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Yashoda Agrawal
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तुम्हारे चाहने से रंग नहीं बदलतेप्रेम नहीं बदलतेखून लाल ही रहता हैऔर आसमान नीलाजैसे प्रेम बढ़ता हैखून अधिक लाल हो जाताआसमान अधिक नीलाबढ़ते रंगों मेंहम-तुम एक से हो गयेदेखो !प्रेम हमारा इंद्रधनुष बन रहाबरस रहाअब धरती सुनहरी हो चली है ।@दीप्ति शर्मामूल रचना
 पोस्ट लेवल : दीप्ति शर्मा
Yashoda Agrawal
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रेल में खिडकी पर बैठीमैं आसमान ताक रही हूँअलग ही छवियाँ दिख रही हैं हर बारऔर उनको समझने की कोशिशमैं हर बार करती कुछ जोड़ती, कुछ मिटाती अनवरत ताक रही हूँआसमान के वर्तमान को याअपने अतीत कोऔर उन छवियों मेंअपनों को तलाशतीमैं तुम्हें देख पा रही हूँवहाँ कितने ही...
Yashoda Agrawal
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पितामेरी धमनियों में दौड़ता रक्तऔर तुम्हारी रिक्ततामहसूस करती मैं,चेहरे की रंगत का तुमसा होनासुकून भर देता है मुझमेंमैं हूँ पर तुम-सीदिखती तो हूँ खैरहर खूबी तुम्हारी पा नहीं सकीपितासहनशीलता तुम्हारी,गलतियों के बावजूद मॉफ करने कीसाथ चलने कीसब जानते चुप रहने की म...
 पोस्ट लेवल : दीप्ति शर्मा
Yashoda Agrawal
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आवाज़ जोधरती से आकाश तकसुनी नहीं जातीवो अंतहीन मौन आवाज़हवा के साथ पत्तियोंकी सरसराहट मेंबस महसूस होती हैपर्वतों को लाँघकरसीमाएँ पार कर जाती हैंउस पर चर्चायें की जाती हैंपर रात के सन्नाटे मेंवो आवाज़ सुनी नहीं जातीदबा दी जाती हैसुबह होने परघायल परिंदे कीअंतिम साँस...
sahitya shilpi
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 पोस्ट लेवल : कविता दीप्ति शर्मा
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आवाज़ जोधरती से आकाश तकसुनी नहीं जातीवो अंतहीन मौन आवाज़हवा के साथ पत्तियोंकी सरसराहट मेंबस महसूस होती हैपर्वतों को लाँघकरसीमाएँ पार कर जाती हैंउस पर चर्चायें की जाती हैंपर रात के सन्नाटे मेंवो आवाज़ सुनी नहीं जातीदबा दी जाती हैसुबह होने परघायल परिंदे कीअंतिम साँस...
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