ब्लॉगसेतु

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--दुनिया में देखे बहुत, हमने जहाँपनाह।उल्लू की होती जिन्हें, कदम-कदम पर चाह।।--उल्लू करते हों जहाँ, सत्ता पर अधिकार।समझो वहाँ समाज का, होगा बण्टाधार।।--खोज रहें हों घूस के, उल्लू जहाँ उपाय।फिर ऐसी सरकार में, कैसे होगा न्याय।।-- दिनभर जो सोता रहे, जागे पूर...
 पोस्ट लेवल : दोहे उल्लू की है जात
sanjiv verma salil
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एक दोहा छठ पूजन कर एक दिन, शेष दिवस नाबाददूध छठी का कराती, गृहस्वामी को याद अनपढ़ पढ़ता अनलिखा, समझ-बूझ चुपचाप.जीवन पुस्तक है बडी, अक्षर-अक्षर आप.*छठ के दोहे*छठ पूजन कर एक दिन, शेष दिवस नाबाददूध छठी का कराती, गृहस्वामी को याद*हरछठ पर 'हऱ' ने किए...
 पोस्ट लेवल : दोहे छठ
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--खींचातानी में हुआ, मोह आपसी भंग। नूरा-कुश्ती देखकर, लोग रह गये दंग।।--राजनीति का देश में, इतना बढ़ा खुमार।सत्ता पाने के लिए, होती मारामार।।--दशकों से दोनों रहे, सुख-दुख में थे साथ।लेकिन कुरसी के लिए, छोड़ दिया अब हाथ।।--नेक-नीति के साथ में, दोनों लड़े चुनाव।...
 पोस्ट लेवल : दोहे गठबन्धन की नाव
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--कातिक की है पूर्णिमा, सजे हुए हैं घाट।सरिताओं के रेत में, मेला लगा विराट।।--एक साल में एक दिन, आता है त्यौहार।बहते निर्मल-नीर में, डुबकी लेना मार।।--गंगा तट पर आज तो, उमड़ी भारी भीड़।लगे अनेकों हैं यहाँ, छोटे-छोटे नीड़।।--खिचड़ी गंगा घाट पर, लोग पकाते आज।जितने भी...
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--न्याय मिला श्री राम को, न्यायालय से आज।अब मन्दिर निर्माण का, पूरा होगा काज।।-- दोनें पक्षों को मिला, उनका अब अधिकार।मन्दिर-मस्जिद को दिया, धरती का उपहार।।-- भव्य बने मन्दिर वहाँ, मस्जिद आलीशान।अलग-अलग भू पर बने, पूजा-सदन महान।। --धर्मों के दरम्...
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--न्यायालय तो साक्ष्य पर, करता सोच-विचार।आये जो भी फैसला, करो उसे स्वीकार।।--देते हैं सन्देश ये, गीता और कुरान।आपस में लड़ते नहीं, राम और रहमान।।--नहीं किसी की हार है, नहीं किसी की जीत।सत्य-तथ्य से है बँधा, होता काल-अतीत।।--सारी दुनिया जानती, भारत के थे राम।मच...
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--जिस बालक का ईश पर, था अनुराग अनन्य।उस नानक के जन्म से, देश हो गया धन्य।।--जाते हैं करतारपुर, जत्थों में सिख लोग।आया सत्तर साल में, आज सुखद संयोग।।--सरिताओं में बह रहा, अब तो पावन नीर।गंगा में डुबकी लगा, निर्मल करो शरीर।।--नदी-झील मिट गया, अब तो सारा पं...
 पोस्ट लेवल : आज सुखद संयोग दोहे
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--देते मुझको हौसला, कदम-कदम पर मीत।बन जाते हैं इसलिए, ग़ज़लें, दोहे-गीत।।-- शब्द और व्याकरण का, मुझे नहीं कुछ ज्ञान।इसीलिए करता नहीं, मैं झूठा अभिमान।।-- टंकण कर लेता तभी, जब आते कुछ भाव।शब्दों में करता नहीं, जोड़-तोड़ बदलाव।। --गीत-ग़ज़ल दो...
 पोस्ट लेवल : लिखने का है रोग दोहे
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--छठपूजा का आ गया, फिर पावन त्यौहार।माता जन-गण के हरो, अब तो सभी विकार।।--लोग छोड़कर आ गये, अपने-अपने नीड़।सरिताओं के तीर पर, लगी हुई है भीड़।।--अस्तांचल की ओर जब, रवि करता प्रस्थान।छठ पूजा पर अर्घ्य तब, देता हिन्दुस्थान।।--परम्पराओं पर टिका, सारा कारोबार।मान्यताओं...
 पोस्ट लेवल : दोहे षष्टी मइया
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साथ निभाती नार जल का संचय कीजिए, करना जल का पान। जल होता अनमोल है, जल को  जीवन जान।। जीवन के हर राह में ,साथ निभाती नार। बनकर...