ब्लॉगसेतु

0
दोहा गीत--बात-बात पर हो रही, आपस में तकरार।भाई-भाई में नहीं, पहले जैसा प्यार।।(१)बेकारी में भा रहा, सबको आज विदेश।खुदगर्ज़ी में खो गये, ऋषियों के सन्देश।।कर्णधार में है नहीं, बाकी बचा जमीर।भारत माँ के जिगर में, घोंप रहा शमशीर।।आज देश में सब जगह, फैला भ्रष्टाचार।भाई...
sanjiv verma salil
0
दोहा सलिला  रूप नाम लीला सुनें, पढ़ें गुनें कह नित्य।मन को शिव में लगाकर, करिए मनन अनित्य।।*महादेव शिव शंभु के, नामों का कर जाप।आप कीर्तन कीजिए, सहज मिटेंगे पाप।।*सुनें ईश महिमा सु-जन, हर दिन पाएं पुण्य।श्रवण सुपावन करे मन, काम न आते पण्य।।*पालन संयम-नियम का,...
 पोस्ट लेवल : दोहा शिव शिव दोहा
sanjiv verma salil
0
सामयिक दोहेसंजीव*जो रणछोड़ हुए उन्हें, दिया न हमने त्यागकिया श्रेष्ठता से सदा, युग-युग तक अनुराग।*मैडम को अवसर मिला, नहीं गयीं क्या भाग?त्यागा था पद अटल ने, किया नहीं अनुराग।*शास्त्री जी ने भी किया, पद से तनिक न मोहलक्ष्य हेतु पद छोड़ना, नहिं अपराध न द्रोह।*केर-बेर न...
sanjiv verma salil
0
दोहा सलिला पूनम नम नयना लिए, करे काव्य की वृष्टि।पूर्णिमा रस ले बिखर, निखर रचे नव सृष्टि।।*प्रणय पत्रिका पूर्णिमा, प्रणयी मृग है चाँद।चंचल हिरणी ज्योत्सना, रही गगन को फाँद।।*http://divyanarmada.blogspot.in/
sanjiv verma salil
0
कार्यशालादोहा से कुंडलियासंजीव वर्मा 'सलिल', *पुष्पाता परिमल लुटा, सुमन सु मन बेनाम।प्रभु पग पर चढ़ धन्य हो, कण्ठ वरे निष्काम।।चढ़े सुंदरी शीश पर, कहे न कर अभिमान।हृदय भंग मत कर प्रिये!, ले-दे दिल का दान।।नयन नयन से लड़े, झुके मिल मुस्काता।प्रणयी पल पल लुटा, प...
sanjiv verma salil
0
शेर / द्विपदीमिलाकर हाथ खासों ने, किया है आम को बाहरनहीं लेना न देना ख़ास से, हम आम इन्सां हैंदोहा दुनिया *राजनीति है बेरहम, सगा न कोई गैर कुर्सी जिसके हाथ में, मात्र उसी की खैर *कुर्सी पर काबिज़ हुए, चेन्नम्मा के खास चारों खाने चित हुए, अम्मा जी के दास *दोहा देहरादू...
आचार्य  प्रताप
0
दोहे -----व्याकुल मन की वेदना , बन जाती है काव्य।निज पीड़ा जब-जब कहूँ, होती सदा सु-श्राव्य।।०१।।-----दृग से दृगजल शुष्क अब , गाँवों से अपनत्व।शहर गये जन-गण सभी , मेटे मौलिक तत्व।।०२।।------हम सुधरे सुधरा जगत , करें नवल नित शोध।जिस दिन फल इसका मिले , होगा प्राण...
Basudeo Agarwal
0
भरा पाप-घट तब हुआ, मोदी का अवतार।बड़े नोट के बन्द से, मेटा भ्रष्टाचार।।जमाखोर व्याकुल भये, कालाधन बेकार।सेठों की नींदें उड़ी, दीन करे जयकार।।नई सुबह की लालिमा, नई जगाये आश।प्राची का सूरज पुनः, जग में करे प्रकाश।।चोर चोर का था मचा, सकल देश में शोर।शोर तले जनता लखे, नव...
sanjiv verma salil
0
पुस्तक चर्चा: कालजयी छंद दोहा का मणिदीप "दोहा दीप्त दिनेश"चर्चाकार: प्रो. नीना उपाध्याय *आदर्शोन्मुखता, उदात्त दार्शनिकता और भारतीय संस्कृति की त्रिवेणी के पावन प्रवाह, सामाजिक जागरण और साहित्यिक सर्जनात्मकता से प्रकाशित मणिदीप की सनातन ज्योति है विश्ववाण...
आचार्य  प्रताप
0
कुछ साहित्य शब्द को लेकर दोहेलाख मना कर दो उन्हें ,माने ना आदेश।सुबह शाम क्यों भेजते ,शुभ मुहूर्त संदेश।।०१।।---साहित्यिक है यह पटल , चले बात साहित्य।साहित्यिक हर वस्तु से , बढ़ जाता लालित्य।।०२।।-------क्या-कैसे-क्यों कब कहें , समझ न पाते लोग।साहित्यक हर पटल का ,...
 पोस्ट लेवल : दोहे दोहा साहित्य