ब्लॉगसेतु

girish billore
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Anand Dwivedi
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बावरी हुई है मातु प्रेम प्रेम बोलि रहीतीन लोक डोलि डोलि खुद को थकायो हैगायो नाचि नाचि कै हिये की पीर बार बारप्रेम पंथ मुझ से कपूत को दिखायो है भसम रमाये एकु जोगिया दिखाय गयोकछु न सुहाय हाय जग ही भुलायो हैधाय धाय चढ़त अटारी महतारी मोरिछोड़ि...
 पोस्ट लेवल : दोहे -छंद
संतोष त्रिवेदी
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गरम हवा अगिया रही,बरस रहे अंगार !चैत महीना हाल यह,आगे हाहाकार !!(१)सूरज हमसे दूर हो,चंदा आए पास !पंछी पानी ढूँढते,नहीं बुझाती प्यास !!(२)पकी फसल को चूमता,हँसिया लिए किसान !माथे पर चिंता लदी,बिटिया हुई जवान !!(३)सोना गिरे बजार में,हरिया मुख-मुस्कान !गेहूँ सोन...
 पोस्ट लेवल : गर्मी कविता दोहे
shashi purwar
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दोहे --- गंगा जमुना भारती ,सर्व गुणों की खान मैला करते नीर को ,ये पापी इंसान . सिमट रही गंगा नदी ,अस्तित्व का सवाल कूड़े करकट से हुआ ,जल जीवन बेहाल . गंगा को पावन करे , प्रथम यही अभियान जीवन जल निर्मल बहे ,सदा करें सम्मान . कुण्डलियाँ ----- गंगा जमुना भारती ,सर...
 पोस्ट लेवल : कुण्डलियाँ दोहे
संतोष त्रिवेदी
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कुण्डलियाँफागुन गच्चा दे रहा,रंग रहे भरमाय। आँगन में तुलसी झरे,आम रहे बौराय।। आम रहे बौराय,नदी-नाले सब उमड़े। सुखिया रहा सुखाय,रंग चेहरे का बिगड़े।। सजनी खम्भा-ओट , निहारे फिर-फिर पाहुन। अपना होकर काट रहा ये बैरी फागुन।।(१)होली में देकर दगा,गई हसीना भाग ,पिचकारी...
shashi purwar
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छंद ----दोहे ----पोस्ट गलती से डिलीट होने की वजह से पुनः प्रेषित कर रही हूँ .1लुभा रहे है छंद ,मन ,मुश्किल में तलवारघिस घिस कर कागज़ कलम,जीत लिया संसार।2आज छंद से मिल गया , रचना को आकार डूब गयी रस में कलम हुआ नया शृंगार3भोर स्वप्न वह देखकर ,भोरी हुई विभोरफूलो क...
 पोस्ट लेवल : दोहे .
girish billore
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 पोस्ट लेवल : दोहे
अरुण कुमार निगम
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मौसम के दोहे...जाने  को  है  शिशिर  ऋतु , आने को ऋतुराजआग जला कर झूम लें,हम तुम मिलकर आज ||सूर्य   उत्तरायण   हुए  ,  मकर  –  संक्रांति पर्वजन्में   भारत  -  देश  में ,  हमें...
अरुण कुमार निगम
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कार्तिक अगहन पूस ले, आता जब हेमन्तमन की चाहत सोचती, बनूँ निराला पन्त |शाल गुलाबी ओढ़ कर, शरद बने हेमंत |शकुन्तला को  ढूँढता , है मन का दुष्यन्त |कोहरा  रोके  रास्ता , ओस  चूमती देहलिपट-चिपट शीतल पवन,जतलाती है नेह |ऊन बेचता हर गली , जलता हुआ अल...
 पोस्ट लेवल : हेमन्त ऋतु के दोहे
संतोष त्रिवेदी
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  दिया जले बाज़ार में,हरिया घर अंधियार । महलों की फुलझड़ी से ,वो पाए उजियार  ।१।  दीवाली रोशन करे,उम्मीदों के दीप। सुखिया मोती ढूँढता,खाली मिलता सीप ।२।सजनी बाती बाल के,जले नेह के संग । जाने कब वो आएँगे,सुलग रहे सब अंग ।३।&nbs...