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sanjiv verma salil
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पुरोवाकदुल्हन सी सजीली - गीति रचनायेँ नवेलीआचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' *सनातन सत्य 'परिवर्तन ही जीवन है' (चेंज इज लाइफ) का प्रत्यक्ष प्रमाण हिंदी कविता है। हिंदी कविता में पल-पल होते परिवर्तन उसकी जीवंतता, यथार्थता और सरसता के साक्षी हैं। यह परिवर्तन भ...
सुशील बाकलीवाल
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        शादी की पहली ही सुबह घर में कोहराम मचा हुआ था।        दूल्हे ने कामवाली को थप्पड़ रसीद कर दिया था।               "हद होती है बेवकूफी की" मम्मी की आवाज़ आई।      &...
Nitu  Thakur
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सरहद पे चली जब गोलीतब माँ धरती से बोलीमेरा लाल है तेरे हवालेकहीं लग ना जाये गोलीरस्ता देख रहें हैं उसकाव्याकुल से दो नैनापिछले बरस ही लाई थीमै नई दुल्हन का गौनासूनी ना होने देनादुल्हन की मेरे कलाईजीते जी मर जाऊँगीअगर बेवा नजर वो आईसरहद पे चली जब गोली  .....नन्...
Ravindra Pandey
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मेरा मन बावला सा, फिरता यहाँ वहाँ...--------------------***-------------------मेरा मन बावला सा, फिरता यहाँ वहाँ,है कौन सी वो महफ़िल, पाऊँ सुकूं जहाँ..?बहल ही जाता है मन, रिश्तों की ऐसी डोर...पर नज़रें तलाशती हैं, कहाँ खो गई है माँ..?सब कुछ हुआ है हासिल, तू भी गगन से...
 पोस्ट लेवल : उलझन बावला माँ दुल्हन
Akhilesh Karn
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गायक : हरिनाथ झाफिल्म : मैथिली गजलगीतकार : पारंपरिक, मैथिली, संगीतकार : हरिनाथ झासबके दुल्हनिया रामा  हो हो हो जियरा जुराबे मोर दुल्हिनिया जीहो हो हो हो हो होसबके दुल्हनिया रामा जियरा जुराबे मोर दुल्हिनिया जी हे मोर दुल्हिनिया जीसबके दुल्हनिया र...
DHRUV SINGH  "एकलव्य"
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                                                                          ...
सरिता  भाटिया
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कितनी ख़ुशी है इस पगली को प्रीतम की आगोश पाने की जिससे बंध जाएगी वो जमाने भर की बंदिशों से रीतिरिवाजों से जिम्मेदारियों से खोकर ख्वाहिशों की बुलंदियाँ स्वछन्द विचरण माँ का सुखमय शीतल आँचल .....................
 पोस्ट लेवल : अहसास दुल्हन
राजीव कुमार झा
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रोना मनुष्य को प्रकृति की ओर से मिला एक जन्मजात तोहफ़ा है,क्योंकि इस दुनियां में प्रवेश करते ही मनुष्य का पहला काम होता है रोना.शिशु का क्रंदन सुनकर ही जच्चाखाने के बाहर प्रतीक्षारत सगे-संबंधी समझते हैं कि बच्चा इस दुनियां में आ गया.उसके बाद आदमी न जाने कितनी बार रो...
पत्रकार रमेश कुमार जैन उर्फ निर्भीक
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भेजा है निमंत्रण दोस्ती का स्वीकार करों या इंकार करोंप्रिय दोस्तों, सदा खुश रहो! जय जिनेन्द्र दोस्तों, भेजा है निमंत्रण दोस्ती का स्वीकार करों या इंकार करों क्या यह तुम्हारे काबिल भी है. मेरा यह खाता कहूँ या प्रोफाइल फेसबुक की भीड़ में कहीं खो गई थी. असल म...