दोहा दुनिया*जब तक मन उन्मन न हो, तब तक तन्मय हो नशांति वरण करना अगर, कुछ अशान्ति भी बो न*तब तक कुछ मिलता कहाँ, जब तक तुम कुछ खो न.दूध पिलाती माँ नहीं, बच्चा जब तक रो न.*खोज-खोजकर थक गया, किंतु मिला इस सा न.और सभी कुछ मिला गया, मगर मिला उस सा न.*बहुत हुआ अब मानिए, र...
 पोस्ट लेवल : doha दोहा लीक से हटकर