ब्लॉगसेतु

Rajeev Upadhyay
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सूने घर में किस तरह सहेजूँ मन को।पहले तो लगा कि अब आईं तुम, आकरअब हँसी की लहरें काँपी दीवारों परखिड़कियाँ खुलीं अब लिये किसी आनन को।पर कोई आया गया न कोई बोलाखुद मैंने ही घर का दरवाजा खोलाआदतवश आवाजें दीं सूनेपन को।फिर घर की खामोशी भर आई मन मेंचूड़ियाँ खनकती नहीं कह...
 पोस्ट लेवल : कविता दुष्यंत कुमार
Yashoda Agrawal
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मत कहो, आकाश में कुहरा घना है,यह किसी की व्यक्तिगत आलोचना है ।सूर्य हमने भी नहीं देखा सुबह से,क्या करोगे, सूर्य का क्या देखना है ।इस सड़क पर इस क़दर कीचड़ बिछी है,हर किसी का पाँव घुटनों तक सना है ।पक्ष औ' प्रतिपक्ष संसद में मुखर हैं,बात इतनी है कि कोई पुल बना हैरक्...
 पोस्ट लेवल : दुष्यंत कुमार
Yashoda Agrawal
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ये सारा जिस्म झुक कर बोझ से दोहरा हुआ होगा मैं सजदे में नहीं था आप को धोखा हुआ होगा यहाँ तक आते आते सूख जाती है कई नदियाँ मुझे मालूम है पानी कहाँ ठहरा हुआ होगा ग़ज़ब ये है की अपनी मौत की आहट नहीं सुनते वो सब के सब परेशाँ हैं वहाँ पर क्या हु...
Yashoda Agrawal
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इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है,नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो है।एक चिनगारी कही से ढूँढ लाओ दोस्तों,इस दिए में तेल से भीगी हुई बाती तो है।एक खंडहर के हृदय-सी, एक जंगली फूल-सी,आदमी की पीर गूंगी ही सही, गाती तो है।एक चादर साँझ ने सारे नगर पर डाल दी,यह अंध...
 पोस्ट लेवल : दुष्यंत कुमार
Yashoda Agrawal
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1933-1975इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है,नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो है।एक चिनगारी कही से ढूँढ लाओ दोस्तों,इस दिए में तेल से भीगी हुई बाती तो है।एक खंडहर के हृदय-सी, एक जंगली फूल-सी,आदमी की पीर गूंगी ही सही, गाती तो है।एक चादर साँझ ने सारे नगर पर डाल...
 पोस्ट लेवल : दुष्यंत कुमार
kumarendra singh sengar
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हिन्दी ग़ज़ल के क्षेत्र में जो लोकप्रियता दुष्यंत कुमार को मिली वो किसी विरले कवि को प्राप्त होती है. वे हिन्दी के कवि और ग़ज़लकार थे. उनके लेखन का स्वर सड़क से संसद तक गूँजता रहा है. यूँ तो उन्होंने अनेक विधाओं में लेखनी चलाई किन्तु ग़ज़लों की अपार लोकप्रियता ने उन...
शिवम् मिश्रा
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प्रिय मित्रों, हिन्दी ग़ज़ल में जो लोकप्रियता दुष्यंत को मिली,वो किसी विरले कवि को है मिलती.हिन्दी के ऐसे कवि-ग़ज़लकार हैं वे अब तक,जिनका लेखन गूँजता है सड़क से संसद तक.  यूँ तो अनेक विधाओं में उनकी कलम चली, किन्तु ग़ज़लों को ही अपार लोकप्रियता मिली. जन्मस्थान...
kuldeep thakur
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सूरज जबकिरणों के बीज-रत्नधरती के प्रांगण मेंबोकरहारा-थकास्वेद-युक्तरक्त-वदनसिन्धु के किनारेनिज थकन मिटाने कोनए गीत पाने कोआया,तब निर्मम उस सिन्धु ने डुबो दिया,ऊपर से लहरों की अँधियाली चादर ली ढाँपऔर शान्त हो रहा।लज्जा से अरुण हुईतरुण दिशाओं नेआवरण हटाकर निहारा दृश्...
 पोस्ट लेवल : दुष्यंत कुमार
शिवम् मिश्रा
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नमस्कार साथियो,आज सुप्रसिद्ध गज़लकार दुष्यंत कुमार का जन्मदिन है. उनका जन्म बिजनौर के ग्राम राजपुर नवादा में 1 सितम्बर 1933 को हुआ था. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने के उपरांत कुछ दिन आकाशवाणी भोपाल में असिस्टेंट प्रोड्यूसर रहे. दुष्यंत का पूरा नाम दु...
kuldeep thakur
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मेरे स्वप्न तुम्हारे पास सहारा पाने आयेंगेइस बूढे पीपल की छाया में सुस्ताने आयेंगेहौले-हौले पाँव हिलाओ जल सोया है छेडो मतहम सब अपने-अपने दीपक यहीं सिराने आयेंगेथोडी आँच बची रहने दो थोडा धुँआ निकलने दोतुम देखोगी इसी बहाने कई मुसाफिर आयेंगेउनको क्या मालूम निरूपित इस...
 पोस्ट लेवल : दुष्यंत कुमार