ब्लॉगसेतु

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--महँगाई के दौर में, प्याज कर रही राज।थाली में भी शगुन की, आ पहुँची है प्याज।।-- शासन भी सुनता नहीं, जनता की आवाज।तरकारी में हो गयी, आज नदारद प्याज।। --बिगड़ा हुआ नसीब है, हुई कोढ़ में खाज।आम आदमी से हुई, बहुत दूर अब प्याज।।-- बिना त...
 पोस्ट लेवल : आज नदारद प्याज दोहे
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--लगता है अब देश में, हार गयी है शर्म।प्रतिदिन होते हैं यहाँ, यत्र-तत्र दुष्कर्म।।--इस बदतर हालात का, अपराधी है कौन।भौंडे टीवी दृश्य पर, जनसेवक क्यों मौन।।--कामुकता पसरी हुई, चलचित्रों में आज।उठती नहीं विरोध में, जनता की आवाज।।--संसद में भी सांसद,...
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--सालगिरह पर ब्याह की, पाकर शुभसन्देश।जीवन जीने का हुआ, सिन्दूरी परिवेश।।--कर्म करूँगा तब तलक, जब तक घट में प्राण।पा जाऊँगा तन नया, जब होगा निर्वाण।।--आना-जाना ही यहाँ, जीवन का है मर्म।वैसा फल मिलता उसे, जैसे जिसके कर्म।।--चुनकर गंगा घाट पर, पत्थर रहा तराश।किसी मोड...
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--परिणय को अपने हुए, आज छियालिस वर्ष।मिल-जुलकर परिवार को, हमने बाँटा हर्ष।।--चलती जीवन-संगिनी, कदम मिलाकर साथ।उसके ही अस्तित्व से, कहलाये हम नाथ।।--जीवन के पथ में बहुत, देखे हमने मोड़।मंजिल पर बढ़ते गये, छोड़ समय की होड़।।--रखना सब पर हे प्रभो, दया-दृष...
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--कामुकता-अश्लीलता, फैली चारों ओर।जीवन में कैसे मिले, सुख की उजली भोर।।--दुराचार में हो गये, कामी भँवरे मस्त।दिन में ही अब देश में, दिनकर होता अस्त।।--थमता दिखता है नहीं, कामुकता का दौर।दुनिया में कैसे बने, भारत अब शिरमौर।।--कामुकता से हो गया, लज्जित आज समाज।म...
 पोस्ट लेवल : दोहे कामुकता का दौर
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--बादल नभ में छा गये, शुरू हुई बरसात।अन्धकार ऐसा हुआ, जैसे श्यामल रात।।--अकस्मात सरदी बढ़ी, निकले कम्बल-शाल।पर्वत के भूभाग में, जीना हुआ मुहाल।। --पर्वत पर दिनभर हुआ, खूब आज हिमपात।किट-किट बजते दाँत हैं, ठिठुर रहा है गात।।--मैदानी भू-भाग में, ओलों...
 पोस्ट लेवल : ठिठुर रहा है गात दोहे
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--फड़नवीस सरकार की, बन्द हो गयी राह।असमंजस में हैं पड़े, मोदी-नड्डा-शाह।।--बाला साहब का हुआ, सपना अब साकार।राजनीति के खेल में, गयी भा.ज.पा. हार।।--छल की नौका से भला, कौन हुआ है पार।जब आये मझधार में, टूट गयी पतवार।।--तुरुप चाल अपनी चले, छत्रप शरद पव...
 पोस्ट लेवल : उद्धव की सरकार दोहे
sanjiv verma salil
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मेरे गुरु और अग्रजवत श्री सुरेश उपाध्याय के दोहे प्रस्तुत करते हुए मन प्रसन्न है।मेरे दोहे उपनिषदसुरेश उपाध्यायमेरे दोहे उपनिषद मेरे दोहे वेदनामवरों को हो रहा सुनकर भारी खेदओशो ने खुद को कहा पढ़ालिखा भगवानमैं हो गया प्रबुद्ध तो हर कोई हैरानतूने खुद को ही किया सदा न...
 पोस्ट लेवल : दोहे सुरेश उपाध्याय
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--जनसेवा के नाम पर, मन में पसरा मैल।निर्धन श्रमिक-किसान तो, कोल्हू के हैं बैल।।--छँटे हुए सब नगर के, बन बैठे गुणवान।  पत्रकारिता में बचे, कम ही अब विद्वान।।--जो समाज की नजर में, कभी रहे बेकार।वो अब अपने देश में, चला रहे अखबार।।--पत्रकारिता में हुआ, गोल आज किरद...
 पोस्ट लेवल : मन में पसरा मैल दोहे
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--सागर में रखना नहीं, किसी जीव से बैर।राम नाम के जाप से, पाहन जाते तैर।।--एक रात में गुम हुए, अंकगणित के अंक।आज वही राजा बने, कल तक थे जो रंक।।--कौन यहाँ खुद्दार है, और कौन गद्दार।लड्डू पाता है वही, जो होता मक्कार।।--राजनीति में आज भी, चलता यही र...
 पोस्ट लेवल : दोहे अंकगणित के अंक