आज...