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संजीव तिवारी
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 पोस्ट लेवल : दुनिया
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Krishna Kumar Yadav
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डाक टिकट किसी भी राष्ट्र की सभ्यता, संस्कृति एवं विरासत के संवाहक हैं। तभी तो डाक टिकट को नन्हा राजदूत कहा जाता है। हर डाक टिकट के पीछे एक कहानी छिपी है और इससे युवा पीढ़ी को रूबरू कराने की जरूरत है। यह विचार सनबीम स्कूल, फैज़ाबाद में फिलेटली क्लब का उद्दघाटन करते हु...
Krishna Kumar Yadav
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गाँधी जी का पत्रों से अटूट संबंध रहा है। यही कारण है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती वर्ष में डाक विभाग द्वारा ‘प्रिय बापू, आप अमर हैं’ विषय पर "ढाई आखर" राष्ट्रीय स्तर पत्र लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। और  यदि आपका पत्र चुना गया तो प...
kumarendra singh sengar
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तकनीकी रूप से कई बार आभास होता है कि हम बहुतों से बहुत पीछे हैं, बहुत पिछड़े हैं. हमारे साथ के ही बहुत से लोग हमसे कई सालों पहले से कंप्यूटर का उपयोग करने लगे थे. हमने पहली बार कंप्यूटर का आंशिक उपयोग शायद 1999 में करना शुरू किया था. हालाँकि देखने और छूने को तो सन 1...
Yashoda Agrawal
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तुमसा कोई नहीं है मांमेरे हर दुःख-दर्द कीदवा है मेरी मां,मुसीबतों के समयमख़मली ढाल है मेरी मां,अपनी चमड़ी के जूते बनाकरपहनाऊं वह भी कम है, मां,इस जहां में तो क्या,किसी भी जहां मेंतुमसा कोई नहीं है मां-विनीता शर्माइंद्रधनुष की रंगत मांप्यार की परिभाषा है मांजीने की अभ...
VMWTeam Bharat
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वह पायल नहीं पहनती पांव में बस एक काले धागे से कहर बरसाती हैउसकी यही अदा तो 'निल्को'मुझे उसका दीवाना बनाती हैबहुत मजे से इठलाती है गूढ़ व्यंग की मीन बहुत बनाती हैमाथे पर जब बिंदी लगाती हैतो पूरे विश्व को सुंदर बनाती है'मधुलेश' का ख्याल आए तोवह भी कविता बन...