ब्लॉगसेतु

sanjiv verma salil
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सॉनेटधीर धरकर•पीर सहिए, धीर धरिए।आह को भी वाह कहिए।बात मन में छिपा रहिए।।हवा के सँग मौन बहिए।।मधुर सुधियों सँग महकिए।स्नेहियों को चुप सुमिरिए।कहाँ क्या शुभ लेख तहिए।।दर्द हो बेदर्द सहिए।।श्वास इंजिन, आस पहिए।देह वाहन ठीक रखिए।बनें दिनकर, नहीं रुकिए।।असत् के आगे न झ...
sanjiv verma salil
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सॉनेटक्यों?*अघटित क्यों नित घटता हे प्रभु?कैसे हो तुम पर विश्वास?सज्जन क्यों पाते हैं त्रास?अनाचार क्यों बढ़ता हे विभु?कालजयी क्यों असत्-तिमिर है? क्यों क्षणभंगुर सत्य प्रकाश?क्यों बाँधे मोहों के पाश?क्यों स्वार्थों हित श्वास-समर है?क्यों माया की छाया भाती?क्यों का...
sanjiv verma salil
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सॉनेटशीत•पलट शीत फिर फिर है आती।सखी! चुनावी नेता जैसे।रँभा रहीं पगुराती भैंसे।।यह क्यों बे मौसम टर्राती।।कँपा रही है हाड़-माँस तक।छुड़ा रही छक्के, छक्का जड़।खड़ी द्वार पर, बन छक्का अड़।।जमी जा रही हाय श्वास तक।।सूरज ओढ़े मेघ रजाई।उषा नवेली नार सुहाई।रिसा रही वसुधा...
sanjiv verma salil
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सॉनेटसुतवधु *सुतवधु आई, पर्व मन रहा।गूँज रही है शहनाई भी।ऋतु बसंत मनहर आई सी।। खुशियों का वातास तन रहा।। ऊषा प्रमुदित कर अगवानी।रश्मिरथी करता है स्वागत। नज़र उतारे विनत अनागत।।  शुभद सुखद हों मातु भवानी।।जाग्रत धूम्रित श्वास वेदिका।&nbs...
आचार्य  प्रताप
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ये समस्त दोहे आज से ठीक एक वर्ष पूर्व लिखे गए थे | दोहे-------खड़े पंक्ति में हो गए , हाला की थी बात।राशन की होती अगर , बतलाते औकात।।०१।।--------पंक्ति बनाकर मौन सब , खड़े हुए चुपचाप।मधुशाला के सामने , देखो तुम्हीं प्रताप।।०२।।-------बड़े दिनों से बंद थे , मध...
 पोस्ट लेवल : doha दोहे दोहा dohe
आचार्य  प्रताप
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#दोहे-------जिस दिन युवा देश के , समझेगे निज पाथ**।संस्कृत अरु साहित्य को , लेंगे  हाथों-हाथ।।०१।।-----आज हमारी संस्कृति , रोती है निज देश।संस्कृत भाषा जा रही , देश छोड़ पर-देश।।०२।।-------पुरातनी  भाषी   यहाँ   ,   माँगे&nbs...
 पोस्ट लेवल : संस्कृत दोहे दोहा
आचार्य  प्रताप
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#दोहेजोगिरा  सारारारारा जोगिरा  सारारारारा -------------------------------------------नयन सरोवर सम प्रिये , रक्तिम अधर कपोल। केश सुसज्जित देखकर , मन जाता है डोल।।०१।।जोगिरा  सारारारारा जोगिरा  सारारारारा -------मृगनयनी मीन-आक्षी ,...
 पोस्ट लेवल : दोहे दोहा होली
ऋता शेखर 'मधु'
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दोहा गीतिकारंग बिरंगे पुष्प हैं, बगिया के आधार।मिलजुल कर मानव रहें, सुन्दर हो संसार।।तरह तरह की बोलियाँ, तरह तरह के लोग।मन सबका है एक सा, सुखद यही है सार।।मंदिर में हैं घण्टियाँ, पड़ता कहीं अजान।धर्म मज़हब कभी कहाँ, बना यहाँ दीवार।।दान पुण्य  से है धनी, अपना भार...
 पोस्ट लेवल : गीतिका छंद दोहा
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दोहा गीत--बात-बात पर हो रही, आपस में तकरार।भाई-भाई में नहीं, पहले जैसा प्यार।।(१)बेकारी में भा रहा, सबको आज विदेश।खुदगर्ज़ी में खो गये, ऋषियों के सन्देश।।कर्णधार में है नहीं, बाकी बचा जमीर।भारत माँ के जिगर में, घोंप रहा शमशीर।।आज देश में सब जगह, फैला भ्रष्टाचार।भाई...
sanjiv verma salil
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दोहा सलिला  रूप नाम लीला सुनें, पढ़ें गुनें कह नित्य।मन को शिव में लगाकर, करिए मनन अनित्य।।*महादेव शिव शंभु के, नामों का कर जाप।आप कीर्तन कीजिए, सहज मिटेंगे पाप।।*सुनें ईश महिमा सु-जन, हर दिन पाएं पुण्य।श्रवण सुपावन करे मन, काम न आते पण्य।।*पालन संयम-नियम का,...
 पोस्ट लेवल : दोहा शिव शिव दोहा