ब्लॉगसेतु

Krishna Kumar Yadav
58
 गाँधी जी का पत्रों से अटूट संबंध रहा है। यही कारण है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती वर्ष में डाक विभाग द्वारा ‘प्रिय बापू, आप अमर हैं’ विषय पर "ढाई आखर" राष्ट्रीय स्तर पत्र लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। और  यदि आपका पत्र चुना गय...
Krishna Kumar Yadav
58
In the era of new technology now Letter Boxes will be getting smart. This is now possible with the implementation of the Electronic Monitoring of Letter Box Clearance through the Nanyatha software developed by Department of Posts. The programme helps to know the st...
Krishna Kumar Yadav
58
वक़्त के साथ कदमताल करते हुए डिजिटल इण्डिया (Digital India) और स्मार्ट गवर्नेंस (Smart Governance) की तरफ कदम बढ़ाते हुए डाक विभाग अब लेटर बॉक्स को भी स्मार्ट बना रहा है। अब लेटर बॉक्स से  पत्रों की निकासी को सॉफ्टवेयर आधारित करके  इसे नई टेक्नालॉजी से जोड़ा...
YASHVARDHAN SRIVASTAV
687
दिखा दो सारी दुनिया कोकी तुम क्या कर सकते होअकेले ही सही परसंसार बदल सकते होजो होना था वो हो गया जो खोना था वो खोगयापर अभी भी तुम सब कुछ पा सकते हो खोई मजिलों को वापस ला सकते हो।।बस जरूरत है सही राह पे चलने कीखुद को एक नई दिशादेने कीभल...
YASHVARDHAN SRIVASTAV
687
दिखा दो सारी दुनिया कोकी तुम क्या कर सकते होअकेले ही सही परसंसार बदल सकते होजो होना था वो हो गया जो खोना था वो खोगयापर अभी भी तुम सब कुछ पा सकते हो खोई मजिलों को वापस ला सकते हो।।बस जरूरत है सही राह पे चलने कीखुद को एक नई दिशादेने कीभले ही वापस से शुरुआत करोपरंतु अ...
सुशील बाकलीवाल
420
       वक़्त फ़िल्म का एक डायलॉग- "चाय की प्याली हाथ में उठा कर मुंह तक तक ले जाते-जाते कई बार बरसों बीत जाते हैं, पोटली रुपयों से भरी हो पर इंसान कभी-कभी भीख मांगने पर मजबूर हो जाता है" । फिल्मी दुनिया में ऐसे कारनामे अक्सर होते रहते हैं, इनमें ए...
4
--सम्बन्धों के चक्रव्यूह में,सीख रहा हूँ दुनियादारी।जब पारंगत हो जाऊँगा,तब बन जाऊँगा व्यापारी।।--खुदगर्जी के महासिऩ्धु में,कैसे सुथरा कहलाऊँगा?पीने का पानी गंगा से,गागर में कैसे पाऊँगा?बिना परिश्रम, बिना कर्म के,क्या बन पाऊँगा अधिकारी।जब पारंगत हो जाऊँगा,तब बन...
Yashoda Agrawal
8
रिश्तों की बारीक-बारीक तहेंसुलझाते हुएउलझ-सी गई हूं,रत्ती-रत्ती देकर भीलगता है जैसेकुछ भी तो नहीं दिया,हर्फ-हर्फतुम्हें जानने-सुनने के बाद भीलगता हैजैसे अजनबी हो तुम अब भी,हर आहटजो तुमसे होकरमुझ तक आती हैभावनाओं का अथाह समंदरमुझमें आलोड़‍ित करतन्हा कर जाती है।एक सा...
ANITA LAGURI (ANU)
321
नंदू नंदू दरवाजे की ओट से,निस्तब्ध मां को देख &#2...
संजीव तिवारी
9
..............................
 पोस्ट लेवल : दुनिया