ब्लॉगसेतु

0
--कोरोना के काल में, ऐसी मिली शिकस्त।महँगाई ने कर दिये, कीर्तिमान सब ध्वस्त।।--ईंधन महँगा हो रहा, जनता है लाचार।बिचौलियों के सामने, बेबस है सरकार।।--दोनों हाथों से रहे, दौलत लोग समेट।फिर भी भरता है नहीं, उनका पापी पेट।।--दुख आये या सुख मिले, रखना मृदु...
0
--वासन्ती मौसम हुआ, सुधर रहे हैं हाल।सूर्यमुखी ऐसे खिला, जैसे हो पिंजाल*।।--शैल-शिखर पर कल तलक, ठिठुरा था सिंगाल*।सूर्य-रश्मियाँ कर रहीं, उनको आज निहाल।।--राजनीति में बन गये, बगुले आज मराल।सन्तों का चोला पहन, पनप रहे पम्पाल*।--हिंसा के परिवेश में, सिं...
 पोस्ट लेवल : दोहे सिंह बने शृंगाल
jaikrishnarai tushar
0
 चित्र -साभार गूगल आस्था और प्रेम के दोहे तम के आँगन को मिले पावन ज्योति अमन्द  केसर ,चन्दन शुभ लिखें घर -घर हो मकरंद हे मैहर की शारदा हे विन्ध्याचल धाम मेरी पावन आस्था करती रहे प्रणाम सरयू उठकर भोर में जपती सीताराम वंशी...
0
--मात-पिता के चरण छू, प्रभु का करना ध्यान।कभी न इनका कीजिए, जीवन में अपमान।१।--वासन्ती मौसम हुआ, काम रहा है जाग।बगिया में गाने लगे, कोयल-कागा राग।२।--लोगों ने अब प्यार को, समझ लिया आसान।अपने ढंग से कर रहे, प्रेमी अनुसंधान।३।--खेल हुआ अब प्यार का, आडम्बर से युक...
0
आलिंगन-दिवस (हग-डे)--आलिंगन के दिवस में, करना मत व्यतिपात।कामुकता को देखकर, बिगड़ जायेगी बात।।--आलिंगन के दिवस पर, लिए अधूरी प्यास।छोड़ स्वदेशी सभ्यता, कामी आते पास।--अपनाओ निज सभ्यता, छोड़ विदेशी ढंग।आलिंगन के साथ हो, जीवनभर का संग।।--पश्चिम के परिव...
 पोस्ट लेवल : कामी आते पास दोहे
0
--आया है ऋतुराज अब, समय हुआ अनुकूल।बौराये हैं पेड़ भी, पाकर कोमल फूल।।--टेसू अंगारा हुआ, खेत उगलते गन्ध।सपने सिन्दूरी हुए, देख नये सम्बन्ध।।--पंछी कलरव कर रहे, देख बसन्ती रूप।शाखा पर बैठे हुए, सेंक रहे हैं धूप।।--सरसों फूली खेत में, गेहूँ करे किलोल।कानों में पड़ने...
 पोस्ट लेवल : देख बसन्ती रूप दोहे
0
--भोली चिड़ियों के लिए, लाये नये रिवाज़।चॉकलेट को चोंच में, लेकर आये बाज़।।--रंग पश्चिमी ढंग का, अपना रहा समाज।देते मीठी गोलियाँ, मित्रों को सब आज।।--मन में भेद भरा हुआ, मुख में भरा मिठास।कृत्रिम सुमनों में भला, होगी कहाँ सुवास।।--जहाँ...
0
--दरक रहे हैं ग्लेशियर, सहमा हुआ पहाड़।अच्छा होता है नहीं, कुदरत से खिलवाड़।।--प्रान्त उत्तराखण्ड में, सहम गये हैं लोग।हठधर्मी विज्ञान की, आज रहे हम भोग।।--कुदरत के परिवेश से, जब-जब होती छेड़।देवताओं के कोप से, होती तब मुठभेड़।।--कृत्रिम बाँध खुदान से...
 पोस्ट लेवल : सहमा हुआ पहाड़ दोहे
0
--पश्चिम के अनुकरण का, बढ़ने लगा रिवाज। प्रेमदिवस सप्ताह का, दिवस दूसरा आज।।--कल गुलाब का दिवस था, आज दिवस प्रस्ताव।लेकिन सच्चे प्रेम का, सचमुच दिखा अभाव।।--राजनीति जैसा हुआ, आज प्रणय का खेल।झूठे हैं प्रस्ताव सब, झूठा मन का मेल।।--मिला...
0
--रोज-रोज आता नहीं, प्यारा दिवस गुलाब।बाँटों महक गुलाब सी, सबको आज ज़नाब।।--प्रणय-प्रीत के प्रथम दिन, बाँट रहा मुस्कान।सह कर पीर गुलाब-गुल, कभी न होता...