ब्लॉगसेतु

सरिता  भाटिया
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रूप शैलपुत्री धरो ,मात विराजो आज।मन से करते अर्चना , पूरण करना काज।।प्रथम दिवस नवरात्र का ,आश्विन का है मास ।तन मन निर्मल नित करो,शुरू हुए उपवास।।माँ दुर्गा का दूसरा, ब्रह्मचारिणी रूप।फूल चढ़ा अर्चन करो , लिए साथ में धूप।।निर्मल चित से ध्यान कर ,लो चरणों की धूल।सभी...
सरिता  भाटिया
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एक बरस के बाद फिर, अक्टूबर  का मास।जन्मदिवस पर आपके ,खुशियाँ लाया खास।।रहो दुआओं में सदा , पाओ आशीर्वाद ।खुशियों से झोली भरे,रहो सदा आबाद।।माँ की ममता का मिले ,उचित तभी ईनाम ।कुल के दीपक तुम बनो ,करो जगत में नाम।।माँ बेटे का इस जग में ,बन्धन है बेजोड़ ।ईश्वर आश...
सरिता  भाटिया
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सुख में देते साथ सब ,दुख में तोड़ें प्रीत |दुख में देते साथ जो ,वो ही सच्चे मीत ||जीवन में रहता नहीं ,समय सदा अनुकूल |धीरज धरना तुम अगर, समय मिले प्रतिकूल ||समय फिसलती रेत है, मुट्ठी चाहे बंद हाथ धरे बैठा रहा, किन्तु समय पाबंद ||दिन बदले है समय से ,रात समय अनुस...
 पोस्ट लेवल : दोहे छंद प्रीत समय
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19 सितम्बर, 2015 कोमेरे अभिन्न मित्र स्व. देवदत्त 'प्रसून' कीप्रथम काव्यकृति'झरी नीम की पत्तियाँ'का विमोचन पीलीभीत में हुआ।इस अवसर पर मैंने अपने मित्र को निम्न  दोहों के साथ श्रद्धासुमन अर्पित किये।--चार दशक तक रहा था, साथ आपका मित्र।लेकिन अब तो रह गया, म...
सरिता  भाटिया
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पर्यूषण दोहे पर्यूषण का पर्व है ,रोज भजो नवकार |अंतरमन को शुद्ध कर ,होंगे दूर विकार ||महामंत्र नवकार है ,सुनना सुबह शाम |सबसे अच्छे पर्व का, पर्यूषण है नाम ||आठ दिनों तक जैन सब , करते हैं उपवास |देता है शुभ प्रेरणा ,सदा भाद्रपद मास ||'अटाई' के पर्व में ,करें न...
सुबोध  श्रीवास्तव
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विनोद शाही की कलाकृति हिन्दी का संसारभाषाओं में श्रेष्ठ है, प्रचुर ज्ञान भंडार।सरस, सहज, मोहक लगे, हिन्दी का संसार॥हिन्दी तो है हिन्द के, गौरव की पहचान।हिन्दी को स्नेह दें, न मिटने दें शान॥सुनने में मीठी लगे,बोलन में आसान।जन को जन से जोड़ती, हिन्दी मातृ समान॥च...
 पोस्ट लेवल : दोहे
शालिनी  रस्तौगी
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 शातिर दो नैना बड़े, लड़ें मिलें दिन रैन|नैनन के इस मेल में, जियरा खोवे चैन||पाती अँसुवन से लिखी, बदरा पर दिन-रात|पवन पीया तक ले गई, बरस सुनाई बात ||
 पोस्ट लेवल : दोहे
सरिता  भाटिया
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खुशियों से दामन खिला, हुआ सुखद अहसास हर्ष जन्मदिन आपका, ममता का दिन ख़ास ||सुख से बीती रैन है ,खुशियाँ लाई भोर ममता बंधन प्रेम का ,यह है पक्की डोर ||नाम ऊँचा जग में करो ,बनी रहे यह शान खिलते पुष्पों की तरह, खिले सदा मुस्कान ||ईश्वर का तुम साथ ले ,करना...
सरिता  भाटिया
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आरक्षण की मांग ले ,आया पाटीदार साथ युवाओं को लिया ,बना आज सरदार ।आरक्षण तो चाहिए ,कहता एक पटेलसकते में सरकार भी ,बना रहा है रेल |हमें हमारा चाहिए ,हक़ से सब सम्मान वरना आता छीनना ,जागा हिंदुस्तान |भीख नहीं हक़ माँगते ,कहता एक पटेलखेलो नेताओ नहीं ,अभी सियासी...
 पोस्ट लेवल : दोहे पटेल आरक्षण छंद
सुबोध  श्रीवास्तव
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चित्र गूगल सर्च इंजन से साभारजीवन का विस्तारयुग-युग से हर बाग का, ये ही एक उसूलजिसको हँसना आ गया वो ही मट्टी फूलपंछी मानव, फूल, जल, अलग-अलग आकारमाटी का घर एक ही, सारे रिश्तेदारचिड़ियों को चहकाकर दे, गीतों को दे बोलसूरज बिन आकाश है, गोरी घूँघट खोलचीखे घर के द्वार की...
 पोस्ट लेवल : दोहे