ब्लॉगसेतु

ऋता शेखर 'मधु'
112
दोहों का सामान्य शिल्प 13-11 का होता है।आंतरिक शिल्प के आधार पर दोहे 23 प्रकार के होते है।यह है तीसरा प्रकार...छंद विशेषज्ञ नवीन सी चतुर्वेदी जी के दोहे उदाहरणस्वरूप दिए गए हैं।उसी आधार पर मैंने भी कोशिश की है।शरभ दोहा20 गुरु और 8 लघु वर्ण22 2 11 2 12, 22 2 2 212 2...
 पोस्ट लेवल : दोहा छंद छंद दोहा
ऋता शेखर 'मधु'
112
दोहों के प्रकार पर कार्यशाला 2 - सुभ्रमर दोहादोहों के तेईस प्रकार होते है। वैसे 13-11के शिल्प से दोहों की रचना हो जाती है जिनमें प्रथम और तृतीय चरण का अंत लघु गुरु(12) से तथा द्वितीय और चतुर्थ चरण का अंत गुरु लघु(21) से होता है।दोहे में कुल 48 मात्राएँ होती हैं।आंत...
 पोस्ट लेवल : दोहा छंद छंद दोहा
ऋता शेखर 'मधु'
112
दोहों के प्रकार पर आज की कार्यशाला 1-भ्रमर दोहादोहों के तेईस प्रकार होते है। वैसे 13-11के शिल्प से दोहों की रचना हो जाती है जिनमें प्रथम और तृतीय चरण का अंत लघु गुरु से तथा द्वितीय और चतुर्थ चरण का अंत गुरु लघु से होता है।कुल 48 मात्राएँ होती हैं।किंतु आंतरिक शिल्प...
 पोस्ट लेवल : दोहा छंद छंद दोहा
ऋता शेखर 'मधु'
112
गुलमोहर खिलता गया, जितना पाया ताप |रे मन! नहीं निराश हो, पाकर के संताप |।१उसने रौंदा था कभी, जिसको चींटी जान।वही सामने है खड़ी, लेकर अपना मान।।२रटते रटते कृष्ण को, राधा हुई उदास।चातक के मन में रही, चन्द्र मिलन की आस।।३रघुनन्दन के जन्म पर, सब पूजें हनुमान।आखिर ऐसा क्...
sanjiv verma salil
5
पद छंद: दोहा.*मन मंदिर में बैठे श्याम।।नटखट-चंचल सुकोमल, भावन छवि अभिराम।देख लाज से गड़ रहे, नभ सज्जित घनश्याम।।मेघ मृदंग बजा रहे, पवन जप रहा नाम।मंजु राधिका मुग्ध मन, छेड़ रहीं अविराम।।छीन बंसरी अधर धर, कहें न करती काम।कहें श्याम दो फूँक तब, जब मन हो निष्काम।।चाह न...
 पोस्ट लेवल : पद दोहा छंद pad doha chhand
ऋता शेखर 'मधु'
112
प्रेम लिखो पाषाण पर, मन को कर लो नीर।बह जाएगी पीर सब, देकर दिल को धीर।।1मन दर्पण जब स्वच्छ हो, दिखते सुन्दर चित्र।धब्बे कलुषित सोच के, धूमिल करें चरित्र।।2मन के तरकश में भरे, बोली के लख बाण।छूटें तो लौटें नहीं, ज्यों शरीर के प्राण।।3अवसादों की आँधियाँ, दरकाती हैं भ...
 पोस्ट लेवल : दोहे दोहा छंद छंद दोहा
ऋता शेखर 'मधु'
112
जब छाए मन व्योम पर, पीर घटा घनघोर|समझो लेखन बढ़ चला, इंद्रधनुष की ओर||दिशा हवा की मोड़ते, हिम से भरे पहाड़।हिम्मत की तलवार से, कटते बाधा बाड़।।खुशी शोक की रागिनी, खूब दिखाते प्रीत। जीवन के सुर ताल पर, गाये जा तू गीत।।शब्द शब्द के मोल हैं, शब्द शब्द के बोल।मधुरिम बात व...
ऋता शेखर 'मधु'
112
दोहे1बहन रेशमी डोर को, खुद देना आकार |चीनी राखी त्याग कर, पूर्ण करो त्योहार||2महकी जूही की कली, देखन को शुभ भोरखग मनुष्य पादप सभी, किलक रहे चहुँ ओर3मन के भीतर आग है, ऊपर दिखता बर्फ़।अपने अपनों के लिए, तरल हुए हैं हर्फ़।।4ज्ञान, दान, मुस्कान धन, दिल को रखे करीब।भौतिक...
 पोस्ट लेवल : दोहा छंद छंद दोहा
ऋता शेखर 'मधु'
112
1.फूल शूल से है भरा दुनिया का यह पन्थचक्षु सीप में रच रहा बूँदों का इक ग्रन्थ2.ज्ञान डोर को थाम कर तैरे सागर बीचतंतु पर है कमल टिका छोड़ घनेरी कीच3.पहन सुनहरा घाघरा, आई स्वर्णिम भोरदेशवासियो अब उठो, सरहद पर है चोर4.तपी धरा वैशाख की आया सावन यादमन की पीर कौन गहे गुलम...
 पोस्ट लेवल : दोहा छंद छंद
ऋता शेखर 'मधु'
112
अपने गम को खुद सहो, खुशियाँ देना बाँटअर्पित करते फूल जब, कंटक देते छाँटये मिजाज़ है वक़्त का, गहरे इसके काजराजा रंक फ़कीर सब, किस विधि जाने राजदुख सुख की हर भावना, खो दे जब आकारवो मनुष्य ही संत है, रहे जो निर्विकारदरिया हो जब दर्द का, रह रह भरते नैनहल्की सी इक ठेस भी,...