ब्लॉगसेतु

सरिता  भाटिया
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भीगा भीगा है समय,पहली है बरसात।मानसून लो आ गया ,भीगे हैं जज्बात।।सारी धरती खिल उठी ,खुश है आज विशेष सावन की बौछार से ,रहा नहीं दुख शेष ||चमक दामिनी देखती ,धरती का क्या हाल सूखा कुछ अब ना रहा , बरखा किया निहाल ||अन्नदाता किसान के, नैनों में थी पीर  मा...
 पोस्ट लेवल : दोहे मानसून छंद सावन
सरिता  भाटिया
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पति पत्नी यूँ आजकल, करते हैं गुड फील।रिश्ते हैं सब नाम के, होती केवल डील।।बेटा कहता बाप से ,फ्यूचर मेरा डार्क। रास न आये इण्डिया ,जाना है न्यूयार्क।।बेटी कहती माँ सुनो,तुम तो रही गँवार।पढ़ लिख कर हम क्यों भला ,समय करें बेकार।।मात पिता देते सदा,जिनको आशीर्वाद।वृ...
सरिता  भाटिया
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ईश्वर की लीला अगम , कैसा यह आषाढ़ सूखा देखा है कहीं, और कहीं है बाढ़ |१|सूखा बीता जेठ है, सूखा है आषाढ़ हलधर चाहे मेघ से ,रहम नेह की बाढ़ |२|मेघा दिखते ना कहीं, तक तक सूखे नैन सूरज छुप जा तू कहीं, मिले ह्रदय को चैन |३|हरियाली गायब हुई , गायब है बौछार&nbs...
 पोस्ट लेवल : दोहे आषाढ़ छंद सूखा
Nikhil Jain
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दोस्तों "कबीरा अहंकार मत कर"  कबीर जी के कुछ दोहें है ,जिसमे कबीर जी ने मनुष्य के अहंकारी स्वभाव और अपने आप पर बढ़पन करने पर व्यंग्य कसा है। जैसा की मैंने अपनी पिछली Post में कबीर जी के दोहों का विस्तार से वर्णन करने का प्रयास किया था ,जिससे उन दोहों की गहरा...
Nikhil Jain
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दोस्तों आप सभी लोगों ने कबीर जी के दोहे बहुत बार पढ़े-सुने होंगे। उनके दोहों के अर्थ भी पढ़े-सुने होंगे। परन्तु मैंने उनके दोहे का विस्तार से अर्थ स्पष्ट करने का प्रयतन किया है। क्यूंकि बहुत से उनके दोहे ऐसे है जिनका अर्थ शब्दों की गहराई में छुपा हुआ होता है और कई बा...
shashi purwar
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१ लहक उठी है जेठ की,  नभ में उड़ती धूलकालजयी अवधूत बन, खिलते शिरीष फूल। २चाहे जलती धूप हो, या मौसम की मारहँस हँस कर कहते सिरस, हिम्मत कभी न हार.३लकदक फूलों से सजा, सिरसा छायादारमस्त रहे आठों पहर, रसवंती संसार।४हरी भरी छतरी सजा, कोमल पुष्पित जाल  ...
 पोस्ट लेवल : दोहे
सुशील बाकलीवाल
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पानी में गुड डालिए, बीत जाए जब रात,सुबह छानकर पीजिए, अच्छे हों हालात !धनिया की पत्ती मसल, बूंद नैन में डार,दुखती अँखियां ठीक हों, पल लागे दो-चार !ऊर्जा मिलती है बहुत, पिएं गुनगुना नीर,कब्ज खतम हो पेट की, मिट जाए हर पीर !प्रातः काल पानी पिएं, घूंट-घूंट कर आप,बस दो-त...
सरिता  भाटिया
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आरक्षण का भूत फिर,लाया है भूचाल।भूले सब इंसानियत, बुनते हैं नित जाल।। आरक्षण की रेवड़ी ,ले घूमें चहुँ ओर |मौसेरे भाई सभी ,और सभी हैं चोर || भारत मेरा जल रहा , कैसा मचा बवाल।नेता देखें वोट को ,जनता है बेहाल।।आरक्षण के नाम से,बाँटो मत अब देश |यहाँ बसें इंसान...
 पोस्ट लेवल : दोहे आरक्षण छंद
sahitya shilpi
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jaikrishnarai tushar
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कवि -राजेश कुमार दोहा संग्रह -बिटिया तुलसी दूब है हिंदी काव्य संसार में दोहों की जोरदार वापसी हुई है यह एक काव्य की पुरानी विधा है और हिंदी के बड़े नामचीन कवियों ने बहुत ही अच्छे दोहे कहें हैं |लेकिन इलाहाबाद के कवि भाई राजेश कुमार के दोहे बेजोड़ हैं |एक ही...