ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
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 पनीले पात से बदलते परिवेश में, अवतरित हुआ है धरा पर, एक सुडोल और कमनीय काय प्राणी, कोख़ से नहीं किसी के,भविष्य की लालसामय अंधगुफाओं से,पथभ्रष्ट,आत्महारा,आत्मकेन्द्रीत,हृदय है जिसका विगलित |तीक्ष्ण बुद्धि के साथ लिये है, तंज़ का एक सुनहरा हथि...
अनीता सैनी
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 उजड़ रहा है साहेब धरा के दामन से विश्वास सुलग रही हैं साँसें कूटनीति जला रही है ज़िंदा मानस   सुख का अलाव जला भी नहीं दर्द धुआँ बन आँखों में धंसाता गया  निर्धन हुआ बेचैन  वक़्त...
विजय राजबली माथुर
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वसुंधरा फाउंडेशन के तत्वाधान में गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर दिनांक 01 अक्तूबर 2019 की साँय राष्ट्रीय पुस्तक मेला सभागार, मोतीमहल, लखनऊ   में   एक विचार गोष्ठी "सुराज,स्वदेशी और महात्मा गांधी'' विषय पर राम किशोर जी की अध्यक्षता में सम्पन्न हु...
Yashoda Agrawal
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गर चंद तवारीखी तहरीर बदल दोगे क्या इनसे किसी कौम की तक़दीर बदल दोगे जायस से वो हिन्दी की दरिया जो बह के आई मोड़ोगे उसकी धारा या नीर बदल दोगे जो अक्स उभरता है रसख़ान की नज्मों में क्या कृष्ण की वो मोहक तस्वीर बदल दोगे तारीख़ बताती है तु...
Yashoda Agrawal
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हम घूम चुके बस्ती-बन मेंइक आस का फाँस लिए मन मेंकोई साजन हो, कोई प्यारा होकोई दीपक हो, कोई तारा होजब जीवन-रात अंधेरी होइक बार कहो तुम मेरी हो।जब सावन-बादल छाए होंजब फागुन फूल खिलाए होंजब चंदा रूप लुटाता होजब सूरज धूप नहाता होया शाम ने बस्ती घेरी होइक बार कहो तुम मे...
Yashoda Agrawal
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तमाम निराशा के बीचतुम मुझे मिलीं सुखद अचरज की तरह मुस्कान में ठिठक गए आंसू की तरह शहर में जब प्रेम का अकाल पड़ा था और भाषा में रह नहीं गया था उत्साह का जल तुम मुझे मिलीं ओस में भीगी हुई दूब की तरह दूब में मंगल की&nb...
Yashoda Agrawal
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अपना ग़म लेके कहीं और न जाया जायेघर में बिखरी हुई चीज़ों को सजाया जाये जिन चिराग़ों को हवाओं का कोई ख़ौफ़ नहींउन चिराग़ों को हवाओं से बचाया जाये बाग में जाने के आदाब हुआ करते हैं किसी तितली को न फूलों से उड़ाया जाये ख़ुदकुशी करने की हिम्मत नहीं...
Yashoda Agrawal
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गूगल से साभार मैं कब कहता हूँ वो अच्छा बहुत हैमगर उसने मुझे चाहा बहुत हैखुदा इस शहर को महफ़ूज़ रखेये बच्चो की तरह हँसता बहुत हैमैं हर लम्हे मे सदियाँ देखता हूँतुम्हारे साथ एक लम्हा बहुत हैमेरा दिल बारिशों मे फूल जैसाये बच्चा रात मे रोता बहुत हैवो अब लाखों दिलो...
sanjiv verma salil
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कुमाऊनी लोकगीत में छंद : एक विमर्शडाॅ0 वसुंधरा उपाध्यायसहा. प्राध्यापक हिंदी विभाग  एल.एस.एम.रा.स्ना.महा. पिथौरागढ़ भारत के अन्य भागों के इतरह कुमाऊँ में लोक साहित्य की परंपरा उतनी ही पुरानी है जितनी पुरानी मानव जाति है। लोकगीत, लोक कथा, लोकोक्ति...
Ravindra Pandey
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर नारी शक्ति को प्रणम्य निवेदित पंक्तियाँ....**********************************सृजन को करती सदा जीवंत हैं ये नारियाँ,हर विधा हर काल में ये शक्ति का पर्याय हैं...गोद में खेले ये जब, भर दे हमें वात्सल्य से,रूप लें सीता का तो ये त्याग का अभिप...