ब्लॉगसेतु

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मेरे काव्य संग्रह 'धरा के रंग' से एक गीत"गीत गाना जानते हैं" वेदना की मेढ़ को पहचानते हैं।हम विरह में गीत गाना जानते हैं।।भावनाओं पर कड़ा पहरा रहा,दुःख से नाता बहुत गहरा रहा,,मीत इनको हम स्वयं का मानते हैं।हम विरह में गीत गाना जानते हैं।।रात-दिन चक्र चलता जा र...
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मेरे काव्य संग्रह 'धरा के रंग' से एक गीत"मोटा-झोटा कात रहा हूँ" रुई पुरानी मुझे मिली है, मोटा-झोटा कात रहा हूँ।मेरी झोली में जो कुछ है, वही प्यार से बाँट रहा हूँ।।खोटे सिक्के जमा किये थे, मीत अजनबी बना लिए थे,सम्बन्धों की खाई को मैं, ख...
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मेरे काव्य संग्रह 'धरा के रंग' से एक गीत"सिमट रही खेती" सब्जी, चावल और गेँहू की, सिमट रही खेती सारी।शस्यश्यामला धरती पर, उग रहे भवन भारी-भारी।।बाग आम के-पेड़ नीम के आँगन से  कटते जाते हैं, जीवन देने वाले वन भी, दिन-प्रतिदिन घटते जाते है, लगी...
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मेरे काव्य संग्रह 'धरा के रंग' से एक गीत"विध्वंसों के बाद नया निर्माण"पतझड़ के पश्चात वृक्ष नव पल्लव को पा जाता।विध्वंसों के बाद नया निर्माण सामने आता।।भीषण सर्दी, गर्मी का सन्देशा लेकर आती, गर्मी आकर वर्षाऋतु को आमन्त्रण भिजवाती,सजा-धजा ऋतुराज प्रेम के अ...
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मेरे काव्य संग्रह 'धरा के रंग' से एक गीत"श्वाँसों की सरगम"कल-कल, छल-छल करती गंगा,मस्त चाल से बहती है।श्वाँसों की सरगम की धारा,यही कहानी कहती है।।हो जाता निष्प्राण कलेवर,जब धड़कन थम जाती हैं।सड़ जाता जलधाम सरोवर,जब लहरें थक जाती हैं।चरैवेति के बीज मन्त्र को,पुस्तक-प...
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मेरे काव्य संग्रह 'धरा के रंग' से एक गीत"अनजाने परदेशी"वो अनजाने से परदेशी!मेरे मन को भाते हैं।भाँति-भाँति के कल्पित चेहरे,सपनों में घिर आते हैं।। पतझड़ लगता है वसन्त,वीराना भी लगता मधुबन,जब वो घूँघट में से अपनी,मोहक छवि दिखलाते हैं।भाँति-भाँति के कल्पित चेहरे...
Rajendra kumar Singh
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१. धरा के रंग सजी-सँवरी दुल्हन सुहाने लगे २. स्वर्ण सा दिखे चाँद की चाँदनी में अमलताश  ३. ओस की बूंदें घास  पर पसरी मानो  है मोती ४. ओस बेचारी जीवन मनोरम रात का साथ५. छटा बिखे...
 पोस्ट लेवल : धरा के रंग हाइकू
Rajendra kumar Singh
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१.पृथ्वी की गोद पेड़ों की हरियाली सूनी पड़ी है२.कटते वृक्ष बढ़ता प्रदुषणचिन्ता सताए ३.रोती जमीनप्रकृति की लाचारी जख्मी आँचल ४.उड़ते मेघ सींचे कैसे धरती सुखी नदियाँ ५.सुनी बगिया कोयल भी खामोश खो गयी कहाँ ६.थके पथिक छाया को तरसते मिली न छाया ७.वन से जल जल से है...
 पोस्ट लेवल : हाइकू धरा haikoo
Krishna Kumar Yadav
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'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटता यशोधरा यादव ‘यशो‘ का एक गीत. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा...आपके दामन से मेरा, जन्म का नाता रहा है ,प्यार की गहराइयों का, राज बतलाता रहा है।मौन मत बैठो कहो कुछ, आज मौसम है सुहाना,कलखी धुन ने बजाया...