ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा हुई तो बहुत से लोगों को लगा कि उनको घर में कैद कर दिया गया है. प्रधानमंत्री के शब्द कुछ ऐसे थे भी कि लोगों ने इसे एक तरह का कर्फ्यू ही समझा. समझना भी चाहिए था. खैर, चर्चा इसकी नहीं. लॉकडाउन का कौन, कितना, किस तरह से पालन कर रहा, यह उसकी म...
kumarendra singh sengar
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अपनी उम्र के चार दशक गुजारने के बाद आत्मकथा लिखना हुआ. इसमें अपने जीवन के चालीस वर्षों की वह कहानी प्रस्तुत की गई जिसे हमने अपनी दृष्टि से देखा और महसूस किया. कुछ सच्ची कुछ झूठी के रूप में आत्मकथा कम अपनी जीवन-दृष्टि ही सामने आई. व्यावसायिक रूप से, प्रकाशन की आर्थि...
सुशील बाकलीवाल
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       हम सभी के जीवन में कभी अकस्मात कुछ परिस्थितियां ऐसी भी बन जाती है, जब हमें तत्काल किसी अपने की,  विशेष सुरक्षा की या कानूनी मदद की आवश्यकता आ पडती है । किंतु सामान्य तौर पर उस वक्त हम न सिर्फ अकेले होते हैं,  बल्कि इस स्थित...
सुशील बाकलीवाल
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       हम सभी के जीवन में कभी अकस्मात कुछ परिस्थितियां ऐसी भी बन जाती है, जब हमें तत्काल किसी अपने की, विशेष सुरक्षा की या कानूनी मदद की आवश्यकता आ पडती है । किंतु सामान्य तौर पर उस वक्त हम न सिर्फ अकेले होते हैं,  बल्कि इस स्थिति में भी नह...
सुशील बाकलीवाल
429
       हमारे जीवन में कभी भी अकस्मात कुछ परिस्थितियां ऐसी बन जाती है,  जब हमें तत्काल किसी अपने की, विशेष सुरक्षा की या कानूनी मदद की आवश्यकता आन पडती है, और सामान्य तौर पर उस वक्त हम न सिर्फ अकेले होते हैं,  ब...
सुशील बाकलीवाल
329
       हम सभी के जीवन में कभी अकस्मात कुछ परिस्थितियां ऐसी भी बन जाती है, जब हमें तत्काल किसी अपने की, विशेष सुरक्षा की या कानूनी मदद की आवश्यकता आ पडती है । किंतु सामान्य तौर पर उस वक्त हम न सिर्फ अकेले होते हैं,  बल्कि इस स्थिति में भी नह...
kumarendra singh sengar
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ये  आवश्यक नहीं कि आप अथवा आपका शहर आतंकिओं के निशाने पर हो और वहाँ किसी तरह का बम धमाका हो, किसी तरह की गोलीबारी हो. बिना इसके भी आतंकी अथवा उनके स्लीपर सेल अपना काम करने के लिए नए-नए रास्ते तलाशने लगे हैं. इसे किसी तरह का आकलन अथवा अनुमान मान कर अनदेखा करने...
kumarendra singh sengar
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शासन-प्रशासन इस समय इस चिंता में हैं कि कैसे वाहन चालकों की जान बचाई जाये. ऐसा पढ़कर आपको आश्चर्य लगेगा. लगना भी चाहिए क्योंकि बात ही ऐसी है. पिछले दिनों वाहन सम्बन्धी अधिनियम में जबरदस्त बदलाव करते हुए जुर्माने को कई-कई गुना बढ़ाया गया. कई प्रदेशों से अचानक से बड़ी-ब...
Akhilesh Sharma
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इससे कौन इनकार करेगा कि हर जान बेशकीमती है। फिर भी अगर जान की कीमत रुपए-पैसों में लगानी हो तो आप जान कर हैरान होंगे कि भारत की 3 प्रतिशत जीडीपी सड़क दुर्घटनाओं में मारे गए लोगों की वजह से कम हो जाती है। हैरानी की बात यह भी है कि सड़क दुर्घटनाओं के कारण हर साल भारत...
अजय  कुमार झा
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सड़क दुर्घटनाओं की खबरें अब नियमित  रूप से समाचारों में देखने पढ़ने व सुनने को मिल जाती हैं | अफ़सोस और उससे अधिक चिंता की बात ये है की इन घटनाओं में लगातार इज़ाफ़ा ही हो रहा है | दो पहिआ वाहन से लेकर चार पहिया वाहन और भारी वाहन तक कोई भी इससे अछूता नहीं है |...