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sanjiv verma salil
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दोहा दिवाली*मृदा नीर श्रम कुशलता, स्वेद गढ़े आकार।बाती डूबे स्नेह में, ज्योति हरे अँधियार।।*तम से मत कर नेह तू, झटपट जाए लील।पवन झँकोरों से न डर, जल बनकर कंदील।।*संसद में बम फूटते, चलें सभा में बाण।इंटरव्यू में फुलझड़ी, सत्ता में हैं प्राण।।*पति तज गणपति सँग पुजें, ल...
 पोस्ट लेवल : दोहा दिवाली
sanjiv verma salil
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दोहा गीत:दीपक लेकर हाथ*भक्त उतारें आरती,दीपक लेकर हाथ।हैं प्रसन्न माँ भारती,जनगण-मन के साथ।।*अमरनाथ सह भवानी,कार्तिक-गणपति झूम।चले दिवाली मनाने,भायी भारत-भूम।।बसे नर्मदा तीर पर,गौरी-गौरीनाथ।भक्त उतारें आरती,दीपक लेकर हाथ।।*सरस्वती सिंह पर हुईं,दुर्गा सदृश सवार।मेघद...
 पोस्ट लेवल : दोहा गीत
अरुण कुमार निगम
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"ग़ज़लनुमा दोहा छन्द"-इर्द गिर्द उनके फिरें, ऐसे वैसे लोगसम्मानित होने लगे, कैसे कैसे लोग ।।मूल्यवान पत्थर हुआ, हुए रत्न बेभावगुदड़ी में ही रह गए, हीरे जैसे लोग।।चन्दा लेकर हो रहा, प्रायोजित सम्मानवहाँ लुटाने जा रहे, अपने पैसे लोग।।कुछ हंसों के बीच में, बगुले भी रख सा...
 पोस्ट लेवल : "ग़ज़लनुमा दोहा छन्द"-
अरुण कुमार निगम
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दोहा छन्द - सम्मान मांगे से जो मिल रहा, वह कैसा सम्मान।सही अर्थ में सोचिये, यह तो है अपमान।।राजाश्रय जिसको मिला, उसे मिला सम्मान।किसे आज के दौर में, हीरे की पहचान।।आज पैठ अनुरूप ही, होता है गुणगान।अनुशंसा से मिल रहे, इस युग में सम्मान।।मूल्यांकन करता समय, कर्म न जा...
 पोस्ट लेवल : दोहा छन्द - सम्मान
sanjiv verma salil
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1मन में तू ही तू रमा, लागी मन में टेर।मुझमें मैं मरता गया, लगी नहीं कुछ देर।।2धीरज धारण कीजिए, धर मन में संतोष।सहज ही भर जाएगा, जीवन रूपी कोष।।3सच को धारण कीजिए,सच है ईश समान।भव सिंधु तर जाएगा,बाकी ईश विधान।।4झूठ कभी मत बोलना,झूठ है पाप समान।अपने मन में तोलना,करना...
sanjiv verma salil
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प्रात स्वागत*स्वाति-सलिल की बूँद को, सीपी की दरकार।पानी तब ही ले सके, मोती का आकार।।*त्रिगुणात्मकता प्रकृति का, प्राकृत सहज स्वभाव।एक तत्व भी न्यून तो, रहता शेष अभाव।।*छाया छा या शीश पर, कुहरा बरखा घाम।पड़े झेलना हो सखे!, पल में काम तमाम।।*वीतराग मिथलेश पर, जान जान...
 पोस्ट लेवल : दोहा प्रात स्वागत
sanjiv verma salil
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दोहा गीत-बंद बाँसुरी*बंद बाँसुरी चैन की,आफत में है जान।माया-ममता घेरकर,लिए ले रही जान।।*मंदिर-मस्जिद ने किया, प्रभु जी! बंटाधारयह खुश तो नाराज वह, कैसे पाऊँ पार?सर पर खड़ा चुनाव है,करते तंग किसान*पप्पू कहकर उड़ाया, जिसका खूब मजाकदिन-दिन जमती जा रही, उसकी भी अब धाकरोह...
 पोस्ट लेवल : दोहा गीत बंद बाँसुरी
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माता जी की कृपा से, मिला छन्द का दान।इसीलिए हूँ बाँटता, मैं दोहों में ज्ञान।१।--छोटी-छोटी बात पर, करते यहाँ विवाद।देते बालक-बालिका, कुल को बहुत विषाद।२।--जिसका नहीं इलाज कुछ, ऐसा है ये रोग।बिना विचारे खुदकुशी, कर लेते हैं लोग।३।--करते...
 पोस्ट लेवल : "विविध दोहावली" दोहे
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--कुलदीपक की सहचरी, घर का है आधार।बहुओं को भी दीजिए, बेटी जैसा प्यार।।-- बाबुल का घर छोड़कर, जब आती ससुराल।निष्ठा से परिवार तब, बहुएँ सहीं सम्भाल।।नहीं सुता से कम यहाँ, बहुओं का प्रतिदान।भेद-भाव को त्यागकर, उनको देना मान।।बहुओं से घर का चमन,...
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बेटी से आबाद हैं, सबके घर-परिवार।बेटो जैसे दीजिए, बेटी को अधिकार।।--चाहे कोई वार हो, कोई हो तारीख।दिवस सभी देते हमें, कदम-कदम पर सीख।।जगदम्बा के रूप में, जो लेती अवतार।उस बेटी से कीजिए, बेटो जैसा प्यार।।बेटी रत्न अमोल है, क...