ब्लॉगसेतु

Krishna Kumar Yadav
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50वें 'विश्व डाक दिवस' के अवसर पर डाक सेवाओं के बारे में जन-जागरूकता लाने और व्यापक प्रचार-प्रसार के क्रम में डाक विभाग द्वारा 9 अक्टूबर को राजधानी लखनऊ में एक विशाल रैली का आयोजन किया गया। उत्तर प्रदेश के चीफ पोस्टमास्टर जनरल श्री कौशलेन्द्र कुमार सिन्हा ने निदेशक...
Krishna Kumar Yadav
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विश्व डाक दिवस (9 अक्टूबर) पर आप सभी को हार्दिक बधाईयाँ और शुभकामनायें !!Happy World Post Day.
 पोस्ट लेवल : विश्व डाक दिवस
Krishna Kumar Yadav
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डाक विभाग देश के सबसे पुराने विभागों में से एक है जो कि देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह एक ऐसा संगठन है जो न केवल देश के भीतर बल्कि देश की सीमाओं से बाहर अन्य देशों तक पहुँचने में भी हमारी  मदद करता है। भूमंडलीकरण की अवधारणा...
Sanjay  Grover
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वे जो स्कूल-कॉलेज में पढ़ाते भी हैं और स्टेशनरी भी चुराते हैं, जो बाढ़ और अकाल के नाम पर दफ़्तर में आई राशि ख़ुद खा जाते हैं, जो टैक्स नहीं देते, जो भरपूर ब्लैक-मनी होते हुए भी घर में हवा-पानी के लिए छोड़ी गई जगह में कमरे बना लेते हैं फिर शहर को कंक्रीट का जंगल भी बताक...
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बेटी से आबाद हैं, सबके घर-परिवार।बेटो जैसे दीजिए, बेटी को अधिकार।।--चाहे कोई वार हो, कोई हो तारीख।दिवस सभी देते हमें, कदम-कदम पर सीख।।जगदम्बा के रूप में, जो लेती अवतार।उस बेटी से कीजिए, बेटो जैसा प्यार।।बेटी रत्न अमोल है, क...
ऋता शेखर 'मधु'
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सोरठे - हिन्दी पखवारा विशेष छंदमेरा हिन्दुस्तान, जग में बहुत महान है।हिन्दी इसकी जान, मिठास ही पहचान है।।व्यक्त हुए हैं भाव, देवनागरी में मधुर।होता खास जुड़ाव, कविता जब सज कर मिली।।कोमलता से पूर्ण, अपनी हिन्दी है भली।छोटे बड़े अपूर्ण, ऐसे तो न भेद करे।।होता है व्याया...
kumarendra singh sengar
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हिन्दी दिवस के बाद हिन्दी की बात करना चर्चा करना कुछ लोगों को ऐसे महसूस होता है जैसे जन्मदिन गुजर जाने के बाद जन्मदिन की बधाई देना. जन्मदिन पर बधाई देना और लेना हमें व्यक्तिगत रूप से कभी पसंद नहीं आया. अब इसे एक तरह की सामाजिक परंपरा कहें या फिर अपने लोगों के बीच ह...
Manoj Kumar
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आओ हिंदी दिवस मनाऍं- करण समस्तीपुरीस्वाभिमान की भाषा हिंदी। जन मन की अभिलाषा हिंदी। सुंदर इसकी है अभिव्यक्ति। इसमें है सम्मोहन शक्ति। भारत के माथे की बिंदी। पुरस्कार देती है हिंदी। चलो कहीं भाषण कर आएँ। कविता दोहा गीत सुनाएं।&nbsp...
जेन्नी  शबनम
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क्षणिक बहार   *******   आज वह खूब चहक रही है   मन ही मन में बहक रही है  साल भर से जो वो कच्ची थी  उस का दिन है तो पक रही है।  आज वह निरीह नहीं सबल है  आज वह दुखी नहीं मगन है  आज उस के नाम धरती है  आज उस का...
 पोस्ट लेवल : हिन्दी दिवस
Kavita Rawat
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