ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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आज अचानक ही कुछ बीती बातें पलट रहे थे तो तमाम बातें आँखों के सामने से गुजर गईं. पिछले चार दशकों से अधिक की जीवन-यात्रा जैसे एक पल में गुजर गई. इसे दिमाग की संरचना ही कहेंगे कि एक-एक छोटी घटना, एक-एक पल ऐसे याद रहता है जैसे अभी-अभी गुजरा हो. अपनी इस आदत के चलते समस्...
 पोस्ट लेवल : दोस्त दोस्ती समाज
kumarendra singh sengar
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आज की पोस्ट रिश्तों पर लिखने की सोच रहे थे मगर लगा कि रिश्तों की परिभाषा है क्या? जो हम आपसी संबंधों के द्वारा निश्चित कर देते हैं, क्या वही रिश्ते कहलाते हैं? क्या रिश्तों के लिए आपस में किसी तरह का सम्बन्ध होना आवश्यक है? दो व्यक्तियों के बीच की दोस्ती को क्या कह...
kumarendra singh sengar
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वर्षों पुराने दो परिचित. सामाजिक ताने-बाने के चक्कर में, शिक्षा-कैरियर के कारण चकरघिन्नी बन दोनों कई वर्षों तक परिचित होने के बाद भी अपरिचित से रहे. समय, स्थान की अपनी सीमाओं के चलते अनजान बने रहे. तकनीकी विकास ने सभी दूरियों को पाट दिया तो उन दोनों के बीच की दूरिय...
अजय  कुमार झा
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कहते हैं कि संगत का असर बहुत पड़ता है और बुरी संगत का तो और भी अधिक | बात उन दिनों की थी जब हम शहर से अचानक गाँव के वासी हो गए थे | चूंकि सब कुछ अप्रत्याशित था और बहुत अचानक हुआ था इसलिए कुछ भी व्यवस्थित नहीं था | माँ और बाबूजी पहले ही अस्वस्थ चल रहे थे | हम सब धीरे...
मुकेश कुमार
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स्कूल - कालेज के दिनों में, कितने थेथर से होते थे न दोस्त ! साले, चेहरा देख कर व आवाज की लय सुनकर परेशानी भाँप जाते थे । एक पैसे की औकात नहीं होती थी, खुद की, पर फिर भी हर समय साथ खड़े रहते थे । और फिर फीलिंग ऐसी आती थी जैसे अंबानी/टाटा हो गया हूँ, पता नहीं किस किस...
kumarendra singh sengar
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तीन रूपों में एक व्यक्ति. एक रिश्ता, एक सोच. हो सकता है ऐसा लिखना बहुत से लोगों को बुरा लगे. ऐसा इसलिए क्योंकि समय के साथ बहुत से लोग मिलते रहे, बिछड़ते रहे. इसी मिलने-बिछड़ने के क्रम में बहुत से लोग ऐसे भी रहे जो कभी हमसे अलग हुए ही नहीं. ऐसे लोगों में संदीप और अभिन...
 पोस्ट लेवल : बचपन दोस्त दोस्ती
मुकेश कुमार
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मान लो 'आग'टाटा नमक केआयोडाइज्ड पैक्ड थैली की तरहखुले आम बिकती बाजार मेंमान लो 'दर्द'वैक्सड माचिस के डिब्बी की तरहपनवाड़ी के दूकान पर मिलतीअठन्नी में एक !मान लो 'खुशियाँ' मिलतीसमुद्री लहरों के साथ मुफ्त मेंकंडीशन एप्लाय के साथ किहर उछलते ज्वार के साथ आतीतो लौट भी जा...
kumarendra singh sengar
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जीवन में समस्याएँ बचपन से ही देखी हैं, सही हैं. उनका समाधान भी किया है. आज तक समस्यायों से, परेशानियों से, कष्टों से किसी न किसी रूप में घिरे रहते हैं. कभी हमारे खुद के, कभी परिजनों के, कभी दूसरों के. पता नहीं किस तरह का नैसर्गिक स्वभाव मिला हुआ है कि किसी की समस्य...
kumarendra singh sengar
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दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है जो अनाम सम्बन्ध के द्वारा सदैव आगे बढ़ता रहता है. ये हमारी खुशकिस्मती ही है कि हमें दोस्तों का, सच्चे दोस्तों का, भरोसेमंद दोस्तों का साथ खूब मिला है. ख़ुशी में भी दोस्त हमारे साथ रहे हैं और मुश्किल में तो और भी ज्यादा साथ आये हैं. उस समय भी ऐ...
kumarendra singh sengar
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कतिपय सार्वभौमिक सत्यों की तरह यह भी सार्वभौमिक सत्य है कि ग़लतफ़हमी के चलते संबंधों के बिगड़ने में देर नहीं लगती है. इसके लिए किसी परीक्षण की आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि यह अनादिकाल से सत्य होता चला आ रहा है. दो लोगों के आपसी संबंधों में बिखराव का एक कारण उनके बीच...