ब्लॉगसेतु

भावना  तिवारी
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मेरे कुछ दोहेतुलसी ने मानस रचा, दिखी राम की पीर।बीजक की हर पंक्ति में, जीवित हुआ कबीर।1।--माँ के छोटे शब्द का, अर्थ बड़ा अनमोल।कौन चुका पाया भला, ममता का है मोल।2।--भक्ति,नीति अरु रीति, की विमल त्रिवेणी होय।कालजयी मानस सरिख , ग्रंथ न दूजा कोय।3।--...
सरिता  भाटिया
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अगर  लुटाया मात ने ,हद से ज्यादा प्यार  पिता सदा चुपचाप ही ,करते रहे  दुलार ||अर्थ सिखाया आपने ,तुतलाते थे बोलसीखा हमने आपसे ,अच्छाई का मोल ||बैठ कंधे पर तात के ,देखा सब संसार समझा उनकी सीख से ,सब जग का व्यवहार ||  चलना सीखा आपसे ,उँगली पकड़...
 पोस्ट लेवल : छंद पिता दोहे
अरुण कुमार निगम
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अब स्वभाव से हो रहा, हर मौसम प्रतिकूल बेटा   तू    बैसाख   में  , सावन   झूला   झूल ||अपनी फेसबुक में मैंने अपने पोते के फोटो पर एक दोहा लिख कर मित्रों से अनुरोध किया था कि दोहे में अपनी प्रतिक्रया डालें. यह कार्य दो मई से ए...
अरुण कुमार निगम
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सुख तेरे मन में  छुपा , बाहर मत तू खोज ।सुविधाओं को त्याग कर,खुशी मना हर रोज ।।अपनी फेसबुक में मैंने दिनांक ०२ मई २०१५ को इस फोटो पर एक दोहा लिख कर मित्रों से अनुरोध किया था कि दोहे में अपनी प्रतिक्रया डालें. मित्रों का सराहनीय सहयोग मिला. आइये आप भी इन दोहों...
 पोस्ट लेवल : चित्र एक-दोहे अनेक
शालिनी  रस्तौगी
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धरती माँ की कोख में, पनप रही थी आस |अग्नि बन नभ से बरसा, इंद्रदेव का त्रास ||व्याकुल हो इक बूँद को, ताके कभी आकास|कभी बरसते मेह से, टूटे सारी आस ||
 पोस्ट लेवल : दोहे
सरिता  भाटिया
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मात महागौरी सदा ,देती है सुख शांति श्वेत वर्ण धारण किया ,मुख से झलके कांति |पूजा का नौवां दिवस , माँ का रूप विशेष मात सिद्दिदात्री हरे ,कष्ट रोग और द्वेष |माँ दुर्गा का रूप यह, देता बोध औ' ज्ञान निष्ठा से हो साधना, देती है सम्मान |****
सरिता  भाटिया
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स्कंदमात है पांचवां , शक्ति रूप का नाम द्वार मोक्ष का हो सुलभ, करना ऐसे काम |छठा रूप कात्यायनी ,हरता सब संताप करो मात कीआराधना ,मिट जायेंगे पाप |कालरात्रि माँ सातवीं , करती कृपा अपार मात कृपा से सिद्धि के, खुल जाते सब द्वार |ह्रदय भरे प्रकाश से , ऐसा...
 पोस्ट लेवल : नवरात्रि छंद दोहे
सरिता  भाटिया
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मात चंद्रघंटा बनी , आज तीसरी शक्ति शांतिदायक रूप की ,करो आप भी भक्ति अर्ध चन्द्र है माथ पर, घंटे का आकार करते हैं इस रूप की ,उपासना नर नार कुष्मांडा माँ पूजते, चतुर्थ दिन के रोज दीर्घ आयु बल बुद्धि से ,बढे मनुज का ओज यश समृद्धि में वृद...
सरिता  भाटिया
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शैलपुत्री के रूप की ,पूजा करना आज बन जायेंगे आपके ,सारे बिगड़े काज  |एक हाथ में कमल है , दूजे में त्रिशूल  कृपा दृष्टि मैया धरो ,दो चरणों की धूल |माँ दुर्गा का दूसरा , ब्रह्मचारिणी रूप  भव्य रूप से मात के ,ढले कष्ट की धूप|तप संयम से ही सदा ,होती...
सरिता  भाटिया
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कच्चे धागे प्रीत के ,कोई सके न तोड़है अदृश्य बंधन मगर,दें बंधन बेजोड़ |देता आशीर्वाद है ,मात पिता का प्यार जिस धागे से हम बँधे,ममता की वो तार | कच्चा धागा है मगर, लाया सच्ची प्रीत  बहन सूत्र है बाँधती,गाती मंगल गीत |पति पत्नी जिससे बँधे, कहें डोर विश्व...
 पोस्ट लेवल : छंद डोर धागा दोहे