ब्लॉगसेतु

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--खोटी जब तकदीर हो, खोटी हों तकरीर।कठमुल्लाओं की पड़ी, खतरे में जागीर।।--नहीं चलेगी मौलवी, मुल्लाओं की घात।शैतानों की देश में, बिगड़ रही औकात।।--देशद्रोह जो कर रहे, कुछ मुल्लाह-इमाम।उनकी सारी सम्पदा, कर दो अब नीलाम।।--नहीं मिलेगी हाट में, इन्सानियत-तमीज।बाँध ल...
 पोस्ट लेवल : दोहे मुल्लाओं की घात
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--देशभक्ति का हो रहा, पग-पग पर अवसान।सब अपने ही नाम का, करते हैं गुणगान।।--देशभक्ति के हो रहे, रंग आज बदरंग।जनहित के कानून को, लोग कर रहे भंग।।--देशभक्ति का मत करो, कभी कहीं उपहास।देख आपदा काल को, घर में करो निवास।।--तबलीगी मरकज बना, भारत में शैतान।देश...
 पोस्ट लेवल : दोहे देशभक्ति का जाप
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--कोरोना से खुद बचो, और बचाओ देश।लिखकर सबको भेजिए, दुनिया में सन्देश।।--जाकर कभी समूह में, करना मत घुसपैठ।लिखना-पढ़ना कीजिए, अपने घर में बैठ।।--अनजाने इस रोग से, घबड़ा रहा समाज।कोरोना से त्रस्त है, पूरी दुनिया आज।।--घोर आपदा काल में, धीरज रखना आप।एकल होकर कीजिए,...
 पोस्ट लेवल : दोहे धीरज रखना आप
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-- मात शारदे को कभी, मत बिसराना मित्र।मेधावी मेधा करे, उन्नत करे चरित्र।१।--कल तक जो बैरी रहे, आज बन गये मित्र।अच्छे-अच्छों के यहाँ, बिकते रोज चरित्र।२।--भावनाओं के वेग में, बह मत जाना मित्र।रखना हर हालात में, अपने साथ चरित्र।३। --आचरण में रहे, उज्जवल चित्र...
भावना  तिवारी
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--रंग-मंच है जिन्दगी, अभिनय करते लोग।नाटक के इस खेल में, है संयोग-वियोग।।--विद्यालय में पढ़ रहे, सभी तरह के छात्र।विद्या के होते नहीं, अधिकारी सब पात्र।।--आपाधापी हर जगह, सभी जगह सरपञ्च।।रंग-मंच के क्षेत्र में, भी है खूब प्रपञ्च।।--रंग-मंच भी बन गया, जीवन का जंजाल।...
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--कोरोना के रोग से, जूझ रहा है देश।अगर सुरक्षित आप हैं, बचा रहेगा देश।।--आवश्यकता से अधिक. करना नहीं निवेश।हम सबके सहयोग से, सुधरेगा परिवेश।।--कमी नहीं कुछ देश में, सुलभ सभी हैं चीज।मगर नहीं लाँघो अभी, निज घर की दहलीज।।--विपदा के इस काल में, शासन...
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--जीवन संकट में पड़ा, समय बड़ा विकराल।घूम रहा है जगत में, कोरोना बन काल।।--आवाजाही बन्द है, सड़कें हैं सुनसान।कोरोना का हो गया, लोगों को अनुमान।।--हालत की गम्भीरता, समझ गये हैं लोग।जनता अब करने लगी, शासन का सहयोग।।--घर में बैठे कीजिए, पाठन-पठन वि...
 पोस्ट लेवल : दोहे समय बड़ा विकराल
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--मर्यादा के साथ में, खूब मनाओ हर्ष।स्वच्छ रहे परिवेश तो, होगा मंगल वर्ष।।--नवसम्वतसर में हुए, चौपट कारोबार।कोरोना के रोग से, जूझ रहा संसार।।--माता के नवरात्र में, करो नियम से काम।घर को मन्दिर समझकर, जपो ओम का नाम।।--बाधाएँ सब दूर हों, करो न मेल मिलाप।अप...
 पोस्ट लेवल : दोहे नवसम्वतसर 2077
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--कोरोना को देख कर, बना रहे जो बात।वो ही देश-समाज को, पहुँचाते आघात।।--अच्छे कामों का जहाँ, होने लगे विरोध।आता देश समाज को, ऐसे दल पर क्रोध।।--मुखिया जिस घर में नहीं, होता है दमदार।समझो उस परिवार का, निश्चित बण्टाधार।। --मुखिया ने मझधार में, छोड़ी...
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--कोरोना से मच रहा, जग में हाहाकार।एतिहात सबसे बड़ा, ऐसे में उपचार।।--सेनीटाइज से करो, स्वच्छ सभी घर-बार।बन्द कीजिए कुछ दिवस, अपने कारोबार।।--नहीं आ सका है अभी, कोरोना का तोड़।अपने घर में ही रहो, भीड़-भाड़ को छोड़।।--खाना अब तो छोड़ दो, मछली गोश्त-...