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शालिनी  रस्तौगी
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सज्जित सोलह कला शशि, खिला पक्ष था  कृष्ण |किया उजाला जगत को, दुनिया कहती कृष्ण ||
 पोस्ट लेवल : दोहे
शालिनी  रस्तौगी
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 पोस्ट लेवल : दोहे
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--उग्रवाद-अलगाव का, किया सही उपचार।अपने भारत पर किया, मोदी ने उपकार।।--हारी कट्टरपन्थियाँ, जीत गई सरकार।।दो हजार उन्नीस में, दिये कई उपहार।।--साहस करके देश पर, किया बहुत उपकार।जो दशकों की गल्तियाँ, उनको दिया सुधार।।--जितनी मिली चुनौतियाँ, किया उन्हें स्वीकार।स...
 पोस्ट लेवल : दोहे होंगे नये सुधार
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परिवेश पर विविध दोहे--उच्चारण सुधरा नहीं, बना नहीं परिवेश।अँगरेजी के जाल में, जकड़ा सारा देश।१।--अपना भारतवर्ष है, गाँधी जी का देश।सत्य-अहिंसा के यहाँ, मिलते हैं सन्देश।२।--लड़की लड़का सी दिखें, लड़के रखते केश।पौरुष पुरुषों में नहीं, दूषित है परिवेश।३।--भौतिकत...
 पोस्ट लेवल : दोहे परिवेश
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--अब फैशन इस दौड़ में, मानवता लाचार।।नहीं रही शालीनता, वस्त्र गये हैं हार।।--उपवन में कलियाँ करें, जब-जब भी शृंगार।उन्हें रिझाने के लिए, मधुप करें गुंजार।।--कामुकता के मूल में, सुन्दरता के तार।रूप-गन्ध के लोभ में, मधुप करें बेगार।।--रूप-रंग क...
 पोस्ट लेवल : मानवता लाचार दोहे
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उपवन में कलियाँ करें, जब-जब भी शृंगार।उन्हें रिझाने के लिए, मधुप करे गुंजार।।कामुकता के मूल में, सुन्दरता के तार।रूप-गन्ध के लोभ में, मधुप करे बेगार।।रूप-रंग को देखकर, मधुप हुआ लाचार।असली सुमनों से करें, भँवरे नकली प्यार।।बदल गया है आज तो, यौवन क...
 पोस्ट लेवल : दोहे यौवन का किरदार
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जो मानवता के लिए, चढ़ता गया सलीब।वो ही होता कौम का, सबसे बड़ा हबीब।।--जिसमें होती वीरता, वही भेदता व्यूह।चलता उसके साथ ही, जग में विज्ञ समूह।।--मंजिल हो जिस राह में, उस पर चलते लोग।पालन करता नियम जो, वो ही रहे निरोग।।--जो जन सेवा के लिए, करता है पुरुषार्थ।उसके सारे...
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--प्रजातन्त्र का सिरफिरे, भूल गये हैं अर्थ। सर्व धर्म समभाव से, बनता देश समर्थ।।--एक पन्थ में क्यों भरा, इतना आज जुनून।बना सभी के है लिए, भारत का कानून।।--अल्ला के इसलाम को, लोग गये हैं भूल।मुल्लाओं की बात को, करते लोग कुबूल।।--भारत के जो नागरिक, भूल गये है फर...
 पोस्ट लेवल : दोहे थम जाये घुसपैंठ
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--निकला है तूणीर से, एक नया फिर तीर।बिन तैयारी के हुआ, रोड-टैग तामीर।।--बिना विचारे थोपती, नियम यहाँ सरकार।टोल-ठिकानों पर लगी, भारी आज कतार।।--ठगे हुए से देखते, लोग नये कानून।शासन के लिखता जा रहा, मनमाने मजमून।।--भेड़ हो गयी है प्रजा, भय से है लाचा...
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--सम्बन्धों को जी नहीं, पाते हैं जो लोग।अपनेपन का वो यहाँ, झेलें सदा वियोग।।--सम्बन्धों की नाव की, नाजुक है पतवार।इसे प्यार से थामकर, करना सागर पार।।--सम्बन्धों की डोर को, अधिक न देना ढील।मत देना परिवार में, झूठी कभी दलील।।--कर्म असीमित है यहाँ,...