ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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इंसान कितनी भी कोशिश कर ले वह अपने अतीत से मुक्त नहीं हो पाता है. अतीत की घटनाएँ यदि सुखद हैं तो वह उन्हें याद कर-कर के खुश होता रहता है और यदि घटनाएँ दुखी करने वाली होती हैं तो वह व्यथित हो जाता है. मन बहुत बार बिना किसी प्रयास के अतीत की सैर कर आता है और कई बार क...
kumarendra singh sengar
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किसी से पहचान होना, किसी से कोई रिश्ता बन जाना, किसी से सम्बन्ध हो जाना, किसी से दोस्ती होना, किसी से सामान्य सा व्यवहार रखना आदि ऐसा लगता है जैसे अपने हाथ में नहीं वरन पूर्व निर्धारित होता है. कोई अकारण ही मन को, दिल को पसंद आने लगता है. कभी ऐसा होता है कि किसी व्...
kumarendra singh sengar
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शैतानियाँ, शरारतें कहीं से भी सीखनी नहीं पड़ती हैं. कोई सिखाता भी नहीं है. यह तो बालपन की स्वाभाविक प्रकृति होती है जो किसी भी बच्चे की नैसर्गिक सक्रियता के बीच उभरती रहती है. स्कूल में हम कुछ मित्रों की बड़ी पक्की, जिसे दांतकाटी रोटी कह सकते हैं, दोस्ती थी. कक्षा मे...
kumarendra singh sengar
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दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है जो किसी भी रिश्ते से बड़ा है. हमने व्यक्तिगत रूप से महसूस किया है कि इस रिश्ते में जितना अधिकार है उतना किसी और रिश्ते में नहीं. हो सकता है कि बहुत से लोगों को इससे आपत्ति हो क्योंकि रिश्तों की कसौटी पर बहुत बार कई लोग दोस्ती से ऊपर पति-पत्नी...
kumarendra singh sengar
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सामाजिक रिश्तों, संबंधों में आज चाहे जितना स्वार्थ आ गया हो, चाहे जितनी भौतिकता हावी हो गई हो मगर आज भी दोस्ती को सबसे पवित्र रिश्ता माना जाता है. समाज के अपने विकासपरक आयाम भले ही बनते रहे हों मगर दोस्ती के आयाम उसी तरह पावन, पवित्र बने रहे हैं. समय की बदलती गति म...
kumarendra singh sengar
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कभी अच्छा माना जाता होगा दोस्तों को गलत राह पर जाने से रोकना, अब इसे दगाबाजी समझा जाने लगा है. दोस्ती का तात्पर्य, दोस्त का अर्थ महज एक-दूसरे से मिलना, मौज-मस्ती करना, समय बिताना मात्र नहीं होता है. दोस्त का सन्दर्भ ही बहुत पावन है, दोस्ती का अर्थ ही बहुत व्यापक है...
kumarendra singh sengar
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किसी गलती की क्या सजा हो सकती है? ये गलती पर निर्भर करता है या सजा देने वाले की मानसिकता पर? अब सजा देने वाले के मन की कोई क्या जाने मगर जहाँ तक हमारी व्यक्तिगत राय है तो कोई भी सजा उसकी गलती के आधार पर ही निर्धारित होनी चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि सजा देने वाले की मा...
kumarendra singh sengar
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किसी घटना के सामने आने के बाद वैचारिकी उसी तरफ मुड़ जाती है या कहें कि तमाम विचार उसी घटना के इर्द-गिर्द भटकने लगते हैं. इन विचारों में पक्ष, विपक्ष जैसी स्थिति देखने को मिलने लगती है. विचार-विमर्श की दृष्टि से ऐसा होना गलत नहीं है मगर इसे लेकर विचार रखने वाले का आक...
ज्योति  देहलीवाल
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''ये दोस्ती, हम नहीं तोड़ेंगे, तोड़ेंगे दम मगर तेरा साथ ना छोड़ेंगे...'' शोले फिल्म के इस गाने को चरितार्थ किया हैं याकूब मोहम्मद ने। कोरोना के कारण जब सभी ओर से सिर्फ़ नकारात्मक ख़बरे देखने और सुनने मिल रही हैं, तब दिल को सुकून देती एक सकारात्मक ख़बर पढ़ी। याकूब ने बता द...
kumarendra singh sengar
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आज अभी-अभी बैठे-बिठाए हिन्दी फिल्म छिछोरे देखने को मिली. पूरी फिल्म तो नहीं बस अंत की लगभग बीस-पच्चीस मिनट की. इस फिल्म के बारे में सुन रखा था कि हॉस्टल लाइफ के बारे में है, कॉलेज की कहानी है मगर कभी देखने की न तो इच्छा हुई और न ही देखने का मौका लगा. ऐसा इसलिए क्यो...